Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 31 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
Light Digestive Lauki Sabzi Recipe: कम मसालों में बनाएं सेहतमंद और स्वादिष्ट सब्जी -
Param Ekadashi 2026: 10 या 11 जून, कब है परम एकादशी? नोट करें सही डेट और पारण का समय -
माचा नहीं हल्दी, केल नहीं मोरिंगा: विदेशी सुपरफूड्स से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं भारत के ये 5 देसी खजाने -
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी
Maha Kumbh 2025: क्या होता है कल्पवास, जानें इस दौरान कौन से कठिन नियमों का पालन करते हैं साधक
Maha Kumbh 2025: सनातन धर्म के अनुसार, हर बारह वर्ष में आयोजित होने वाला महाकुंभ मेला अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।
आगामी वर्ष 2025 में यह मेला प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित होगा। यह मेला विशेष रूप से चार पवित्र स्थानों- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित किया जाता है।

इस दौरान लाखों श्रद्धालु और पर्यटक श्रद्धा और भक्ति के साथ मेला स्थल पर आते हैं, जहां विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और साधनाएं होती हैं, जिनमें कल्पवास का आयोजन प्रमुख होता है।
कल्पवास एक कठिन तपस्या और साधना होती है, जिसके माध्यम से साधक अपनी आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है और भगवान की भक्ति में पूरी तरह से समर्पित हो जाता है। जानते हैं आखिर क्या होता है ये कल्पवास और कैसे किया जाता है ये कठिन तप -
क्या होता है कल्पवास? (Kalpwas Kya Hota Hai)
प्रयागराज के संगम तट पर भक्तों द्वारा एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान, कल्पवास, किया जाता है, जिसमें वे एक माह तक कठोर साधना में संलग्न रहते हैं। इस साधना की शुरुआत आमतौर पर मकर संक्रांति से होती है। यह विश्वास है कि कल्पवास व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावशाली साधन है। माघ माह में संगम के तट पर एक महीने तक रहकर पुण्य प्राप्ति की इस तपस्या को कल्पवास कहते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति कल्पवास करता है, वह न केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता है, बल्कि जन्मों के बंधनों से भी मुक्त हो जाता है।
कब से होगी कल्पवास की अवधि शुरू? (Mahakumbh 2025 Me Kalpwas Kab Se Shuru Hoga)
वर्ष 2025 में 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन महाकुंभ मेला प्रारंभ होगा, और इसी दिन से कल्पवास की शुरुआत भी होगी। कल्पवास एक महीने तक चलेगा। इस दौरान कल्पवास करने वाले साधक गंगा के तट पर निवास करेंगे और कल्पवास के नियमों का पालन करते हुए ध्यान और सत्संग में रमे रहेंगे।
कल्पवास के प्रमुख नियम (Kalpwas Ke Niyam)
पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास के नियमों पर विस्तार से चर्चा की है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति 45 दिन तक कल्पवास करता है, उसे 21 मुख्य नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इन नियमों में सत्य बोलना, अहिंसा का पालन करना, इन्द्रियों पर संयम रखना, सभी प्राणियों के प्रति दया का भाव रखना, और ब्रह्मचर्य का पालन करना शामिल हैं। साथ ही, व्यसनों से दूर रहना, ब्रह्म मुहूर्त में जागना, प्रतिदिन तीन बार पवित्र नदियों में स्नान करना, त्रिकाल संध्या करना, पितरों को पिंडदान देना, और नियमित दान करना भी आवश्यक है। अन्य नियमों में अन्तर्मुखी जप, सत्संग में भाग लेना, निर्धारित स्थान से बाहर न जाना, किसी की निंदा न करना, साधु-सन्यासियों की सेवा करना, जप और संकीर्तन करना, एक समय भोजन करना, भूमि पर सोना, अग्नि सेवन से बचना, और देव पूजा करना शामिल हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications