Latest Updates
-
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि
पाकिस्तान में इनक्यूबेटर की कमी से गई नवजात की जान, प्रीमैच्योर बच्चों के लिए क्यों जरूरी है ये सपोर्ट सिस्टम?
What is an Incubator : पाकिस्तान के सिंध में जैकोबाबाद से हाल ही में एक दिल तोडने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नवजात शिशु ने अस्पताल में इनक्यूबेटर न होने के कारण दम तोड़ दिया। यह घटना रविवार की है जब एक पिता अपनी नवजात बेटी को लेकर कई अस्पतालों के चक्कर काट रहा था लेकिन उसे न ही किसी निजी और न ही सरकारी अस्पताल में इनक्यूबेटर उपलब्ध हो पाया। अंततः एक अस्पताल ने उन्हें सुक्कुर रेफर किया, लेकिन बच्ची ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
यह घटना पाकिस्तान में मेडिकल सेवाओं की सच्चाई बयां करता है। उजागर करती है। इस दुखद घटना से यह सवाल उठता है कि इनक्यूबेटर क्यों जरूरी होता है और यह कैसे नवजात शिशुओं की जान बचा सकता है। आइए जानते हैं इनक्यूबेटर क्या होता है और इसकी जरूरत क्यों होती है।

इनक्यूबेटर क्या होता है?
इनक्यूबेटर एक तरह का मेडिकल एक्यूपमेंट होता है जिसे नवजात शिशुओं खासकर प्रीमैच्योर को सुरक्षित, नियंत्रित और संक्रमण मुक्त वातावरण देने के लिए बनाया गया है। इस मशीन में तापमान, नमी और ऑक्सीजन का स्तर नियंत्रित रखा जाता है ताकि शिशु का शारीरिक विकास सुचारू रूप से हो सके।
इनक्यूबेटर की आवश्यकता क्यों होती है?
प्रीमैच्योर बेबी: 37 सप्ताह से कम समय में जन्मे शिशुओं के शरीर में तापमान को बनाए रखने की क्षमता नहीं होती। इनक्यूबेटर उन्हें गर्मी प्रदान करता है और बाहरी संक्रमण से भी बचाता है।
कम वजन वाले शिशु: 2.5 किलोग्राम से कम वजन वाले शिशुओं को हाइपोथर्मिया का खतरा होता है। इनक्यूबेटर ऐसे शिशुओं के लिए जीवनदायी साबित होता है।
रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स: कुछ नवजात बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है, जैसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम। इनक्यूबेटर ऑक्सीजन और नियंत्रित हवा की आपूर्ति करके उन्हें राहत देता है।
संक्रमण से बचाव: कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले नवजात आसानी से संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। इनक्यूबेटर उन्हें संक्रमण से सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है।
विशेष स्थितियां: यदि शिशु सी-सेक्शन या सर्जरी के माध्यम से पैदा हुआ है या किसी जन्मजात विकार से ग्रसित है, तब भी इनक्यूबेटर में रखे जाने की आवश्यकता होती है।
Pak: Newborn dies of lack of incubator in Jacobabad
— ANI Digital (@ani_digital) July 21, 2025
Read @ANI Story | https://t.co/gMiWdU8wDn#Pakistan #babydies #hospital #incubator pic.twitter.com/WzfVUwbm6r
इनक्यूबेटर कैसे काम करता है?
इनक्यूबेटर दो प्रकार के होते हैं:
नियोनेटल इनक्यूबेटर: यह नवजात शिशुओं के लिए होता है जो तापमान, ऑक्सीजन और नमी को नियंत्रित करता है। इसमें मॉनिटरिंग सिस्टम होता है जो शिशु की दिल की धड़कन, सांस की दर और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी करता है।
एग इनक्यूबेटर: यह पक्षियों के अंडों के लिए होता है और इसका नवजात शिशुओं से कोई संबंध नहीं होता।
बिना इनक्यूबेटर के नवजात कितना जीवित रह सकता है?
प्रीमैच्योर बेबी का जीवन बिना इनक्यूबेटर के कुछ घंटों से लेकर 1-2 दिन तक हो सकता है, खासकर जब उसके अंगों का पूरी तरह विकास न हुआ हो। वहीं, फुल टर्म और हेल्दी नवजात कुछ समय तक बिना इनक्यूबेटर जीवित रह सकते हैं, लेकिन यदि उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो इनक्यूबेटर की आवश्यकता अनिवार्य हो जाती है।
हेल्थलाइन के अनुसार, यदि नवजात को पीलिया, गैस्ट्रिक समस्याएं, जन्म के समय डायबिटीज या डिलेवरी में जटिलता रही हो, तो ऐसे मामलों में इनक्यूबेटर अत्यंत जरूरी हो जाता है। समय पर इनक्यूबेटर की सुविधा न मिलने पर शिशु की मृत्यु भी हो सकती है।
इसलिए जरूरी है कि हर अस्पताल में पर्याप्त संख्या में इनक्यूबेटर हों और सरकार इस ओर विशेष ध्यान दे। ताकि किसी भी नवजात को असमय मौत का शिकार न होना पड़े।



Click it and Unblock the Notifications











