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ये 25 सुपरफूड, स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए है जरुरी

डिलीवरी के बाद बहुत सी ऐसी माएं हैं, जिन्हें अपने दूध की मात्रा के साथ-साथ इस बात कि चिंता रहती है कि बढ़ती जरुरतों की पूर्ति के लिए शिशु को पर्याप्त दूध मिल पा रहा है या नहीं।
माँ का अपने बच्चे को दूध पिलाना ममता से भरा और प्रकृति का नियम हैं। माँ का दूध बच्चे के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता हैं। माँ का पहला पीला दूध बच्चे को जानलेवा बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता हैं। और तो और स्तनपान करवाने से माँ और बच्चे में एक भावनात्मक रिश्ता भी बनता हैं। लेकिन कई बार माँ के स्तनों में दूध की कमी हो जाती हैं जिस कारण यह बहुत ही गंभीर स्तिथि बन जाती हैं।
इसी समस्या को दूर करने के लिए आज हम आपको ऐसे नेचुरल तरीके बताने जा रहे हैं, जो माँ का दूध बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। यहां इस आर्टिकल में हम आज आपको 25 ऐसी फूड बता रहें है जो ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने में सहायक हैं।

1. मेथी के बीज
- मेथी के बीजों में ओमेगा-3 वसा जैसे स्वस्थ विटामिन होते हैं, जो स्तनपान कराने वाली माँ के लिए अच्छे रहते हैं।
- ओमेगा-3 वसा शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मेथी के साग में बीटाकैरोटीन, बी विटामिन, आयरन और कैल्श्यिम भरपूर मात्रा में होते है।
- मेथी की चाय नई मांओं को दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पेय है। मेथी वैसे भी कई व्यंजनों में डाली जा सकती है, विशेषकर सब्जियों और मांस के व्यंजनों में। इसे आटे में मिलाकर परांठे, पूरी या भरवां रोटी भी बनाई जा सकती है।
- मेथी, पौधों के उसी वर्ग से संबंध रखती है, जिसमें मूंगफली, छोले और सोयाबीन के पौधे भी शामिल हैं। इसलिए, अगर आपको इनमें से किसी के भी प्रति एलर्जी है, तो आपको मेथी से भी एलर्जी हो सकती है।

2 . सौंफ
सौंफ भी स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने का एक अन्य पारंपरिक उपाय है। शिशु को गैस और पेट दर्द की परेशानी से बचाने के लिए भी नई माँ को सौंफ दी जाती है। इसके पीछे तर्क यह है कि पेट में गड़बड़ या पाचन में सहायता के लिए वयस्क लोग सौंफ का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए स्तनदूध के जरिये सौंफ के फायदे शिशु तक पहुंचाने के लिए यह नई माँ को दी जाती है। हालांकि, इन दोनों धारणाओं के समर्थन के लिए कोई शोध उपलब्ध नहीं है, मगर बहुत सी माताएं मानती हैं कि सौंफ से उन्हें या उनके शिशु को फायदा मिला है।
सौंफ का पानी और सौंफ की चाय प्रसव के बाद एकांतवास के पारंपरिक पेय हैं।

3 . लहसुन
लहसुन स्तन दूध आपूर्ति को बढ़ाने में भी सहायक माना गया है।
अगर, आप बहुत ज्यादा लहसुन खाती हैं, तो यह आपके स्तनदूध के स्वाद और गंध को प्रभावित कर सकता है। एक छोटे अध्ययन में पाया गया कि जिन माताओं ने लहसुन खाया था, उनके शिशुओं ने ज्यादा लंबे समय तक स्तनपान किया। यानि कि हो सकता है शिशुओं को स्तन दूध में मौजूद लहसुन का स्वाद पसंद आए। हालांकि, यह अध्ययन काफी छोटे स्तर पर था और इससे कोई सार्थक परिणाम नहीं निकाले जा सकते। वहीं, कुछ माएं यह भी कहती हैं कि अगर वे ज्यादा लहसुन का सेवन करती हैं, तो उनके शिशुओं में पेट दर्द हो जाता है।
लहसुन का दूध प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली मांओं को दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पारंपरिक पेय है।

4. हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग और बथुआ आदि आयरन, कैल्शियम और फोलेट जैस खनिजों का बेहतरीन स्त्रोत हैं। इनमें बीटाकैरोटीन (विटामिन ए) का एक रूप और राइबोफ्लेविन जैसे विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। इन्हें भी स्तन दूध बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
स्तनपान कराने वाली मांओं को प्रतिदिन एक या दो हिस्से हरी पत्तेदार सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। आप इन सब्जियों को मसालों के साथ पका सकती हैं या फिर थेपला, विभिन्न सब्जियां डालकर पोहा या इडली जैसे नाश्ते भी बना सकती हैं।

5. जीरा
दूध की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ माना जाता है कि जीरा पाचन क्रिया में सुधार और कब्ज, अम्लता (एसिडिटी) और पेट में फुलाव से राहत देता है। जीरा बहुत से भारतीय व्यंजनों का अभिन्न अंग है और यह कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (एक बी विटामिन) का स्त्रोत है।
आप जीरे को भूनकर उसे स्नैक्स, रायते और चटनी में डाल सकते हैं। आप इसे जीरे के पानी के रूप में भी पी सकती हैं।

6. तिल के बीज
तिल के बीज कैल्शियम का एक गैर डेयरी स्त्रोत है। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए कैल्शियम एक जरुरी पोषक तत्व है। यह आपके शिशु के विकास के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। शायद इसलिए ही यह स्तनपान कराने वाली माताओं के आहार में शामिल की जाने वाली सदियों पुरानी सामग्री है।
आप तिल के लड्डू खा सकती हैं या फिर काले तिल को पूरी, खिचड़ी, बिरयानी और दाल के व्यंजनों में डाल सकती हैं। कुछ माएं गज्जक व रेवड़ी में सफेद तिल इस्तेमाल करना पसंद करती हैं।

7. तुलसी
तुलसी की चाय स्तनपान कराने वाली मांओं का एक पारंपरिक पेय है। किसी शोध में यह नहीं बताया गया कि तुलसी स्तन दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, मगर माना जाता है कि इसका एक शांतिदायक प्रभाव होता है। यह मल प्रक्रिया को सुधारती है और स्वस्थ खाने की इच्छा को बढ़ावा देती है।
मगर, अन्य जड़ी-बूटियों की तरह ही तुलसी का सेवन भी सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।

8. सुवा
सुवा के पत्ते आयरन, मैग्निशियम और कैल्श्यिम का अच्छा स्त्रोत हैं। माना जाता है कि सुवा स्तन दूध आपूर्ति में सुधार, पाचन क्रिया व वात में आराम और नींद में सुधार करता है। सुवा हल्का मूत्रवर्धक भी होता है, इसलिए इसका सीमित सेवन किया जाना चाहिए।
आप सुवा के बीज साबुत या उन्हें पीस कर अचार, सलाद, चीज़ स्प्रेड और तरी या सालन में डाल सकती हैं। सुवा की चाय प्रसव के बाद दिया जाने वाला एक लोकप्रिय पेय है।

9. लौकी व तोरी जैसी सब्जियां
पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि लौकी, टिंडा और तोरी जैसी एक ही वर्ग की सब्जियां स्तन दूध की आपूर्ति सुधारने में मदद करती हैं। ये सभी सब्जियां न केवल पौष्टिक एवं कम कैलोरी वाली हैं, बल्कि ये आसानी से पच भी जाती हैं।

10. दालें व दलहनें
दालें, विशेषकर कि मसूर दाल, न केवल स्तन दूध की आपूर्ति बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं, बल्कि ये प्रोटीन का भी अच्छा स्त्रोत होती हैं। इनमें आयरन और फाइबर भी उच्च मात्रा में होता है।

11. मेवे
माना जाता है कि बादाम और काजू स्तन दूध के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं। इनमें भरपूर मात्रा में कैलोरी, विटामिन और खनिज होते हैं, जिससे ये नई माँ को ऊर्जा व पोषक तत्व प्रदान करते हैं। इन्हें स्नैक्स के तौर पर भी खाया जा सकता है और ये हर जगह आसानी से उपलब्ध होते हैं।
आप इन्हें दूध में मिलाकर स्वादिष्ट बादाम दूध या काजू दूध बना सकती हैं। स्तनपान कराने वाली माँ के लिए पंजीरी, लड्डू और हलवे जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ बनाने में मेवों का इस्तेमाल किया जाता है।

12. जई और दलिया
जई आयरन, कैल्शियम, फाइबर और बी विटामिन का बेहतरीन स्त्रोत होता है और स्तनपान कराने वाली मांओं के बीच ये काफी लोकप्रिय है। पारंपरिक तौर पर जई को चिंता व अवसाद कम करने में सहायक माना जाता है।
इन्हें आमतौर पर दलिये की तरह ही खाया जाता है। इसका पौष्टिक मूल्य बढ़ाने के लिए आप इसमें मेवे, दूध, मसाले या फल भी डालकर खा सकती हैं।
क्या मुझे पर्याप्त स्तनदूध बनाने के लिए अधिक खाने-पीने की जरुरत है?

13. ब्राउन राइस
एक रिसर्च के अनुसार ब्राउन राइस ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। ये हार्मोन स्थिर करने के साथ ही दुग्ध वृद्धि करने के साथ ही स्तनपान करवाने वाली मांओं को ऊर्जा भी देता है। इसके साथ मांओं का पाचन क्रिया में भी सुधार होता है।

14. ओट्स मील
ओट्स मील एनर्जी से भरपूर होता है। इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है। ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाएं इसे रोज सुबह नाश्ता में खा सकती हैं।

15. संतरा
संतरें में विटामिन सी की भरपूर मात्रा में होती हैं, इसके अलावा विटामिन ए और बी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस के रुप में अन्य पौषक तत्वों के साथ परिपूर्ण हैं। स्तनपान से पहले या बाद में दो गिलास संतरे का रस पीना चाहिए। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ वजन भी बढ़ने से रोकता है।

16. सैमन
स्तनपान कराने वाली माताओं के आहार में सैमन, प्रोटीन, विटामिन डी और डीएचए का बहुत अच्छा स्त्रोत है। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक प्रकार है जो कि बच्चे के तांत्रिका तंत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

17. पालक
पालक के रुप में अन्य पत्तेदार हरी सब्जियां जैसे गोभी, स्विस चार्ड, कोल्लार्ड्स और ब्रोकली ब्रेस्टफीडिंग माताओं के लिए बहुत जरुरी है।
पालक में विटामिन ए आपके बच्चे के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है जबकि इसके एंटी ऑक्सीडेंट आपके बच्चे की प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं। यह शाकाहारी माताओं के लिए कैल्शियम का बड़ा सोर्स है। पालक में फोलेट भी होता है। यह खून की कमी को पूरा करता है।

18. स्वीट पटैटो
स्वीट पटेटो पोटेशियम का मुख्य स्त्रोत है। इसमें मौजूद ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट का उत्पादन करती है जो थकान से लड़ने के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा में इसमें विटामिन सी और बी कॉम्प्लेक्स होता है और मांसपेशियों को आराम देने वाला तत्व मैग्नीशियम भी इसमें मौजूद होता है।

19. खसखस
खसखस एक नई प्रसूता और ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। खसखस में मौजूद गुण महिलाओं को राहत देने के साथ ही शांत बनाएं रखता है।

20. अंडे
अंडे में प्रोटीन, विटामिन बी 12 और डी, राइबोफ्लेविन, फोलेट ओर कोलीन मौजूद होते है। जो मां और बच्चें दोनों के लिए फायदेमंद होता है। अंडे की जर्दी में विटामिन डी मौजूद होता है, जो नवजात शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण होती है।

21. गाजर का ज्यूस
गाजर में विटामिन ए की होता है जो महिलाओं में दुग्ध उत्पादन में सहायक होता है। इसके अलावा इसमें अल्फा और बीटा कैरोटीन होता है, महिलाओं को गाजर का ज्यूस नहीं तो सलाद या सूप में गाजर का सेवन करना चाहिए।

22. पानी और ज्यूस पीने से
स्तनपान के दौरान आपको पानी केवल अपनी प्यास बुझाने के लिए ही पीने की जरुरत है। अत्याधिक पानी या ज्यूस पीने या प्यासे रहने से आपके दूध की आपूर्ति पर असर नहीं पड़ता है। आपका शरीर जरुरी तत्वों का नियमित संग्रहण करने में काफी सक्षम होता है, ताकि वह आपकी दूध की आपूर्ति को बनाए रख सके।

23 एप्रिकोट
प्रेगनेंसी के बाद बनाने में हार्मोन स्थिर करने के लिए सूखे एप्रिकोट खाने चाहिए इसमें मौजूद रसायन आपके हार्मोन को बैलेंस बनाएं रखते हैं। इसमें मौजूद फाइबर और केल्शियम की उच्च मात्रा दूध बढ़ाने में मदद करता है।

24. प्याज:
भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन अधिक मात्रा में करने से माताओं के स्तनों में दूध में वृद्धि होती है। जब भी माताएं भोजन करें तो कच्चे प्याज का सेवन भोजन के साथ अवश्य करें।

25. सोयाबीन
दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो शिशु को पिलाने के लिए दूध बढ़ जाती है। सोया में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है।



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