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आज के वक्त में आखिरकार क्यों बच्चे रिश्तेदारों से मिलने में कतराते हैं ? ये हैं बड़े कारण
जब कोई फेस्टिवल होता था या फिर स्कूल बंद होने के बाद गर्मियों की छुट्टियां होती थी तब आपके रिलेटिव्स घर पर छुट्टियां बिताने और त्योहार सेलिब्रेट करने आते थे, आपको भी काफी मजा आता था सभी के साथ वक्त गुजार कर। सब मिल कर काफी मौज मस्ती करते थे, उस वक्त हर रिश्ते के अपने मायने थे। लेकिन आज के वक्त में काफी कुछ बदल गया है। बच्चे अपने रिश्तेदारों से मिलने से परहेज करते हैं, अगर कोई घर पर आता है तो खुद को बिजी बताकर कमरे में बंद हो जाते हैं, यहां तक की बच्चे अपने रिश्तेदारों को भी पहचान नहीं पाते हैं।

आज के वक्त में बच्चों को ना तो अपने रिश्तेदारों से मिलने का कोई क्रेज होता है और ना ही वो उनसे किसी तरह का ताल्लुक रखना पसंद करते हैं, फेस्टिवल में भी रिलेटिव्स से ना मिलने के कई सारे बहाने मौजूद होते हैं। ये सारे कम किशोरावस्था में पहुंच रहे बच्चे ज्यादा करते हैं। उनको सिर्फ अपने दोस्तों के साथ घूमना-फिरना, गेम खेलना और अपनी दुनिया में मस्त रहना पसंद होता है।
बच्चों के ऐसा करने के कई सारे कारण है, जिस वजह से बच्चे अपने रिलेटिव्स से दूर भागते हैं, उनसे मिलना नहीं चाहते हैं-(Why do children shy away from meeting relatives)

पैरेंट्स की रिश्तेदारों से बढ़ती दूरियां
इसका सबसे बड़ा कारण है न्यूक्लियर फैमली। एकल परिवार होने के कारण माता-पिता अपने कामों में बिजी रहते हैं। उनके पास बच्चों को अपने रिश्तेदारों से मिलवाने का वक्त नही होता है। जिसके कारण बच्चे भी किसी रिश्तेदार को जल्दी पहचान नहीं पाते हैं। रिश्तों को निभाने में पैरेंट्स की अहम भूमिका होती है। अगर पैरेंट्स ही बच्चों को अपने रिश्तेदारों के बारें में नहीं बताते और नहीं मिलवाते तो बच्चे तो अनजाने लोगों के साथ दूरू तो बनाएंगे ही। वहीं जब कोई रिश्तेदार घर आता है को वो उसके साथ घुलमिल नहीं पाते हैं।

पैरेंट्स की रिश्तेदारों से दूरियां
पैरेंट्स भी रिश्तेदारों से खुद को दूर रखने की कोशिश करते हैं। आज के वक्त में लोगों को लगता है कि रिश्तेदार उनकी प्राइवेसी में दखल देते हैं। वही पत्नियों का स्वाभाव भी ऐसा होने लगा है कि वो अपने बच्चों के बुआ, चाचा जैसे अपने ससुराल से संबंधित रिश्तेदारों से दूरी बनाती हैं। जिस वजह से भी बच्चे अपने रिश्तेदारों को नहीं जानते हैं और मिलने पर अनजाना व्यवहार करते हैं।

बच्चों का बदलता स्वभाव
बढ़ते बच्चों में उनके स्वभाव पर भी बदलाव आता है, वो लोगों से मिलना पसंद नहीं करते, इसमें रिश्तेदार भी शामिल है। वहीं कुछ बच्चों का स्वाभाव शर्मिला होता है, वहीं कुछ बच्चे शांत स्वाभाव के होते हैं जो किसी से मिलना जुलना पसंद नहीं करते हैं। कुछ बच्चों का नेचर ऐसा होता है कि वो सिर्फ अपने से मतलब रखते हैं, घर में कौन आ रहा है, जा रहा है, उनसे मतलब नहीं होता है।

मोबाइल गेम और इंटरनेट
आज के वक्त में मोबाइल और इंटरनेट ने बच्चों के व्यवहार में बहुत अधिक बदलाव किये हैं। अगर एक बार उन्होंने मोबाइल पर कोई गेम खलेना शुरू कर दिया तो दुनिया इधर से उधर हो जाए वो गेम खेलना बंद नहींं करते है। इसी तहह से वो इंटरनेट पर भी चिपके रहते हैं। जिसके कारण वो रिश्तेदार तो दूर है वो अपने घर के सदस्यों को महत्व नहीं देते हैं।



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