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International Women’s Day: लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिला को मिलते हैं ये कानूनी अधिकार

श्रद्धा मर्डर केस के बाद लिव-इन रिलेशनशिप फिर से चर्चा में आ चुका है। अभी हाल ही में इस तरह के और भी केस आए हैं, जिसमें लिव-इन पार्टनर ने दूसरे पार्टनर की हत्या कर हो। जिसके बाद से लिव-इन रिलेशनशिप और इससे जुड़े हुए कानूनों को लेकर काफी डिस्कशन हो रहे हैं। क्योंकि श्रद्धा मर्डर केस के बाद निक्की मर्डर केस और मुंबई में भी लिव-पार्टनर के द्वारा मौत के घाट उतारे जाने के बाद महिलाओं को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है जो लिव-इन रिलेशनशिप में रहती हैं। आइये जानते हैं कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भारत के संविधान के द्वारा क्या कानून प्रदान किये गये हैं। इस बारें में डीटेल में बता रही हैं इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की वकील कुलसुम फिरदौस। जानते हैं इनसे कि लिव-इन को लेकर भारत के कानून के द्वारा क्या अधिकार मिले हैं-

Live-In-Relationship: लिव-इन रिलेशनशिप होता क्या है ?
लिव-इन रिलेशनशिप में दो बालिग एक साथ अपनी मर्जी से रहना शुरू करते हैं। जिसमें दोनों बिना शादी किए ही शादीशुदा लाइफ जीने लगते हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में हर वो काम कपल करते हैं जो एक शादीशुदा जोड़ा करता है। बद्री प्रसाद बनाम डायरेक्टर ऑफ कंसोलिडेशन केस (1978) में सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन-रिलेशनशिप को पहली बार मान्यता दी थी। जिसमें दो लोग यदि काफी वक्त से साथ में रह रहे हैं और दोनों की इसमें आपसी रजामंदी भी है तो ये रिश्ता मान्य होगा।

Live-In-Relationship: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला है अधिकार
जब दो बालिग कपल एक साथ रहते हैं या रहना चाहते हैं तो ये दोनों का ही मौलिक अधिकार है, जो उनसे कोई नहीं छीन सकता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यस्क लड़का या लड़की को अपनी मर्जी से शादी और किसी के साथ भी रहने का अधिकारी है। लेकिन इंडियन पीनल कोड के तहत इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं प्रदान की गई है। ना ही कोई अलग से कानून बनाया गया है।

Live-In-Relationship: लिव-इन-पार्टनर अगर मारपीट करे तो
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान, अगर लिव-इन-पार्टनर महिला के साथ मारपीट करता है, उसका यौन शोषण करता है, घरेलू हिंसा का शिकार महिला होती है तो वो भारत के घरेलू हिंसा कानून, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act 2005) के तहत पुलिस प्रोटेक्शन पा सकती है। इंदिरा शर्मा बनाम वी.के शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट ने इस बारें में बताया है कि घरेलू हिंसा कानून, 2005 की धारा 2F के तहत लिव-इन रिलेशन में शामिल महिला भी इसका फायदा उठा सकती है।

Live-In-Relationship: लिव-इन पार्टनर महिला पार्टनर से अलग हो जाए तो
यदि लिव-इन पार्टनर अपनी महिला पार्टनर से अलग हो जाता है तब भी भारतीय दंड संहिता के मुताबिक महिला को गुजारे-भत्ते लेने का अधिकार होता है। लिव-इन में रहने वाली महिला को पुरूष की संपत्ति पर अधिकार होगा, लेकिन वो उसकी पैतृक संपत्ति पर दावा नहीं कर सकती है।

Live-In-Relationship: लिव-इन के दौरान अगर बच्चा हो जाए तो
यदि लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान बच्चा हो जाता है तो बच्चा अवैध नहीं होगा। भारतीय कानून के अनुसार, कोई भी बच्चा अवैध नहीं होता है। लिव-इन रिलेशनशिप में अगर बच्चा पैदा हो जाता है तो उसे भी कानूनी अधिकार मिले हुए हैं। लिव-इन रिलेशनशिप अगर समाप्त भी हो जाता है तो बच्चे के पिता को उसकी परवरिश का खर्चा उठाना पड़ेगा, वो कानूनी रूप से इसमें बाध्य होगा। पिता की संपत्तियों में भी इस बच्चे का बराबर का अधिकार होगा।



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