जब Olympics ट्रैक पर चोटिल बेटे की मदद के लिए उतरा बाप, साथ रेस पूरी कर दी मिसाल, आज भी याद की जाती है कहानी

Derek Redmend Story: डेरेक रेडमंड एक प्रमुख ब्रिटिश धावक थे, जिनका करियर विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई सफलताओं से भरा था। उन्होंने 1986 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और 1987 के विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने ब्रिटेन के लिए स्वर्ण पदक जीता था। 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में, उनसे काफी उम्मीदें थीं, और वे 400 मीटर दौड़ में पदक जीतने के प्रमुख दावेदार थे।

1992 बार्सिलोना ओलंपिक की घटना

Paris Olympics 2024 Derek Redmond emotional story who completed race with the help of his father

बार्सिलोना ओलंपिक के सेमीफाइनल में, डेरेक रेडमंड 400 मीटर दौड़ के लिए ट्रैक पर उतरे। उन्होंने अच्छी शुरुआत की और पूरे उत्साह के साथ दौड़ने लगे। लेकिन अचानक, दौड़ के बीच में, उनके हैमस्ट्रिंग में तेज दर्द हुआ और वे जमीन पर गिर पड़े। उनकी आशाएं और सपने एक पल में बिखर गए।

जब ट्रैक पर उतर आये उनके पिता

जैसे ही डेरेक ने खुद को ट्रैक पर गिरा पाया, उन्होंने दर्द के बावजूद दौड़ पूरी करने का निश्चय किया। वे लंगड़ाते हुए उठे और दौड़ने लगे। यह दृश्य देखकर दर्शकों के दिलों में उनके लिए सम्मान और सहानुभूति का भाव उमड़ आया। लेकिन इस अद्भुत कहानी का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा तब शुरू हुआ जब उनके पिता, जिम रेडमंड, स्टैंड से दौड़कर ट्रैक पर आ गए।

सुरक्षाकर्मियों पर भारी पड़ा एक पिता का भाव

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जिम रेडमंड ने सुरक्षा कर्मियों को पीछे छोड़ते हुए अपने बेटे तक पहुंचने की कोशिश की। उन्होंने डेरेक को सहारा दिया और कहा, "तुम्हें यह खत्म नहीं करना होगा," लेकिन डेरेक ने उत्तर दिया, "मैं इसे खत्म करना चाहता हूँ।" यह सुनकर, उनके पिता ने कहा, "तो हम इसे एक साथ खत्म करेंगे।"

जिम रेडमंड ने अपने बेटे को कंधे का सहारा दिया और दोनों ने मिलकर धीरे-धीरे ट्रैक पूरा किया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों के साथ इस अनोखे दृश्य को देखा और उनकी हिम्मत और संकल्प को सलाम किया।

ओलंपिक के इतिहास में आज भी याद की जाती है ये घटना

इस घटना ने डेरेक रेडमंड को ओलंपिक इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया। उन्होंने भले ही पदक नहीं जीता, लेकिन उन्होंने दुनिया को साहस, संकल्प और पिता-पुत्र के अटूट बंधन का एक अनमोल उदाहरण प्रस्तुत किया।

डेरेक रेडमंड की यह कहानी न केवल खेल के इतिहास में, बल्कि मानवता के इतिहास में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई। उनके पिता का समर्थन और प्यार यह साबित करता है कि परिवार का सहयोग किसी भी मुश्किल घड़ी में हमें हिम्मत और ताकत देता है।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि असली जीत पदकों में नहीं, बल्कि हमारे संकल्प और हौसले में होती है। डेरेक और जिम रेडमंड की यह कहानी हमें सिखाती है कि जब हम गिरते हैं, तो उठकर फिर से चलने की हिम्मत सबसे बड़ी जीत होती है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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