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Father Son Relationship : पिता-पुत्र के बीच इन बातों को लेकर होते हैं रिलेशन खराब, ऐसे करें रिश्ते को मजबूत
इंडियन सोसाइटी इस तरह से बनी हुई है कि घर से सारे फैसले पिता लेते हैं। चाहे वो बच्चों के स्कूल में एडमीशन की बात हो या उसे कौन से खेल में भाग लेना है, स्कूल की कौन-कौन सी एक्टिविटी हैं जिसमें उनका बेटा पार्ट ले सकता है। उसके दोस्त कैसे हों, खाना-पीना सब कुछ पैरेंट्स के कंट्रोल में होता है, वहीं जब करियर चुनने की बात आती है तब भी बेटे को वहीं करना पड़ता है जो उसके पिता कहते हैं। इस तरह से बचपन से ही कंट्रोल हो रहा बेटे और पिता में आगे चलकर रिश्ते खराब होने लग जाते हैं। आप ने भी इस बात का अंदाजा है कि आप भी अपने पैरेंट्स से किस तरह से कंट्रोल होते आ रहे हैं, बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जिन्होंने अपनी पसंद का ड्रेस भी नहीं पहना होगा। इस सब की वजह से पिता और पुत्र के रिलेशन खराब होने लग जाते हैं, जब बेटा जॉब करने लगता है, नौकरी के सिलसिले में बाहर रहने लग जाता है और घर ना आने के बहाने ढूढ़ने लग जाते हैं।

आपको इस बात को भी समझना चाहिए कि वो आपके पिता हैं, आपका अच्छा और बुरा उनको आपसे बेहतर मालूम हैं, उन्होंने आपको जन्म दिया है। लेकिन अपने पिता से रिश्ता अच्छे से बनाकर रखना चाहिए, भले ही आप दोनों में मन मुटाव हो रहा है लेकिन फिर रिश्ते की मर्यादा बनाकर रखनी चाहिए अगर आपका भी अपने फादर के साथ रिश्ता खराब हो रहा है तो यहां पर कुछ सलाह दी जा रही है जिसको आप फॉलो कर सकते हैं और अपने पिता से अच्छा ताल्लुक बनाकर रख सकते हैं-

पिता और पुत्र के बीच मनमुटाव के कारण-
टीन ऐज एक ऐसी अवस्था होती है जहां पर लड़के गलत राह भी पकड़ लेते हैं, लेकिन उनको इस बारें में ज्यादा जानकारी नहीं होती कि वो क्या कर रहे हैं और इसमें गलत क्या है। ऐसे में जब पिता आपको सही बात समझाते हैं तो आप उनको अपना गुस्सा दिखाने लग जाते हैं, नाराजगी जाहिर करते हैं, बात नहीं मानते हैं। जिस वजह से फादर और सन का रिलेशनशिप खराब होने लग जाता है। लेकिन आपको ये समझना होगा कि आपके पिता आपको बुरे रास्ते पर ना चलने की नसीहत दे रहे हैं, जो आपके लिए ही बेहतर हैं, आपके भविष्य के लिए अच्छा है। अगर आप कुछ गलल कर रहे हैं तो उसे छोड़कर अपने पिता की बात सुनें, वहीं पिता को भी अपनी बात समझाएं।

करियर या कॉलेज को लेकर मनमुटाव
इंडियन पैरेंट्स पढ़ाई को लेकर बेटों पर थोड़ा सख्त होते हैं और करियर या कॉलेज को लेकर दोनों के बीच सहमति नहीं बनती है। बेटा कोई और कॉलेज या कोर्स करना चाहता है लेकिन पिता की राय कुछ और होती है। लेकिन यहां पर आप अपने पिता को समझाने की कोशिश करें कि जिस कोर्ट या कॉलेज में आप जाना चाहते हैं वो करियर और आपके फ्यूचर के लिहाज से कितना बेहतर है। जब तक आप उनको अच्छे से नहीं समझाते उनको अपना ही बात सही लगेगी। आप अपने पिता के डर से अपने करियर को लेकर कोई गलत कदम ना उठाएं, जिसको लेकर बाद में पछतावा हो।

आर्थिक कारणों को लेकर बहस
हर परिवार में ये होता है कि पिता चाहते हैं कि जब बेटे की नौकरी लग जाए तो बेटा परिवार की जिम्मेदारी उठा लें। लेकिन अगर शुरूआत में सैलरी ज्यादा ना हो, या फिर उसकी सैलरी में ज्यादातर पैसा उसके आने-जाने और बाकी चीजों में लग रहा है तो बेटा कैसे घर का खर्च उठा पाएगा। ऐसे में आपको अपने पिता को समझाना चाहिए जैसे ही आपकी सैलरी बढ़ती है या फिर आप अच्छा सैलरी के लिए जॉब स्विच करते हैं तो आप परिवार की जिम्मेदारी उठा लेंगे। इसके लिए आपको अपने पैरेंट्स को समझाना होगा।

लव मैरिज को लेकर मनमुटाव
लव मैरिज को लेकर भी पिता-पुत्र के बीच बहस होती है, पिता चाहते हैं कि उनकी बहू उनकी पसंद की हो और शादी अरेंज मैरिज हो , लेकिन बेटा किसी और को पसंद करता है। इस तरह की बातें अक्सर इंडियन हाउसहोल्ड में देखी जाती हैं। यहां पर पिता जिद बांध लेते हैं कि शादी बेटे की पसंद की नहीं होने देंगे। जिसमें धर्म, कास्ट, परिवार, आर्थिक स्थिति सब कुछ देखा जाता है। लेकिन आप अपने पिता को समझाएं, लड़की को मिलवाएं, उसके परिवार के साथ लंच या फिर डिनर पर बुलाकर बातें कराएं, जिससे दोनों परिवारों के बीच एक आपसी अंडरस्टैडिंग बन जाएगी और शादी के लिए भी एक क्रिमिनल की तरह पेश किये जा रहे आपको पर थोड़ा स्ट्रेस कम होगा। अगर इसके बाद भी वो नहीं मानते हैं तो आप बालिग हैं अपना फैसला खुद ले सकते हैं।



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