Latest Updates
-
Indian Air Force Day 2026: दुनिया की सबसे ताकतवर एरयफोर्स में से एक है भारतीय वायुसेना, जानें 10 खास बातें -
35 साल की उम्र में दूसरी बार मां बनेंगी कियारा आडवाणी , जानिए इस उम्र में मां बनना कितना सेफ है? -
Nana Patekar Net Worth: 35 रुपये महीने से करोड़ों तक, जानें अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गए नाना पाटेकर? -
Nana Patekar Family: नाना पाटेकर के परिवार में कौन-कौन है? पत्नी से रहते थे अलग, कम उम्र में खो दिया था बेटा -
नाना पाटेकर का 75 की उम्र में Cardiac Arrest से निधन, समझिए हार्ट अटैक से कितने अलग होते है इसके लक्षण -
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में किस दिन कौन से रंग के कपड़े पहनें? यहां देखें 11-19 अक्टूबर की पूरी लिस्ट -
Navratri Va Durga Puja: नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है? एक ही देवी, फिर क्यों अलग हैं दोनों पर्व -
Navratri Recipes 2026: डायबिटीज के मरीज नवरात्रि व्रत में खाएं ये 5 शुगर फ्री रेसिपी, नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
मानसून में डायबिटीज के मरीज पैरों का ख्याल कैसे रखें? डॉक्टर से जानें आसान फुट केयर टिप्स -
Navratri 2026: गरबा में दिखना है स्टाइलिश? ट्राई करें ये 6 एवरग्रीन ब्लाउज डिजाइन
भूल कर भी अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें

जिस प्रकार पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती ठीक उसी प्रकार हर बच्चा अपने आप में अलग और ख़ास होता है। हर माता पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए ताकि उनके बच्चे में आत्मविश्वास की कमी ना हो और उसके जीवन में खुशियां ही खुशियां रहे।
कई माता पिता अपने बच्चों की तुलना अकसर दूसरे बच्चों से करने लगते हैं जो की बिल्कुल गलत होता है। कई अध्ययनों से इस बात का खुलासा हुआ है कि ऐसे में आपके बच्चे का मनोबल गिरता है और वह अपने आप को कमज़ोर समझने लगता है। इसके अलावा इन अध्ययनों से इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस तरह की बातों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है जिसका ठीक होना बाद में बेहद मुश्किल हो जाता है।

कहते हैं बच्चे मिट्टी की तरह होते हैं आप उन्हें जैसा आकार देंगे वो वैसे ही बनेंगे इसलिए माता पिता होने के नाते कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका ध्यान रखना आपके लिए बेहद ज़रूरी होता है ताकि आप अपने बच्चे की परवरिश समझदारी से कर सकें।
इस लेख में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे कि माता पिता होने के नाते आपको अपने बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए, न की दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करके उन्हें मानसिक तौर पर कमज़ोर करना चाहिए।
कैसे करते हैं माता पिता दूसरों से अपने बच्चों की तुलना
अकसर हमने माता पिता को बच्चों से यह कहते सुना होगा कि "तुम खुद को देखो और उस बच्चे को देखो, कितना अच्छा है वह", ख़ास तौर पर ऐसे वाक्य वो पेरेंट्स कहते हैं जिनके बच्चे शरारती होते हैं। वे उनकी बदमाशियों से तंग आ जाते हैं और अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं कर पाते। हालांकि वे अपने गुस्से में इस बात का अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हैं कि उनके कहे हुए ये सारे शब्द किस प्रकार मानसिक रूप से उनके बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं।
बच्चे हो या बड़े किसी की भी तुलना किसी से नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इससे मनुष्य का आत्मविश्वास कमज़ोर होता है। ख़ास तौर पर बच्चे इस तरह की आलोचनाओं का सामना करने में सक्षम नहीं होते इसलिए इसका नकारात्मक प्रभाव हमेशा के लिए उनके जीवन पर पड़ जाता है।
इसके अलावा स्वयं के माता पिता के मुख से अपनी ऐसी आलोचना सुनना कि दूसरे बच्चे उनसे बेहतर हैं उनके लिए बेहद दुखद होता है। माता पिता होने के नाते आपको अपने बच्चों को सही और गलत के बीच फर्क समझाना चाहिए। साथ ही उन्हें उनकी गलतियों का एहसास दिलाना चाहिए लेकिन इसके लिए यह ज़रूरी नहीं कि आप हर बार उनकी तुलना दूसरों से करें।
बच्चों का सही मार्ग दर्शन करें
आज के इस बदलते हुए समय में आपका बच्चा चारों तरफ से प्रतिस्पर्धा से घिरा हुआ है चाहे वो स्कूल हो या फिर मामूली सा वह पार्क जहां वो खेलने जाता है। बेहतर होगा हम अपने बच्चे को इस तरह की प्रतिस्पर्धा से दूर रखें कम से कम घर पर तो आप ऐसा कर सकते हैं। ऐसे में उनके अंदर किसी भी प्रकार की हीन भावना जागृत नहीं होगी और उन्हें सही और गलत की भी पहचान हो जाएगी। इसके अलावा आप उन्हें यह सिखा सकते हैं कि किस तरह वे अपनी कमज़ोरियों को दूर करके वो खुद को मज़बूत बना सकते हैं। अगर आप हर बार अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करते रहेंगे तो ज़ाहिर सी बात है कि वे हीन भावना का शिकार हो जाएंगे जिसके बाद आपके लिए चीज़ों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए नहीं करनी चाहिए दूसरों से अपने बच्चों की तुलना
हर माता पिता अपने बच्चे के लिए सबसे बेस्ट ही करना चाहते हैं लेकिन अगर आप उन्हें अच्छी तरह से नहीं समझेंगे या फिर उनकी तुलना दूसरों से करेंगे तो ऐसे में आपका बच्चा कभी आगे नही बढ़ पाएगा। यह कुछ मुख्य कारण है कि आखिर क्यों आपको अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से नहीं करनी चाहिए।
1. जब हमसे यह कहा जाता है कि सामने वाला हमसे किसी चीज़ में बेहतर है तो ऐसी परिस्थिति में हम अपनी खुद की काबिलियत पर शक करने लगते हैं और धीरे धीरे कमज़ोर पड़ने लगते हैं। यही बात बच्चों पर भी लागू होती है।
2. अगर आप अपने बच्चे की तुलना अपने किसी पड़ोसी के बच्चे, उसके स्कूल के किसी बच्चे या फिर अपने किसी रिश्तेदार के बच्चे से करेंगे तो ऐसे में उसके मन में जलन जैसी भावना पैदा हो जाएगी जो आगे चलकर क्रोध और घृणा का रूप ले लेगी।
3. तुलना बच्चों की सकारात्मक ऊर्जा को भी नष्ट कर देती है। वे नयी नयी चीज़ों को सीखने में और चुनौतियों का सामना करने में डरने लगते हैं क्योंकि उन्हें हारने का डर सताने लगता है। उनके मन में नकारात्मकता पूरे तरीके से घर कर लेती है।
4. ध्यान रहे कि अपने बच्चे की तुलना करके आप उसे न केवल मानसिक रूप से कमज़ोर कर रहे हैं बल्कि वह आपसे भी दूर हो रहा है। कहीं न कहीं इससे आपके रिश्ते पर भी बुरा असर पड़ता है।
5. अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करके आप उन पर एक तरह से दबाव डालने लगते हैं। उन्हें लगने लगता है कि वे आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि बच्चों को अच्छी परवरिश देना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए माता पिता को बहुत से त्याग और बलिदान करने पड़ते हैं। कोई भी माता पिता जान बूझकर अपने बच्चों के साथ गलत नहीं कर सकते। वे हमेशा उनका भला ही चाहते हैं फिर भी कई बार अनजाने में ही सही वे कुछ ऐसा कर जाते हैं जो किसी भी तरह से उनके बच्चों के लिए सही नहीं होता।
बच्चों को सही रास्ता दिखाना माता पिता का काम होता है क्योंकि उनका घर ही उनका सबसे पहला स्कूल माना जाता है इसलिए अभिभावक होने के नाते उनके अंदर अच्छे या बुरे गुण लाना आप पर ही निर्भर करता है। बेहतर जीवन के लिए सकारात्मक रहना बहुत ज़रूरी होता है इसलिए हमेशा अपने बच्चों को उजले पक्ष को देखना सीखाएं और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास दिलाएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं।



Click it and Unblock the Notifications
