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नाक खींचने से क्या शिशु की चपटी नाक तीखी हो जाती है, जानें सच है या मिथक!
अक्सर घरों में बुजुर्ग महिला या दाईयों को आपने भी कहते हुए सुना होगा कि बच्चे की नाक को खींचने नाक तीखी और सुंदर होती है? तो पैरेंट्स भी बच्चे की नाक को सुंदर, नुकीला या शेप मे लाने के लिए बचपन से ही इसे दबाना या खींचना शुरु कर देता है। मगर डॉक्टरों के अनुसार ऐसा करना सही नहीं है। आइए जानते हैं नाक खींचने से क्या सच में शिशु की चपटी नाक तीखी हो जाती है?

दवाब की वजह से पिचक जाती है शिशु की नाक
जन्म के समय जननांग मार्ग से बाहर आते समय शिशु के सिर की तरह ही उसकी नाक भी थोड़ी पिचक जाती है या चपटी हो जाती है या फिर किसी एक तरफ से थोड़ा दब सकती है। इसलिए नवजात शिशुओं की नाक चपटी या गोल होना काफी सामान्य है।

नाक को विकसित होने में लगता है समय
शिशु की नाक की हड्डियों (नेजल ब्रिज) को पूरी तरह विकसित होने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय लग सकता है। शिशु की नाक को खींचने से विकास की इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। कई बार नाक दबाने से बच्चे चिड़चिड़े हो जाते है और शिशु की नाक को क्षति भी पहुंच सकती है। इसलिए बेहतर है कि शिशु की नाक को खींचने से बचें।
बदलता रहता है शेप
बहुत सी नई मांए अपने शिशु के नैन-नक्शों को लेकर चिंतित होंगी। मगर परेशान न हों, शिशु की नाक का शेप शुरुआती सालों में बदलता रहता है। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होगा, उसके फीचर्स में नए बदलाव आएंगे। आपके खींचने या दबाव बनाने से बच्चे की नाक के शेप में बदलाव नहीं आते है।

जींस पर भी निर्भर करता है नाक की शेप
नाक की शेप जींस यानी आनुवांशिकता पर निर्भर करता है। इसलिए बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है। बच्चे की नाक का शेप मां और पिता दोनों में से किसी एक पर जाता है। साथ ही नाक की ऊपरी सख्त हिस्सा यानी हड्डी वाला हिस्सा भी नहीं बदला जा सकता।
लेकिन एक अपवाद यह भी हो सकता है कि नवजात या शिशु की हड्डी बहुत मजबूत नहीं होती है और रोजाना मालिश करने से इसमें थोड़ा बहुत बदलाव शायद आ भी सकता है। निचला हिस्सा, जो कार्टिलेज है, उसको मालिश करने से भी बदलाव आ सकता है या आकार में बदलाव नहीं आ सकता है।



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