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नॉर्मल डिलीवरी के लिए है ब्रैडली तकनीक, जानिये क्या है इसके फायदे
आजकल बच्चे की देखभाल में माता पिता दोनों बराबर का योगदान देते हैं। सिर्फ माँ ही नहीं बल्कि पिता भी अपने सभी फ़र्ज़ बखूबी निभाते हैं।
आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से ब्रैडली तकनीक के बारे में बताएंगे जो माता के साथ साथ पिता को भी प्रसव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देता है। यह तकनीक बहुत ही चर्चित और विकसित हो चुकी है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

क्या है ब्रैडली तकनीक?
आजकल ज़्यादातर महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए सी-सेक्शन का सहारा ले रही हैं। ऐसी स्त्रियों के लिए ब्रैडली तकनीक बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि इसमें महिलाओं को प्राकृतिक रूप से बच्चा पैदा करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसमें माता और पिता दोनों को प्रसव पीड़ा से जुड़ी जानकारी से लेकर बच्चे के जन्म से जुड़ी हर बात, होने वाली मां के खानपान, बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान कराने जैसी सभी महत्वपूर्ण बातें शामिल है।
इसकी खोज अमेरिका के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रॉबर्ट ब्रैडली ने 1940 में की थी। इसे हस्बैंड-कोच्ड चाइल्ड बर्थ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें पति गर्भावस्था के दौरान आने वाले उतार चढ़ाव को पार करने में या फिर शिशु के जन्म के बाद सभी ज़िम्मेदारियों को निभाने में अपनी पत्नी का पूरा सहयोग करते हैं। ब्रैडली तकनीक महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी के फायदों से अवगत कराता है।

क्या है ब्रैडली तकनीक का उद्देश्य?
ब्रैडली तकनीक का सबसे पहला उद्देश्य महिलाओं के अंदर से नॉर्मल डिलीवरी में होने वाली पीड़ा के डर को दूर कर उन्हें इसके फायदों के बारे में बताना होता है। ये औरतों को संतुलित आहार के साथ साथ गर्भावस्था में किस प्रकार अपना ध्यान रखना है ऐसी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराता है।
इसके अलावा प्रसव के दौरान पीड़ा को कम करने के लिए सांस से जुड़ा हुआ व्यायाम और कुछ मुद्राओं के विषय में भी बताता है। ब्रैडली तकनीक में केवल मां ही नहीं बल्कि पिता को भी बराबर का योगदान देने पर ज़ोर दिया जाता है। इसमें पति को गर्भावस्था में किस प्रकार अपनी पत्नी को मानसिक और भावुक रूप से समर्थन करना है आदि चीज़ों के बारे में बताया जाता है। पति को इस बात की भी जानकारी दी जाती है कि कैसे वे डिलीवरी के समय सांस के व्यायाम और सही मुद्रा के ज़रिये अपनी पत्नी की पीड़ा को कम करने में मदद कर सकते हैं। कहते हैं प्रेगनेंसी में होने वाली मां की मानसिक स्थिति का सीधा प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। ऐसे में पति उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायता कर सकते हैं ताकि वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकें।
ब्रैडली तकनीक प्रसव से जुड़ी 6 चीज़ों के बारे में बताता है जिसमें गहरा आराम, पेट से सांस लेना, अंधेरा, एकांत, बंद आंखें और आंशिक नींद होती है। यह सब होने वाली माँ को काफी हद तक आराम पहुंचाने का काम करती है।

ब्रैडली तकनीक के फायदे
यह नॉर्मल डिलीवरी पर ज़्यादा ज़ोर देता है इसलिए वर्तमान में यह बहुत ही चर्चित हो रहा है। आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में।
1. ब्रैडली क्लासेज का हिस्सा बनकर आप प्रेगनेंसी और पेरेंटिंग से जुड़ी सभी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।
ब्रैडली क्लासेज में आपको सही खान पान के आलावा प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले शारीरिक और हार्मोनल बदलाव के बारे में भी बताया जाएगा। स्तनपान और पेरेंटिंग के विषय में भी आप महत्वपूर्ण जानकारियां यहां से हासिल कर सकते हैं।
2. प्राकृतिक रूप से बच्चे के जन्म के लिये है ब्रैडली तकनीक।
ब्रैडली क्लासेज में आपको इस बात का एहसास हो जाएगा कि सभी महिलाओं का शरीर प्राकृतिक रूप से बच्चे को जन्म देने में सक्षम होता है। आप यह जान पाएंगी कि सी-सेक्शन और अन्य दवाइयों के इस्तेमाल का बुरा प्रभाव आपके और शिशु दोनों पर ही पड़ता है। तरह तरह के व्यायाम और मुद्राएं आपको नॉर्मल डिलीवरी के लिए न सिर्फ तैयार करेंगी बल्कि आपका आत्मविश्वास भी बढ़ाएंगी।

3. पति का सहयोग आपकी चिंता और डर को कम करेगा
ब्रैडली तकनीक में महिलाओं के साथ साथ उनके पतियों को सिखाया जाता है की किस तरह गर्भावस्था में अपनी पत्नी का सहयोग करना है। प्रसव के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए उन्हें ख़ास ट्रेनिंग भी जाती है।
4. प्रेगनेंसी के बाद जल्द ही आप फिर से स्वस्थ हो सकती हैं
प्रेगनेंसी के बाद का समय मां के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उसे अपने साथ साथ बच्चे का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में कई बार वह अपना सही ध्यान रखने से चूक जाती है। ब्रैडली क्लासेज में प्रेगनेंसी के बाद किस तरह आपको अपना ख्याल रखना है इसकी भी जानकारी दी जाती है जिसमें आपके खाने पीने आदि से जुड़ी बातें शामिल होती हैं।

ब्रैडली क्लासेज आप कब से शुरू कर सकती हैं?
ब्रैडली क्लासेज की शुरुआत आप प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में शुरू कर सकती हैं लेकिन इसकी शुरुआत करने से पहले आप अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें।



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