Latest Updates
-
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना -
Happy Krishna Janmashtami 2026 Wishes: नंद के घर खुशियां आईं...जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर तुलसी तोड़ सकते हैं या नहीं? जानें क्या हैं धार्मिक नियम -
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 7 जगहें, दिखेगा कृष्ण भक्ति का खास रंग
गर्मी के मौसम में गर्भावस्था में डाइबिटीज़ होने का ख़तरा बढ़ जाता है
गर्भवती महिलाओं को 24 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में नहीं जाना चाहिए क्योंकि शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसा करने से उन्हें गर्भावस्था में होने डाइबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भवती महिलाओं को 24 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में नहीं जाना चाहिए क्योंकि शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसा करने से उन्हें गर्भावस्था में होने डाइबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।
एक अध्ययन के अनुसार ऐसी महिलायें जो औसत से 10 डिग्री कम या इससे भी अधिक ठंडे स्थानों में रहती हैं उनमें यह बीमारी होने की संभावना बहुत कम होती है।

गर्भवती महिलाओं पर बाहरी वातावरण के तापमान से होने वाले प्रभाव पर किये गए अध्ययन से पता चलता है कि वे गर्भवती महिलायें जो गर्म स्थानों में रहती हैं उनमें गर्भावस्था में होने वाले डाइबिटीज़ की संभावना 7.7 प्रतिशत तक अधिक बढ़ जाती है जबकि ठंडे स्थानों में रहने वाली महिलाओं में यह संभावना 4.6 प्रतिशत तक होती है।
इसके बाद हर दस डिग्री सेल्सियस पर तापमान में होने वाली वृद्धि से डाइबिटीज़ होने की संभावना छः से नौ प्रतिशत तक बढ़ जाती है। यह इस अध्ययन पर आधारित है कि ठंडे स्थानों में रहने वाले लोगों में ठण्ड के मौसम में ऊष्मा और चयापचय में फैट किस तरह बर्न होता है।

कनाड़ा के ओंटारियो अस्पताल में एक शोधकर्ता तथा प्रमुख लेखक गिल्लियन बूथ के अनुसार "अनेक लोग ऐसा सोचते हैं कि गर्म स्थानों में और अधिकतर बाहर रहती हैं और वे बहुत अधिक सक्रिय होती हैं जिससे वज़न एक सीमा तक बढ़ता है। वज़न का अधिक बढ़ना गर्भावस्था में डाइबिटीज़ होने का एक कारण है।"
बूथ के अनुसार "हालाँकि ठंडे तापमान के कारण इन्सुलिन के प्रति आपकी संवेदनशीलता में सुधार आता है क्योंकि इसमें वसा, ब्राउन अडिपोसे टिश्यू में परिवर्तित हो जाता है।"

कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जनरल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार टीम ने 12 वर्षों में (2002 से 2014 तक) कनाड़ा में रहने वाली 3,96,828 महिलाओं में से 5,55,911 के जन्मों पर अध्ययन किया।
इसके अलावा वे महिलायें जो ठंडे तापमान जैसे कनाड़ा या यू.एस. में जन्म लेती हैं और गर्भावस्था में ठंडे स्थानों में रहती हैं उनमें गर्भावस्था में डाइबिटीज़ होने की संभावना 3.6 प्रतिशत तक होती है जबकि गर्म स्थानों में रहने वाली महिलाओं में गर्भावस्था में डाइबिटीज़ होने की संभावना 6.3 होती है।
-आईएनएएस से प्राप्त इनपुट के अनुसार



Click it and Unblock the Notifications