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स्कूल के नाम से ही कांपता है आपका बच्चा, कहीं वो School Bullying का शिकार तो नहीं है?
स्कूलों में आए दिन बच्चों के बुलिंग होने के मामले देखे जाते हैं। आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों में भी अवसाद और डिप्रेशन के कैसेज देखने को मिल रहे हैं। जिसमें से एक वजह School Bullying भी है। हिंदी में बुलिंग (Bullying) का मतलब है किसी कमजोर व्यक्ति पर धौंस जमाना। बुलिंग यानी किसी ऐसे व्यक्ति को डराना, मारना, धमकाना या किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाना, जो खुद का डिफेंस करने में सक्षम न हो।
बच्चों के मामले में इसे चाइल्ड बुलिंग (Child Bullying) कहते हैं और ऐसे मामले अगर स्कूलों में हों तो स्कूल बुलिंग (School Bullying) कहा जाता है। आमतौर पर बच्चे अक्सर बुलिंग का शिकार अपने स्कूलों में ही होते हैं। यह एक ऐसा वर्बल, फिजीकल, सोशल और साइकोलॉजिकल एग्रेसिव बिहेवियर होता है, जिसे कमजोर व्यक्ति या बच्चे के साथ बार-बार दोहराया जाता है।
इसकी वजह से बच्चों के बिहेवयर में अचानक से परिवर्तन आने लगता है और इसका असर बच्चें पूरे समग्र विकास पर देखने को मिलता है। आज हम आपको यहां कुछ ऐसे संकेत बता रहे है जिससे आप जान आसानी से मालूम कर सकते हैं कि आपका बच्चा स्कूल बुलिंग का शिकार हो रहा है।

स्कूल जाने से डरता है
जो बच्चें स्कूल में बुलिंग का शिकार होते है वो अक्सर स्कूल जाने के नाम से डरने लगते हैं। वो स्कूल जाने से बचने के लिए रोज नए बहाने बनाने लगत है।
जैसे वो अक्सर दर्द की शिकायत करते हैं। सुबह जब आप उनको उठाएंगे तो वो पेट दर्द या सिर दर्द का बहाना बनाएंगे। बुलिंग की वजह से वो काफ़ी डरे रहते हैं। अगर आप इस बारे में इससे बात भी करेंगे तो शुरु में वो आपको खुलकर नहीं बताएंगे। अगर आपका बच्चा भी स्कूल जाने से बचने के लिए बहाना बना रहा है तो इस बारें खुद ही पड़ताल करें और उसका विश्वास जीतकर इस बारे में खुलकर बात करें।

नंबर न लाना
पिछले कुछ दिनों से आपके बच्चें का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है। पिछले टेस्ट की तुलना में इस बार भी आपके बच्चें की टेस्ट में नम्बर कम आए है तो आपको कारण मालूम होने चाहिए। बुली होने की वजह से बच्चे अक्सर एंग्जायटी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए क्लास में ध्यान भी नहीं दे पाते। इस वजह से कई बारबच्चे डिप्रेशन का भी शिकार हो सकते हैं। उन्हें नींद आने में प्रॉब्लम होती है। इन वजहों से उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है जिसका नतीजा एग्जाम में नजर आता है।

भूख न लगना
अगर आपका बच्चा रोज़ लंच बॉक्स खाएं बगैर ला रहा है तो ये चिंता का विषय है। शुरु के कुछ समय में आप अपने बच्चों को उसका मनपसंदीदा टिफ़िन बनाकर दें, अगर वो अब भी वापस ला रहा है तो इसके पीछे बुलिंग एक वजह हो सकती है। बुलिंग के शिकार होने पर बच्चें अक्सर खाना पीना छोड़ देते है, इसलिए ज़रूरी है आप अपने बच्चे की डाइट पर ध्यान दें।

अगर शरीर पर आए चोट के निशान नजर
आपका बच्चा स्कूल से वापस आता है और उसके शरीर पर रोज चोटों के निशान होते है? आपके पूछने पर वो बहाने बना देता है। अगर ऐसा आए-दिन हो रहा है तो ये परेशानी की बात है। आप अपने बच्चे से बात करें या उसे किसी साइकोलॉजिस्ट के पास लेकर जाएं।

खेलने में मन न लगना
बचपन में हर बच्चें को खेलने का शौक होता ही है। पर अगर आपका बच्चा बुली हो रहा है तो वो बाहर खेलने जाने से डरेगा। अगर आप नोटिस करें कि आपका बच्चा खेलने नहीं जा रहा या बाकी बच्चों से कन्नी काट रहा है और वो सबसे अलग थलग अकेले रहने लगता है।

कई तरह की होती है बुलिंग
फिजीकल : इस तरह की बुलिंग में बच्चों से मारपीट करना, उनकी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। फिजीकल बुलिंग बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होती है।
साइकोलॉजिकल और सोशल : इस तरह की बुलिंग में बच्चे के बारे में अफवाह उड़ाई जाती है, उसे नीचा दिखाया जाता है और उसे अपने ग्रुप से अलग कर दिया जाता है।
मौखिक और लिखित में : इसमें बच्चों को उनके नाम को बिगाड़कर बुलाना, उन पर चुटकुले करना, टॉन्ट करना या फिर उन्हें किसी तस्वीर या पोस्टर आदि दिखाकर खिंचाई करना शामिल होता है।



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