Latest Updates
-
Yoga For PCOS: पीसीओएस से परेशान महिलाएं रोज करें ये 5 योगासन, हार्मोन संतुलन में मिलेगी मदद -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि -
अमेरिका में तेजी से फैल रहा कोरोना का नया 'Cicada' वेरिएंट, जानिए लक्षण, कितना खतरनाक और कैसे करें बचाव -
इस दिन झाड़ू खरीदने से घर आती हैं लक्ष्मी, जानें झाड़ू से जुड़े जरूरी वास्तु नियम -
बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में रामबाण हैं ये 5 हरे पत्ते, रोजाना सेवन से हार्ट भी रहेगा हेल्दी -
Navratri Day 9: नवरात्रि के नौवें दिन करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Navratri Day 9 Wishes: मां सिद्धिदात्री का आशीष मिले...इन संदेशों से अपनों को दें महानवमी की शुभकामनाएं -
Ram Navami 2026 Wishes Quotes: भए प्रगट कृपाला...इन चौपाइयों के साथ अपनों को दें राम नवमी की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 27 March 2026: जानें आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत, किन्हें रहना होगा सावधान -
डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन कैसे डालती है दिमाग पर असर, 60 साल बाद रिसर्च में हुआ खुलासा
Sakat Chauth Ke Din Hair Cut: सकट चौथ के दिन बाल कटवाना शुभ या अशुभ?
Sakat Chauth Ke Din Hair Cut: सकट चौथ, जिसे तिलकुट चौथ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
यह व्रत भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा के साथ बड़े ही श्रद्धा और विधि-विधान से मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन कुछ कार्यों को अशुभ माना गया है, जिनमें बाल और नाखून काटना प्रमुख रूप से वर्जित है।

धार्मिक मान्यता और परंपरा (Sakat Chauth Ke Din Baal Katwa Sakte Hain Ya Nahi)
1. शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक:
सकट चौथ के दिन व्रत रखने वाली माताएं पूजा के दौरान पूर्ण शुद्धता और पवित्रता का पालन करती हैं। बाल और नाखून काटना अशुद्ध कार्य माना जाता है, जिससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
2. पवित्रता का उल्लंघन:
हिंदू धर्म में बाल और नाखून काटना पवित्र कार्यों के समय वर्जित होता है। इसे अशुद्धता और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो पूजा के दौरान शुद्धता के नियमों का उल्लंघन करता है।
3. संस्कार और विश्वास:
सकट चौथ पर भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन बाल और नाखून काटने से संतान के जीवन में बाधाएं और समस्याएं आ सकती हैं। यह विश्वास है कि इस दिन के विशेष कर्म और आचरण संतान को शुभ फल दिलाने में मदद करते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
1. संक्रमण का डर:
पुराने समय में बाल और नाखून काटने के लिए आधुनिक उपकरण नहीं थे, जिससे संक्रमण का खतरा रहता था। इस कारण पूजा और व्रत जैसे पवित्र दिनों पर इन कार्यों को करने से बचने की परंपरा बनी।
2. स्वच्छता का ध्यान:
पूजा के दौरान शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान दिया जाता है। बाल और नाखून काटने से कचरा और गंदगी उत्पन्न हो सकती है, जो पूजा स्थल की पवित्रता को प्रभावित कर सकती है।
सकट चौथ का व्रत माताओं के लिए संतान की भलाई के लिए रखा जाता है, जिसमें पूजा के नियमों और परंपराओं का पालन करना अनिवार्य है। बाल और नाखून काटना इस दिन वर्जित है क्योंकि यह अशुद्धता का प्रतीक माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इसे संतान की उन्नति में बाधा डालने वाला कार्य माना गया है। इस परंपरा को श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करना इस व्रत की आध्यात्मिकता को बनाए रखने में सहायक होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











