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Yuzvendra Chahal का हुआ तलाक, क्या सच में धनश्री को मिलेंगे 60 करोड़, जानें कैसे तय होती है एलिमनी
Yuzvendra Chahal Dhanashree Verma Divorce: काफी लंबे समय से चल रही अटकलों को विराम देते हुए भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और उनकी वाइफ धनश्री वर्मा ने कानूनी तौर पर एक-दूसरे को तलाक दे दिया है। तलाक संबंधित अन्य औपचारिकताएं आज कोर्ट में पूरी हो चुकी है। चहल और धनश्री को मुंबई के बांद्रा स्थित फैमिली कोर्ट में दोनों ने तलाक के लिए अर्जी डाली थी।
युजवेंद्र चहल और धनश्री को आज तलाक का सर्टिफिकेट मिलेगा, एलिमनी को लेकर रिपोर्ट्स में नए खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, धनश्री को 60 करोड़ रुपये एलिमनी मिल सकती है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। आइए जानते हैं कि भारत में तलाक के बाद मिलने वाली एलिमनी कैसे तय होतीहै ?
सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, पति की नेट सैलरी का 25% पत्नी को मासिक गुजारा भत्ता (Alimony) के रूप में दिया जाना उचित माना गया है। हालांकि, यह राशि हर केस की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

युजवेंद्र चहल की कुल संपत्ति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल की कुल संपत्ति लगभग ₹45 करोड़ है। उनकी कमाई क्रिकेट कॉन्ट्रैक्ट, आईपीएल और ब्रांड एंडोर्समेंट से होती है। वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, धनश्री वर्मा की नेटवर्थ लगभग ₹25 करोड़ है। उन्होंने ब्रांड प्रमोशन और टीवी रियलिटी शो से अच्छी कमाई की है। उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, जिसमें एक क्रिकेटर से शादी करना भी अहम कारक माना जाता है।
तलाक के बाद महिला के लिए एलिमनी की राशि कैसे तय होती है?
तलाक के बाद पत्नी को दी जाने वाली गुजारा भत्ता (Alimony) की राशि कई कानूनी और आर्थिक कारकों पर निर्भर करती है। भारत में, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत एलिमनी दी जाती है, जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी कानूनों में भी इसके अलग प्रावधान हैं।
एकमुश्त एलिमनी (One-Time Lump Sum Amount)
यदि गुजारा भत्ता एकमुश्त दिया जाता है, तो इसके लिए कोई निश्चित मानक तय नहीं है। लेकिन आमतौर पर यह पति की कुल संपत्ति का 1/5वां से 1/3वां हिस्सा हो सकता है।
एलिमनी तय करने वाले मुख्य कारक
1. पति-पत्नी की आय और संपत्ति
एलिमनी की राशि तय करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक पति और पत्नी की आय होती है। यदि पति की आमदनी अधिक है और पत्नी की कोई स्थिर आय नहीं है, तो एलिमनी की राशि अधिक हो सकती है।
2. विवाह की अवधि
जितनी अधिक शादी की अवधि होगी, उतनी ही अधिक एलिमनी मिलने की संभावना होती है। आमतौर पर 10 साल से अधिक समय तक चली शादी में अधिक एलिमनी दी जाती है।
3. पत्नी की आर्थिक स्थिति
यदि पत्नी स्वयं कमाने में सक्षम है और अच्छी आय अर्जित कर रही है, तो एलिमनी की राशि कम हो सकती है या उसे एलिमनी नहीं भी दी जा सकती। वहीं, यदि पत्नी बेरोजगार है, तो उसे अधिक आर्थिक सहायता दी जाती है।
4. पति की आर्थिक जिम्मेदारियां
यदि पति के ऊपर माता-पिता, बच्चों या अन्य कानूनी जिम्मेदारियां हैं, तो अदालत इन पहलुओं को भी ध्यान में रखती है।
5. जीवन स्तर और सामाजिक स्थिति
अदालत यह देखती है कि विवाह के दौरान महिला किस जीवन स्तर पर रह रही थी और तलाक के बाद उसे समान जीवन स्तर बनाए रखने के लिए कितनी राशि की जरूरत होगी।
6. आपसी समझौता
कई बार पति-पत्नी आपसी सहमति से एलिमनी की राशि तय कर लेते हैं। यदि यह समझौता न्यायसंगत हो, तो अदालत इसे स्वीकार कर सकती है।
निष्कर्ष
एलिमनी की राशि हर मामले में अलग होती है और इसे तय करने के लिए अदालत कई कारकों पर विचार करती है। इसका उद्देश्य तलाक के बाद महिला को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखना होता है।



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