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भारत में डिवॉर्स के बाद पत्नी को मिलते हैं इतने अधिकार, वाइफ अपने प्रॉपर्टी राइट्स के बारें में जानें
शादी के बाद एक औरत का पति उसके सुख-दुख का साथी होता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है जब पति और पति के बीच रिश्ते की डोर कमजोर होने लग जाती है और सालों तक चलने वाला रिश्ता टूट जाता है, डिवॉर्स की नौबत आ जाती है। तलाक लेने के लिए महिला को काफी कुछ सोंचना और विचार करना पड़ जाता है। क्योंकि तलाक के बाद उसे कई फैसले लेने पड़ जाते हैं। कई महिलाएं ऐसी होती है जो टॉक्सिक मैरिज में सिर्फ इस वजह से रह रही होती हैं क्योंकि उनके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं होता है।

कई बार महिलाओं के मायके वाले भी उसे तलाक को लेकर अपना फैसला सुना देते हैं। जिससे वो मजबूर होकर टॉक्सिक पति के साथ जिदंगी गुजार रही होती हैं। लेकिन महिलाओं को भारतीय कानून ने कई सारे अधिकार दिये हैं, जिससे वो तलाक के बाद भी अपनी जिंदगी अच्छे से बिता सकती है। उसे किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती है। हमने तलाक के बाद महिलाओं को मिलने वाले प्रॉपर्टी के अधिकारों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की वकील कुलसुम फिरदौस से बात की। आइये जानते हैं विस्तार से-

कुलसुम फिरदौस, वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच
तलाक के बाद भी पत्नी रह सकती है पति के घर पर
तलाक के बाद महिला ससुराल में तब तक रह सकती है, जब तक उसे दूसरा घर रहने को ना मिल जाए। ये उसका कानूनी अधिकार है। हिंदू अडॉप्शंस ऐंड मैंटिनेंस ऐक्ट, 1956 (हिंदू दत्तक और भरण-पोषण कानून) के तहत ये अधिकार मिला हुआ है। हालांकि, पत्नी तलाक के समझौते में संपत्ति की मांग नहीं कर सकती है।

डिवॉर्स के बाद पत्नी के संपत्ति अधिकार,
पति और पत्नी के बीच डिवॉर्स के बाद अगर प्रॉपर्टी पति के नाम पर है, तो कानून तौर पर उस संपत्ति पर पत्नी का कोई हक नहीं होगा। पंजीकरण अधिनियम (रजिस्ट्रेशन एक्ट), 1908 के अनुसार, प्रॉपर्टी पर उसका अधिकार होता है, जिसके नाम पर वो प्रॉपर्टी हो।
वहीं अगर कोई प्रॉपर्टी लोन लेकर ली गई है तो उस प्रॉपर्टी पर उसका हक होगा जिसके नाम से लोन लिया गया है। साथ ही जो उस लोन का भुगतान कर रहा है। अगर पत्नी के नाम पर बैंक के लोन लिया गया है और पत्नी ही उस प्रॉपर्टी के लिए लोन को चुका रही है तो वो संपत्ति पत्नी की होगी।
वहीं अगर पति और पत्नी ने मिलकर एक प्रॉपर्टी खरीदी हो,लेकिन वो प्रॉपर्टी पति के नाम रजिस्टर हो तब भी पत्नी उस संपत्ति पर अपना दावा पेश नहीं कर सकती। लेकिन पत्नी बैंक स्टेटमेंट और उस संपत्ति खरीदने में की गई सहायता को कानून डॉक्योंमेंट्स के आधार पर अपनी फाइनेंशियल हिस्सेदारी को दिखाकर उतना अमाउंट ले सकती है।
कुलसुम फिरदौस ने बताया कि हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत जब तक पत्नी दूसरा विवाह नहीं कर लेती तब तक उसे पूर्व पति की अर्निंग के आधार पर आजीविका के लिए भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार है।
वहीं जब पति दूसरी शादी कर लेता है तब दूसरी पत्नी को उसकी प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी मिल जाती है। लेकिन पहली पत्नी पूर्व पति की प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकती है।

पति ने पत्नी को छोड़ दिया है लेकिन तलाक नहीं हैं ?
पति ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया है लेकिन उससे तलाक नहीं लिया है, तो ऐसे में पत्नी को उसकी प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी का अधिकार है। वो इसका दावा कर सकती है।

ज्वाइन्ट प्रॉपर्टी पर पत्नी के अधिकार क्या है ?
ऐसा होता है कि पति और पत्नी कोई प्रॉपर्टी ज्वाइंट तौर पर खरीद लेते हैं। लेकिन बाद में जब तलाक की नौबत आ जाती है तब पत्नी तलाक होने तक उस प्रॉपर्टी पर अपना अधिकार रखती है। वहीं अगर उसका नाम प्रॉपर्टी के दस्तावेजों में हैं तो पति उसे उस संपत्ति को छोड़ने के लिए नहीं बोल सकता है। पति चाहे तो अपने हिस्से का भुगतान करके वो संपत्ति ले सकता है।
पत्नी के स्त्रीधन पर क्या अधिकार है
स्त्रीधन का मतलब है कि वो सामान जो उस महिला को शादी के वक्त तोहफे के तौर पर मिले थे। इसमें कैश अमाउंट, ज्वेलरी जैसे गिफ्ट्स पर पत्नी का हक होता है। तलाक के बाद महिला को स्त्रीधन पर पूरा अधिकार प्राप्त होता है। लेकिन उन गिफ्ट्स में किसी का भुगतान पति ने किया है तो वो उसका दावा पेश कर सकता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ में तलाक
मुस्लिम पर्सनल के अनुसार, तलाक देने का अधिकार पुरुष के पास है, लेकिन मुस्लिम महिला को भी तलाक मांगने का अधिकार मिला हुआ है। वो कोर्ट जाकर जाकर पति से तलाक मांग सकती है। 'खुला' के द्वारा पत्नी तलाक मांग सकती है।
मेहर
मुस्लिम विवाह में तलाक लेने पर निकाह के दौरान तय किया गया 'मेहर' उसका हक होता है। जिसे पति को देना ही पड़ता है।
मुस्लिम महिला पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी
मुस्लिम महिला जीवन भर अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी है। गुजारा भत्ता इस तरह से पूर्व पति को देना होगा जैसे वो शादी के वक्त अपनी लाइफ बिता रही थी और उसी तरह शादी के बाद भी जीवन बिताए। मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) कानून 1986 की धारा 3(2) के तहत अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता के लिए मजिस्ट्रेट के सामने अर्जी भी दाखिल कर सकती है।



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