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Shab e Meraj Ki Namaz Ka Tarika: यहां देखें शब-ए-मेराज की रकाअत और नमाज़ का आसान तरीका
Shab e Meraj Ki Namaz Ka Tarika: शब ए मेराज इस्लाम में एक पवित्र रात है, जिसमें इबादत और नमाज़ का विशेष महत्व है।
इस रात को अल्लाह की रहमत पाने और गुनाहों से तौबा के लिए नमाज़ अदा की जाती है। यहां शब ए मेराज की नमाज़ का तरीका आसान भाषा में समझाया गया है।

नमाज़ से पहले नियत करें (Shab E Meraj Ki Namaz Ki Niyat)
नियत:
"मैं 2 रकात नफ्ल नमाज़ शब ए मेराज की रात वास्ते अल्लाह तआला के, रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।"
(यह नियत हर 2 रकात के लिए दोहराएं।)
नवैतुवन उसल्लीय लिल्लाही तआला रकाति सलावतिल नफ्ली मुतवाजि़हन इल्लाजिहातिल काअबतिश सरीफती अल्लाहू अकबर। (अरबी में नियत)
नमाज़ पढ़ने का तरीका (2 रकात नफ्ल नमाज़) (Shab e Meraj Ki Namaz Ka Tarika)
पहली रकात: (Shab E Meraj Ki Namaz Ki Rakat)
1. अल्लाहु अकबर कहकर हाथ बांधें।
2. सना (सुब्हान क अल्लाहुम्मा...) पढ़ें।
3. तअव्वुज (अउजु बिल्लाह...) और तस्मियह (बिस्मिल्लाह...) पढ़ें।
4. सूरह फातिहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़ें।
5. इसके बाद सूरह इख्लास (कुल हू वल्लाहु) 3 बार पढ़ें।
6. अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएं और 3 बार सुब्हान रब्बियाल अज़ीम पढ़ें।
7. समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहते हुए खड़े हो जाएं और रब्बना लकल हम्द कहें।
8. अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाएं और 3 बार सुब्हान रब्बियाल अला पढ़ें।
9. बैठकर दूसरा सज्दा करें और इसे भी 3 बार दोहराएं।
दूसरी रकात:
1. खड़े होकर सूरह फातिहा पढ़ें।
2. इसके बाद फिर से सूरह इख्लास 3 बार पढ़ें।
3. रुकू, सज्दा और बैठने की प्रक्रिया पहली रकात जैसी करें।
4. तशह्हुद (अत्तहिय्यात...), दुरूद शरीफ और दुआए मासूरा पढ़ें।
5. सलाम फेरें (पहले दाहिने, फिर बाएं)।
शब ए मेराज की विशेष नमाज़ें
1. 12 रकात नफ्ल नमाज़ (2-2 रकात करके):
- हर रकात में सूरह फातिहा के बाद 5 बार सूरह इख्लास पढ़ें।
2. सलातुल तस्बीह:
- 4 रकात नमाज़ अदा करें। इसमें हर रकात में तस्बीह पढ़ी जाती है।
3. विशेष दुआएं और कलमा:
- 100 बार पहला कलमा (ला इलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह) पढ़ें।
- 100 बार तीसरा कलमा (कलमा ए तमजिद)।
- 125 बार दुरूद शरीफ।
4. 2 रकात नमाज़:
- पहली रकात में सूरह फातिहा के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ें।
- दूसरी रकात में सूरह फातिहा के बाद सूरह ल-कद् जा-अकुम् पढ़ें।
महत्वपूर्ण बातें:
- शब ए मेराज की नमाज़ में रकात की संख्या निश्चित नहीं है। आप अपनी क्षमता के अनुसार इबादत कर सकते हैं।
- हर नमाज़ में नियत करना जरूरी है।
- रात को इबादत में बिताएं और अपने गुनाहों की माफी मांगें।
शब ए मेराज की रात अल्लाह की खास रहमत पाने का मौका है। सही तरीके से नमाज़ अदा करें, दुआ मांगें और अल्लाह से तौबा करें। यह रात आपकी रूहानी शक्ति को बढ़ाने और जीवन को सकारात्मकता से भरने का जरिया बन सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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