Latest Updates
-
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग -
Quick Filling Dinner Anda Paratha Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादिष्ट अंडा पराठा -
मानसून से पहले दिल्ली में डेंगू के 162 और मलेरिया के 42 मामले, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार; जानें बचाव के उपाय -
Dhaba Style Marinade Chicken Tikka Recipe: घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्मोकी स्वाद -
प्रेग्नेंट हैं 39 साल की सामंथा रुथ प्रभु! करीबी शख्स ने किया कन्फर्म, जानें कब होगी डिलीवरी -
मलाइका अरोड़ा की फिटनेस का खुल गया राज, 52 की उम्र में यंग दिखने के लिए करती हैं ये 5 योगासन -
South Indian Style Tomato Rice Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा स्वाद -
Summer Solstice: 21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह
Kanyadan:विवाह में ‘कन्यादान’ पिता के लिए सबसे भावनात्मक क्षण, जानें इसका हिंदू धर्म में महत्व
बेटी की शादी एक पिता के लिए सबसे अहम चरणों में से एक है, जब वो अपने दिल का टुकड़ा किसी और हाथों में थमा देता है। शादी चाहे किसी भी धर्म के अनुसार हो, उसमें जिसे सबसे ज्यादा तकलीफ होती है वो एक पिता को होती है, जो अपनी बेटी का हाथ धूम-धाम से किसी और देता है। पारंपरिक हिंदू विवाह में शादी समारोह में कई तरह के अनुष्ठान और रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। सभी रस्मों का गहरा भावनात्मक महत्व होता है, उनमें से सबसे महत्वपूर्ण "कन्यादान" है।
कन्यादान दो शब्दों कन्या और दान को मिलाकर बना बना है। मतलब बेटी को दान के रूप में खुद से दूर करना है। इसका शाब्दिक अर्थ है अपनी बेटी को एक नए परिवार को देना।

कन्यादान समारोह की उत्पत्ति
कन्यादान परंपरा भारत में सदियों से निभाई जा रही है। लेकिन वेदों में पारंपरिक विवाह में कन्यादान समारोह का उल्लेख नहीं मिलता है। वैदिक काल में जब विवाह की बात आती है तो स्त्री की सहमति बहुत महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, पिता द्वारा अपनी बेटी को दूल्हे को भेंट करने की अवधारणा अनसुनी थी। लेकिन मनु स्मृति ग्रंथों को जन्म के बाद नए ग्रंथों के आने के साथ, कन्यादान की अवधारणा चलन में आई।
मनु स्मृति के अनुसार कन्यादान एक पारिवार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। इसे "सबसे बड़ा दान" माना जाता है।

कन्यादान समारोह का भावनात्मक महत्व
कन्यादान एक भावनात्मक अनुष्ठान है जो पिता और उसकी बेटी के रिश्ते को दिखाता है। क्योंकि पिता के लिए उसकी बेटी सबसे कीमती धन होती है, जिसे वो बहुत ही लाड़ और प्यार से पालता है। पिता को इस बात का अहसास होता है कि उनको एक दिन उसका कन्यादान करना है।
एक पिता के लिए कन्यादान एक अनिवार्य अनुष्ठान और बलिदान है, जो वो अपनी बेटी की नई जिंदगी और आने वाले समय में आपार खुशियों के लिए करता है।

कन्यादान को हिंदू धर्म में कहते हैं 'महादान'
धार्मिक तत्व के कारण कन्यादान का हिंदू शादियों में बहुत महत्व है। एक पारंपरिक हिंदू शादी में सात वचनों के साथ लगने वाले फेरों के बाद जब दुल्हन का पिता दूल्हे पर अपना हाथ रखता है। दूल्हे के हाथ में बेटी का हाथ देना दामाद को बेटी की जिम्मेदारी सौंपने का प्रतीक होता है।

कन्यादान समारोह का धार्मिक महत्व
कन्यादान शादी की सबसे अहम रस्म और प्रतिष्ठान होता है। मान्यता के अनुसार, दूल्हे को भगवान विष्णु का प्रतिरूप कहा जाता है। इसलिए, कन्यादान के साथ, माता-पिता भगवान के प्रतिनिधित्व के तौर पर दूल्हे को अपनी बेटी उपहार देते हैं।
कन्यादान के बिना शादी अधूरी
विवाह में कन्यादान के बिना शादी अधूरी मानी जाती है। कन्यादान एक बेटी को पत्नी बनने और शादी के बाद नए परिवार को गले लगाने को स्वीकारता है।
Image Courtesy- pinterest.com



Click it and Unblock the Notifications