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इन पेरेंटिंग मिस्टेक्स की वजह से बच्चें बन जाते है मोबाइल के लती, ऐसे सुधारे इनकी आदतें
आज ज्यादातर पेरेंट्स इस बात से परेशान है कि उनके बच्चे सारा दिन मोबाइल से चिपके रहते हैं। जो ना सिर्फ बच्चों को शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी दुष्प्रभावित कर रहा है। कई बच्चे तो सुबह उठने के साथ फोन हाथ में लेते है और रात तक इसी में खोए रहते है। यानि अगर 2 मिनट भी उनसे फोन मांग लो तो वे रोने लगते है। कई बच्चे तो ऐसे भी है जो मोबाइल हाथ में देने के बाद ही खाना खाते है। यानि अगर आपको अपने बच्चे को जरूरी पोषण देना है तो उन्हें फोन दिखाना ही पड़ेगा। तो बच्चों में जो ये मोबाइल की लत लगी है इसके पीछे आखिर जिम्मेदार कौन है, क्या कोरोना काल ने बच्चों को मोबाइल का आदि बनाया है या इसके पीछे पेरेंटस जिम्मेदार है।

बच्चों की इस खराब आदत का आखिर जिम्मेदार कौन है
असल में माता-पिता की गलती की वजह से ही बच्चों को मोबाइल की लत लगी है क्योंकि बच्चे अक्सर अपने पैरेंट्स को भी फोन में ही लगे देखते हैं और खुद भी यही करते हैं। इसके अलावा छोटी उम्र में ही बच्चों को फोन थमा देना भी एक बड़ी गलती है। ये जानते हुए भी कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की आंखों के साथ उसके मानसिक स्वास्थ्य को भी बिगाड़ सकता है। खैर अब सवाल ये उठता है कि बच्चों को जो मोबाइल की ये लत लगी है तो उससे छुटकारा कैसे पाया जाए। इस लेख में हम ऐसी पैरेंटिंग मिस्टेक्स के बारे में जानेंगे जिन्हें सुधारकर पैरेंट्स बच्चों के इस एडिक्शन को दूर कर सकते हैं।
1. अगर आप चाहते है कि आपका बच्चे की ये आदत छूट जाए, तो उसमें जल्दबाजी ना दिखाए। यानि आपको बच्चों से एकदम से मोबाइल नहीं छीन लेना है बल्कि उनके लिए कुछ रूल-रेगुलेशन सेट करने है जिससे उनकी आदत धीरे-धीरे खुद ही छूट जाए।
2. सबसे पहले पेरेंटस खुद में बदलाव लाए। यानि सुबह की शुरुआत ना खुद मोबाइल के साथ करें और ना बच्चों को करने दें। और जब बच्चे अपने फेवरेट शो देखने के लिए मोबाइल मांगें तो आप टीवी पर उनके शोज चला सकते हैं। ऐसा करने से उनका ध्यान टीवी की तरह डाइवर्ट हो जाएगा।
3. खाने खाते समय पेरेंटस भी मोबाइल के इस्तेमाल से बचें, क्यूंकि बच्चे वहीं चीजें करते है जो वह देखते है। ऐसे में अगर आप भी मोबाइल से दूरी बना लेंगे तो बच्चे भी जिद्द नहीं करेंगे.

4. बच्चों को गेम की तरफ आकर्षित करने के लिए इनडोर गेम्स या फिजिकल एक्टिविटीज कराएं। और जब भी बच्चा फोन मांगे उसे किसी तरह से दूसरी एक्टिविटीज में बिजी कर दें।
5. कभी भी बच्चे का रोना चुप कराने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल ना करें। इसकी बजाय आप घुटनों पर बैठकर बच्चे का खिलौना बन जाइए। यकीन मानिए बच्चा आपको देखकर अपना रोना भूल जाएगा।
6. बच्चे जब मोबाइल की हद से ज्यादा जिद करने लगे तो मोबाइल का नेट बंद कर दें। वैसे भी बिना नेट के मोबाइल किसी डिब्बे से कम नहीं है। जब नेट नहीं चलेगा तो वो खुद ही थक हार के जिद करना छोड़ देगा।



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