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उत्तराखंड में में घुघुतिया त्यार नाम से मनाई जाती है मकर संक्रांति, अब इसे बनाने की रेसिपी भी जान लें
मकर संक्रांति पर लोग खिचड़ी बनाने की परांपरा है और उसका दान भी करते हैं। लेकिन उत्तराखंड के कुमाऊं में यह पर्व घुघुतिया या घुघुती के नाम से जाना जाता है।
इस दिन घुघुती बनाई भी जाती है। यह एक तरह का मीठा पकवान है, जिसे बच्चों के गले में घुघुती की माला पहनाई जाती है साथ ही अगले दिन कौओं को बुलाकर खिलाया जाता है। इस पर्व पर कौओं को खिलाने के पीछे कई मान्यताएं भी हैं।
इस मकर संक्रांति आप भी उत्तराखंड स्पेशल घुघुती की यह रेसिपी ट्राई कर सकते हैं, यह बनाने में बहुत सिम्पल हैं और साथ ही ये खाने में बहुत टेस्टी होते है।

घुघुती बनाने के लिए सामग्री
- तेल
- 2 कप आटा
- 4 चम्मच घी
- 2 चम्मच सौंफ
- 2 चम्मच तिल
- 2 चम्मच सूजी
- 150 ग्राम गुड़
- 1 गिलास पानी
- 2 चम्मच ड्राई फ्रूट्स पाउडर (ऑप्शनल)
घुघुती बनाने का तरीका
- घुघुती बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में एक गिलास पानी को
उबालकर इसमें गुड़ डालें, ताकि यह सिरप तैयार हो जाए।
- अब आटे में सौंफ, तिल, सूजी, ड्राई फ्रूट्स पाउडर और घी डालकर सभी
चीजों को अच्छे से मिक्स करके इसमें गुड़ का पानी मिलाएं।
- आटे को अच्छे से गूथ लें। इस बात का ध्यान रखें कि आटा न ज्यादा
सॉफ्ट हो, न ही सख्त।
- अब आटे को लंबाई में रोल कर लें और फिर इसे बीच में से घुमा
लें।
- एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें इन्हें गोल्डन ब्राउन होने तक
फ्राई कर लें।
लीजिए तैयार है उत्तराखंड स्पेशल घुघुती।

इस वजह से कुमाऊं में मकर संक्राति में बनाई जाती है घुघुती
जब कुमाऊं में चंद वंश का राज था, तब राजा कल्याण चंद की कोई संतान नहीं थी। एक बार राजा अपनी रानी के साथ उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित बागनाथ मंदिर गए और वहां पूजा की, जिस वजह से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। उन्होंने उसका नाम घुघुती रखा। घुघुती के गले में एक माला हमेशा रहती, जिसमें बंधे घुंघरू आवाज करते थे। जब भी घुघुती किसी बात पर जिद करता, तो उसकी मां कहती "काले कौआ काले, घुघुती की माला खाले।" इस डर से घुघुती हमेशा अपनी मां का कहना मानता था। कुछ दिनों बाद घुघुती की कौओं से दोस्ती हो गई।
कथा के अनुसार, एक दिन जब घुघुती आंगन में खेल रहा था, तब राजा के मंत्री ने राज-पाठ के लालच में उसका का अपहरण कर लिया। जब वह उसे जंगल की ओर ले जा रहा था, तब कौओं ने उसे देख लिया और मंत्री को घेर लिया। कोएं ने घुघुती के गले से माला लेकर राजा के पास गया, जिससे राजा को समझ आ गया कि घुघुती खतरे में है। राजा तुरंत उस कौए के पीछे चल पड़े और जंगल में मंत्री को घुघुती के साथ देख लिया। इस पर राजा ने उस मंत्री को मृत्युदंड दिया। घुघुती की मां ने पकवान बनाकर कौओं को खिलाया और उनका शुक्रिया अदा किया। तब से कुमाऊं में घुघुती पर्व पर बच्चों के गले में घुघुती की माला पहनाने और कौओं को घुघुती बनाकर खिलाने की प्रथा चली आ रही है।
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