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Manmohan Singh Love Story: जब सफेद सलवार-कुर्ते में गुरशरण कौर को देखकर दिल हार बैठे थे मनमोहन सिंह
Manmohan Singh Love Story in Hindi: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार (26 दिसंबर 2024) रात 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उनकी सादगी, विद्वता और राजनीतिक योगदान ने उन्हें देश का एक सम्मानित नेता बनाया। उनके पीछे उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं।

कौन हैं गुरशरण कौर? (Manmohan Singh Ki Wife Gursharan Kaur Kaun Hai?)
गुरशरण कौर का जन्म 13 सितंबर 1937 को जालंधर (तब ब्रिटिश इंडिया) में हुआ था। उनका परिवार पंजाब के धक्कम गांव (अब पाकिस्तान में) से था। उनके पिता, सरदार चतर सिंह कोहली, बर्मा-शेल में इंजीनियर थे। गुरशरण कौर सात भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं।
गुरशरण कौर एक कुशल कीर्तन गायिका हैं और उन्होंने जालंधर रेडियो पर कई प्रस्तुतियां दीं। उनकी सादगी और गरिमा की वजह से 2009 के जी-20 शिखर सम्मेलन में उन्हें उनकी सफेद बालों वाली प्राकृतिक छवि के लिए 'वोग' मैगजीन ने सराहा।
कैसे हुई डॉ. मनमोहन सिंह और गुरशरण कौर की मुलाकात? (Manmohan Singh aur Gursharan Kaur Ki Prem Kahani)
डॉ. मनमोहन सिंह 1957 में केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे। उनके परिवार ने उनकी शादी के लिए रिश्ते तलाशने शुरू किए। एक अमीर परिवार से रिश्ता आया, लेकिन लड़की शिक्षित नहीं थी। मनमोहन सिंह ने दहेज को ठुकराते हुए साफ कहा, "मुझे दहेज नहीं, पढ़ी-लिखी लड़की चाहिए।"
इसी दौरान गुरशरण कौर की बड़ी बहन बसंत ने मनमोहन सिंह के बारे में सुना और रिश्ता लेकर पहुंचीं। पहली मुलाकात छत पर हुई, जहां गुरशरण कौर सफेद सलवार-कुर्ते में आईं। इतिहास में एमए कर रही गुरशरण को देखकर मनमोहन सिंह ने तुरंत 'हां' कर दी।
मनमोहन सिंह को कीर्तन और अंग्रेजी नाश्ते से इम्प्रेस किया
पहली मुलाकात के बाद एक संगीत कार्यक्रम में गुरशरण कौर ने कीर्तन गाया, लेकिन उनके गुरु ने उनकी आलोचना की। इस पर मनमोहन सिंह ने कहा, "नहीं, उन्होंने बहुत अच्छा गाया।" इसके बाद उन्होंने गुरशरण को अपने घर नाश्ते पर आमंत्रित किया। उन्होंने अंग्रेजी नाश्ते (अंडे और टोस्ट) से उन्हें इम्प्रेस करने की कोशिश की।
1958 में बंधे शादी के बंधन में (Dr. Manmohan Singh Ki Shaadi Kab Hui Thi?)
1958 में दोनों ने शादी की। गुरशरण कौर ने हमेशा अपने पति का साथ निभाया, चाहे वह प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल हो या विपक्ष के नेता के रूप में उनका सफर। गुरशरण ने मनमोहन सिंह की देखभाल में कभी कोई कमी नहीं की। यहां तक कि उनके दिल की सर्जरी के बाद वह उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती थीं और रोज गुरुद्वारे में उनके लिए प्रार्थना करती थीं।
एक मिसाल बनी उनकी प्रेम कहानी (Dr. Manmohan Singh and Gursharan Kaur Love Story)
गुरशरण कौर न केवल एक आदर्श पत्नी थीं, बल्कि उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालकर मनमोहन सिंह को देश की सेवा के लिए स्वतंत्रता दी। उनके सादगी भरे जीवन ने उन्हें एक प्रेरणादायक प्रथम महिला बनाया।
गुरशरण कौर और मनमोहन सिंह का रिश्ता सच्चे प्यार, विश्वास और आपसी सम्मान का प्रतीक है। जब 1991 में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने और भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई, तब गुरशरण कौर ने उनके कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया।
उनकी प्रेम कहानी और शादीशुदा जीवन ने यह साबित किया कि रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए प्यार, शिक्षा, और सादगी कितनी महत्वपूर्ण होती है। आज, उनका यह रिश्ता न केवल यादों में बसता है, बल्कि एक मिसाल के रूप में सदियों तक याद किया जाएगा।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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