गर्भावस्‍था के छटवें महीने में होने वाले परिवर्तन

Posted By: Staff
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जब आप खुशी से झूम रही होती है और घर में एक नए सदस्‍य के आने की तैयारियों में जुटी होती है, जब आपकी बॉडी में कई चेंजेस हो रहे होते है। गर्भावस्‍था के बारे में कई बातें जानने की जरूरत आपको है। हालांकि, गर्भावस्‍था के शुरूआती 6 महीने का समय सबसे ज्‍यादा जरूरी होता है क्‍योंकि इस दौरान आपके और बच्‍चे, दोनों की बॉडी में चेंजेस होते है।

सबसे पहले आपका महसूस करना चाहिए कि आपके बच्‍चे का वजन बढ़ रहा है, इस दौरान बच्‍चे का वजन लगभग 4 औंस बढ़ जाता है। बच्‍चे का शरीर इस अवधि में भरने लगता है और आपको पेट में वजन मालूम चलने लगता है कि हां कुछ है। पेट में हल्‍का सा उभार आने की शुरूआत हो जाती है।

ऐसे टाइम पर अक्‍सर गर्भवती महिला को गेस्‍टेनल डायबटीज की समस्‍या हो जाती है। इसके लिए आपको समय - समय पर जांच भी करवाते रहना चाहिए। क्‍योंकि कई बाद इसे अनदेखा करने पर नेचुरल डिलीवरी में दिक्‍कत भी आती है।

1) पेट में पल रहा बच्‍चा कैसा है? :

1) पेट में पल रहा बच्‍चा कैसा है? :

6 महीने की गर्भावस्‍था के बाद, बच्‍चे का शरीर विकसित हो जाता है, उसकी बॉडी में मूवमेंट शुरू हो जाते है। इस दौरान बच्‍चे का वजन भी लगभग 14 औंस से 3 पाउंड हो जाता है और उसकी लम्‍बाई 11 से 16 इंच की हो जाती है।

2) आपके शरीर में होने वाले परिवर्तन :

2) आपके शरीर में होने वाले परिवर्तन :

गर्भावस्‍था के दौरान, आपके शरीर में भी काफी परिवर्तन होते रहते है। जिन्‍हे ध्‍यान में रखना आवश्‍यक होता है। ऐसे टाइम में आपको कब्‍ज, ब्‍लोटिंग, हार्ट बर्न, पेट में गड़बड़ी, सिर दर्द, थकान, चक्‍कर और उल्‍टी की समस्‍या भी होती है। ये सभी गर्भावस्‍था के लक्षण है जिनसे घबराने की आवश्‍यकता नहीं है।

3) अपने स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण की देखभाल करें :

3) अपने स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण की देखभाल करें :

गर्भावस्‍था के प्रारम्‍भ 6 महीनों में अपने खान - पान का विशेष ध्‍यान रखें। भरपूर मात्रा में पोषक तत्‍वों को लें ताकि आप और आपका बच्‍चा हेल्‍दी रहे। इस दौरान बॉडी में हामोन्‍स में भी चेजेंस आते है जिससे खाने का मन नहीं करता है लेकिन फिर भी खाएं। वरना आपको कमजोरी आएगी।

4) रिलेशनशिप

4) रिलेशनशिप

गर्भावस्‍था, आपके जीवन में परिवर्तन लाने का सबसे अच्‍छा समय होता है। इस दौरान आपके अपने नजदीकियों, परिवारीजनों और पार्टनर के साथ सम्‍बंध अच्‍छे होना जरूरी होता है। लोगों के साथ अच्‍छे रिलेशन होने से आप भावनात्‍मक रूप से खुश रहेगी।

5) अपरिपक्‍व प्रसव के लक्षण जानें :

5) अपरिपक्‍व प्रसव के लक्षण जानें :

गर्भावस्‍था के 6 महीने के बाद आपको अपरिपक्‍व प्रसव के लक्षणों के बारे में जान लेना चाहिए। ताकि कभी ऐसी कोई दिक्‍कत होने पर आप तुंरत डॉक्‍टर से सम्‍पर्क कर सकें। अपरिपक्‍व प्रसव होने के निम्‍म लक्षण होते है - योनि में खून का आना, खून के थक्‍के निकलना, योनि से कुछ रिसना या निकलना, पेल्विक एरिया में दर्द होना, कमर में अचानक से दर्द होना, पेडू में दर्द होना आदि।

6) किस प्रकार के भोजन को न खाएं :

6) किस प्रकार के भोजन को न खाएं :

गर्भावस्‍था के दौरान, अधपके मीट, अपाश्‍चुरीकृत चीज, कच्‍चा भोजन आदि को नहीं खाना चाहिए। इस प्रकार के भोजन से गर्भवती महिला को दिक्‍कत हो सकती है। इस प्रकार की खाद्य सामग्री में हानिकारक बैक्‍टीरिया भी होते है जो महिला और उसके बच्‍चे के लिए घातक साबित हो सकते है।

7) एक छोटी सी सलाह :

7) एक छोटी सी सलाह :

गर्भावस्‍था, जीवन का सबसे स्‍पेशल चरण होता है और इसके शुरूआती 6 महीने बहुत महत्‍वपूर्ण होते है। ऐसे में खुद का ध्‍यान रखें। अपनी कमर को झुकाएं नहीं, उसे सीधा रखने की कोशिश करें। जब भी बैठें, अपने पैरों को फर्श पर समानान्‍तर रखें। ऊपर दिए गए सभी टिप्‍स का पालन करें। ऐसा करके आप अपनी गर्भावस्‍था को एंजाय कर सकते है।

English summary

Six month of pregnancy: Changes

Six month pregnancy is the time when several changes take place both in the baby and your body. You should begin to realize that your baby has grown steadily and gained a weight of about 4 ounces compared to the previous week.
Story first published: Monday, November 4, 2013, 13:32 [IST]
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