Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम
Kanwar Yatra 2024: कब से शुरू होगी शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा, नोट करें शिवलिंग पर जल चढ़ाने की तिथि
Kanwar Yatra 2024 Kab Se Hai: हिंदू धर्म में प्रत्येक वर्ष सावन का महीना भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए काफी फलदाई माना जाता है। प्रत्येक वर्ष सावन माह में लाखों कावडिए गंगा नदी से जल लेकर अपने-अपने नजदीकी शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। कावड़ लाने वाले भक्तों को काँवरिया और भोला कहते हैं।
काँवरिया गंगाजल लेने के पश्चात खुले पैर पैदल और गाड़ियों से यात्रा करते हैं। सावन की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान शिव का जल अभिषेक किया जाता है। कहा जाता है कि सावन के पवित्र माह में कावड़ लाने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से व्यक्ति की संपूर्ण मनोकामनाएँ पूर्ण होती है और रोग, दोष तथा कष्टों से छुटकारा मिलता है।

तो आइए जानते हैं इस वर्ष यानी 2024 में कावड़ यात्रा कब से प्रारंभ हो रही है। इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि शिवलिंग पर जल किस दिन चढ़ाया जाएगा।
कावड़ यात्रा 2024 कब से शुरू हो रही है?
कावड़ यात्रा इस वर्ष यानी 2024 में सावन माह 22 जुलाई से प्रारंभ हो रही है। यह पावन माह 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त को तक रहेगा। 19 अगस्त को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। कावड़ यात्रा की अवधि की बात करें तो यह 22 जुलाई से प्रारंभ होकर शिवरात्रि पर समाप्त हो जाएगी। सावन की त्रयोदशी तिथि पर आने वाली शिवरात्रि इस बार 2 अगस्त को है। इस दिन काँवड़िया जल लाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएंगे।
शिवरात्रि पर कावड़ अपने कावड़ में लाया जल शिवलिंग पर अर्पित करके अपनी मनोकामना के लिए भगवान शिव से आशीर्वाद मांगते हैं। कावड़ यूं तो कंधे पर लाई जाती है और जमीन पर नहीं रखी जाती है लेकिन कावड़ लाने के आजकल कई तरीके बन चुके हैं खड़ी कावड़ और दांडी कावड़, डाक कावड़ और सामान्य कावड़।
कांवड़ यात्रा को लेकर यह है मान्यता
कावड़ यात्रा का प्रचलन पुराने दशकों से चला आ रहा है। कहा जाता है कि सावन के पवित्र माह में भगवान शिव को जल अर्पित करने से हर भक्त की मनोकामनाएँ पूरी होती है। कई जगह कहा जाता है कि पहला कावड़ भगवान परशुराम लाए थे। मान्यता है कि भगवान परशुराम गढ़ मुक्तेश्वर से पहले गंगाजल लाए थे और उत्तर प्रदेश के बागपत में बने पुरा महादेव के शिवलिंग पर गंगा अभिषेक किया था। कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकले हुए विष का पानी पीने से भोलेनाथ का गला नीला पड़ गया था। इस विष की जलन को ठंडा करने के लिए शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेक किया गया था। प्रत्येक वर्ष कावड़ यात्रा में लाखों करोड़ों भक्त गंगाजल लेने निकलते हैं और शिवरात्रि पर गंगाजल अभिषेक करते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
