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जैसलमेर में महिला ने एक साथ दिया 3 बच्चों को जन्म, लाखों में एक मामला, मगर रहता इस बात का खतरा
Triplet pregnancy signs and risks : राजस्थान के जैसलमेर में एक महिला ने एक साथ तीन बच्चों को जन्म देकर सभी को चौंका दिया। देवीकोट के केहर फकीर की ढाणी की रहने वाली महिला जमाला ने जवाहिर अस्पताल में दो लड़के और एक लड़की को जन्म दिया। बच्चों का वजन कम होने के कारण उन्हें एनआईसीयू में भर्ती किया गया है। हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार, मां और तीनों बच्चे स्वस्थ हैं। यह मामला बेहद दुर्लभ है, क्योंकि डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा केस लाखों में एक बार होता है।
जमाला के परिवार में तीन बच्चों की किलकारी गूंजने से खुशी का माहौल है। आइए जानते हैं कि ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी का कैसे होती है और कैसे इसका पता चलता है और इससे जुडे रिस्क।

पीआईडी की वजह से मां बनने में हुई थी दिक्कत
जैसलमेर की जमाला की शादी सात साल पहले हुई थी, लेकिन शादी के बाद वह गर्भवती नहीं हो पाई। इस समस्या के चलते उनका अहमदाबाद में भी इलाज चला, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद परिजन जमाला को सरकारी जवाहिर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने उनका इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि जमाला को पीआईडी (पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज) की समस्या थी, साथ ही उनकी बच्चादानी में इंफेक्शन भी था। सही इलाज और देखभाल के चलते आखिरकार जमाला गर्भवती हुईं और उन्होंने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया। यह सफलता उनके परिवार के लिए बेहद खास है।
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी का कैसे होती है?
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी तब होती है जब महिला के गर्भ में एक साथ तीन भ्रूण विकसित होते हैं। नेचुरल कंसीव करने के अलावा इसके मुख्य कारणों में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और हार्मोनल बदलाव शामिल हैं। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट, जैसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) में, एक से अधिक भ्रूण गर्भाशय में ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी की संभावना बढ़ती है।
फर्टिलिटी ड्रग्स भी इसका प्रमुख कारण हैं, क्योंकि ये अंडाशय को एक समय में कई अंडे रिलीज़ करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने पर महिलाओं की ओवरीज में बदलाव होता है, जिससे एक ही मेंस्ट्रुअल साइकिल में कई अंडे रिलीज़ हो सकते हैं। जब ये अंडे अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज होते हैं, तो ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी हो सकती है।
यह स्थिति स्वाभाविक रूप से भी हो सकती है, लेकिन फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और उम्र से जुड़े कारक इसकी संभावना को बढ़ा देते हैं।
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी का पता कैसे चलता है?
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी का पता प्रीनेटल अल्ट्रासाउंड से चलता है, जिसमें गर्भ में तीन भ्रूणों की उपस्थिति और तीन अलग-अलग हार्टबीट्स की पुष्टि होती है। इस स्थिति में महिलाओं के एचसीजी (Human Chorionic Gonadotropin) हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक होता है। इसके अलावा, भ्रूण के लिवर में बनने वाले अल्फा-फेटोप्रोटीन का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया जाता है, जो ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी का संकेत हो सकता है।
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी के रिस्क
ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी में महिलाओं को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
- इनमें एनीमिया की गंभीर कमी, हाई ब्लड शुगर लेवल, अत्यधिक मॉर्निंग सिकनेस, और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं शामिल हैं, जो मां और बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
- प्लेसेंटा के अलग होने की स्थिति में प्रीटर्म लेबर की संभावना बढ़ जाती है, और कई बार शिशुओं की ग्रोथ भी प्रभावित होती है।
- इन समस्याओं से बचाव के लिए नियमित प्रीनेटल चेकअप करवाना आवश्यक है। साथ ही, हाई कैल्शियम, प्रोटीन, और फाइबर युक्त डाइट लें और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं समय पर लें।
- किसी भी असुविधा या समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। तनाव से बचें और उचित देखभाल के साथ ट्रिप्लेट प्रेग्रेंसी के दौरान स्वास्थ्य बनाए रखें।



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