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Myths and Facts: मां के बाएं स्तन में पानी और दाएं में होता है खाना, स्तनपान से जुड़े 6 भ्रम और सच जानें
Myths and Facts About Breastfeeding: विश्वभर मे हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है। ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़े ऐसे कई भ्रम हैं जो सदियों से चले आ रहे हैं और अधिकांश महिलाएं इसे सच मानती है।
कुछ तो ऐसे भ्रम भी है, जो गले ही नहीं उतरते हैं। आइए विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) के मौके पर जानते हैं कि स्तनपान से जुड़े कॉमन मिथक।

मिथक: मां के बाएं ब्रेस्ट में पानी होता है और दाएं में खाना होता है?
फैक्ट: ऐसा पुराने जमाने में लोग कहते थे। इसके पीछे कोई लॉजिक नहीं है। दोनों ही हां एक बात जरूर है कि जब आप नई-नई मां बनती हैं तो शुरुआत में निकलने वाला दूध थोड़ा पानी जैसा होता है। यह माना जाता है कि यह बच्चे की प्यास का ख्याल रखता है। इसके बाद जो दूध निकलता है वो वसायुक्त होता है जो भूख का ख्याल रखता है। यह बच्चे के वजन को भी बढ़ाता है। अब आप समझ गए होंगे कि बच्चे को फीड दोनों ही ब्रेस्ट से कराना चाहिए।
मिथक: - ब्रेस्टफीडिंग कराने से मां को दर्द होता है?
फैक्ट: ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कभी भी मां को दर्द नहीं होता। स्तनपान के दौरान हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है। अगर किसी मां को स्तनपान के दौरान लगतार दर्द हो रहा है तो आपका फीड कराने तरीका गलत हो सकता है या फिर कोई दूसरी दिक्कत भी हो सकती है। कई बार बच्चा निपल्स को दबा देता है। यह भी दर्द का कारण है।
मिथक: हर फीड के बाद स्तन को साफ करना चाहिए?
फैक्ट: ब्रेस्ट के निपल्स के आसपास के काले गहरे रंग के हिस्से को एरोला कहते हैं। यह लिक्विड पैदा करता है, जिसमें एमनियोटिक द्रव के समान गंध आती है। इस द्रव में 'अच्छे बैक्टीरिया' होते हैं जो एरोला और निपल्स को मॉइश्चराइज करने में भी मदद करता है। मां को दूध पिलाने से पहले और बाद में ब्रेस्ट या निपल्स को साफ करने की जरूरत नहीं होती है। ऐसा करने से निप्पल और एरोलर टिश्यूज सूख जाते हैं।
मिथक: ब्रेस्ट फीडिंग सिर्फ बच्चे के लिए फायदेमंद है?
फैक्ट: ऐसा नहीं है। रेग्युलर ब्रेस्टफीड कराने से ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर का खतरा कम हो जाता है। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका भी कम होती है। कई स्टडीज में पाया गया है कि स्तनपान से मां को टाइप-2 डायबिटीज, रुमेटाइड आर्थराइटिस और हृदय रोगों से बचाव होता है।

मिथक: रेग्युलर ब्रेस्टफीडिंग कराने से इसका आकार बिगड़ जाता है?
फैक्ट: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां में प्रोलैक्टिन हार्मोन रिलीज होता है जो मां को रिलैक्स और एकाग्र करने में मदद करता है।
मिथक : दूध न बनने की स्थिति में दूसरी मां का दूध पीना सेफ
फैक्ट: हमारे देश में एक परंपरा है कि जब किसी बच्चे को मां का दूध नहीं मिलता, तो कोई दूसरी परिचित महिला उसे अपना दूध पिला देती है। लेकिन, मेडिकल साइंस के मुताबिक ऐसा करना सेफ नहीं है। आमतौर पर डिलीवरी कराने वाले डॉक्टर को यह पता होता है कि कहीं मां बीमार तो नहीं है, वह बच्चे को स्तनपान करा सकती है या नहीं। अगर किसी खास वजह से डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है।
लेकिन, अगर कोई और महिला बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग करा रही है, तो बिना जांच नहीं बताया जा सकता कि उसके दूध में कोई बैक्टीरिया तो नहीं है। ब्रेस्ट मिल्क बैंक में पूरी जांच के बाद ही किसी मां का दूध लिया जाता है, फिर उसे प्रोसेस करने के बाद बच्चे को दिया जाता है। जिससे किसी तरह के इन्फेक्शन की आशंका खत्म हो जाती है।
मिथक : बॉडी बिल्डिंग करने वालों के लिए ब्रेस्टमिल्क फायदेमंद होता है?
बॉडी बनाने के लिए बॉडी बिल्डर खरीद कर पीते हैं मां का दूधबॉडी बिल्डर्स इस दूध से अपनी बॉडी बना रहे हैं। मांसपेशियों के लिए यह फायदेमंद है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि यह बात सिर्फ मिथ है। बच्चों के विकास में यह फायदेमंद जरूर है, लेकिन बड़ों को इससे फायदा मिलता है इसका कोई सबूत नहीं।



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