शनिवार को तेल खरीदना शुभ या अशुभ? जानें धार्मिक कारण और पौराणिक कथा

Can we buy mustard oil on Saturday: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में हर दिन किसी न किसी देवता और ग्रह को समर्पित है। शनिवार का दिन 'न्याय के देवता' शनि देव का है। अक्सर आपने घर के बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा कि आज शनिवार है, तेल मत खरीदना! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तेल को शनि देव पर चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं, उसी तेल को शनिवार के दिन घर लाना अशुभ क्यों माना जाता है?

क्या यह महज एक अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक और ज्योतिषीय तर्क छिपा है? आइए, आज इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं और जानते हैं वह पौराणिक कथा जिसके कारण शनिवार को तेल खरीदना वर्जित हो गया।

शनिवार को तेल खरीदना शुभ है या अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनिवार को सरसों का तेल या किसी भी प्रकार का ईंधन खरीदना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार को तेल खरीदकर घर लाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, जिससे आर्थिक तंगी, बीमारियां और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। ऐसा माना जाता है कि शनि देव का संबंध लोहे और तेल से माना गया है। ज्योतिषियों का मानना है कि शनिवार को तेल खरीदने से जातक की कुंडली में शनि की स्थिति प्रतिकूल हो सकती है, जिससे बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं।

पौराणिक कथा: क्यों शनि देव को प्रिय है सरसों का तेल?

शनिवार को तेल न खरीदने और शनि देव पर तेल चढ़ाने के पीछे 'रामायण काल' की एक बेहद रोचक कथा प्रचलित है-

हनुमान जी और शनि देव का युद्ध:

कथा के अनुसार, जब लंकापति रावण ने अपनी शक्ति के घमंड में शनि देव को बंदी बना लिया था, तब हनुमान जी ने लंका दहन के समय उन्हें रावण की कैद से मुक्त कराया था। एक अन्य कथा के अनुसार, जब हनुमान जी भगवान राम के कार्य में व्यस्त थे, तब शनि देव वहां आए और अपनी शक्ति के अहंकार में हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा।

हनुमान जी ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन जब शनि देव नहीं माने, तो हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ में लपेटकर पहाड़ों पर पटकना शुरू कर दिया। इस रगड़ से शनि देव के पूरे शरीर में भयंकर चोटें आईं और वे दर्द से कराहने लगे। जब शनि देव ने अपनी भूल स्वीकार की और माफी मांगी, तब हनुमान जी को उन पर दया आ गई। हनुमान जी ने उनके घावों पर सरसों का तेल लगाया, जिससे शनि देव की पीड़ा तुरंत शांत हो गई।

प्रसन्न होकर शनि देव ने वचन दिया कि- जो भी भक्त मुझे सरसों का तेल अर्पित करेगा, उसे मेरी क्रूर दृष्टि, साढ़ेसाती और ढैया का कष्ट नहीं झेलना पड़ेगा। तभी से शनि देव पर तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। चूंकि तेल दान की वस्तु बन गई, इसलिए इसे शनिवार को खरीदना वर्जित कर दिया गया, क्योंकि दान की वस्तु खरीदी नहीं, अर्पित की जाती है।

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शनिवार को तेल के अलावा और क्या न खरीदें?

अगर आप शनि देव की कृपा चाहते हैं, तो शनिवार को तेल के साथ-साथ इन चीजों की खरीदारी से भी बचें:

लोहा: शनिवार को लोहा खरीदना गृह क्लेश का कारण बन सकता है।

नमक: शनिवार को नमक खरीदने से कर्ज बढ़ सकता है।

काले तिल: पूजा के लिए तिल एक दिन पहले ही खरीद लें।

कैंची और जूते: ये चीजें भी शनिवार को खरीदना अशुभ माना जाता है।

अगर गलती से खरीद लिया है तेल, तो क्या करें?

यदि अनजाने में आप शनिवार को तेल खरीद लाए हैं, तो घबराएं नहीं। इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय करें:

उस तेल को घर के किचन में इस्तेमाल न करें।

उस तेल का एक दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जला दें।

तेल का कुछ हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दान कर दें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

FAQs
शनिवार को तेल के अलावा और क्या नहीं खरीदना चाहिए?

शनिवार को लोहा, नमक, काली उड़द, कैंची, और काले जूते खरीदने से बचना चाहिए।

अगर गलती से शनिवार को तेल खरीद लिया तो क्या करें?

घबराएं नहीं! उस तेल का कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद को दान कर दें या शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे उसका दीपक जला दें। उसे स्वयं उपयोग करने से बचें।

BoldSky Lifestyle

Story first published: Saturday, March 14, 2026, 8:15 [IST]
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