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Chandra Grahan के दौरान पानी पीना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहता है शास्त्र और विज्ञान
Drinking Water During Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च को दस्तक देने वाला है। खगोलीय घटनाओं के प्रति उत्सुकता के बीच, भारतीय समाज में ग्रहण से जुड़े खान-पान के नियम एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। ग्रहण काल के दौरान 'क्या खाएं और क्या पिएं' से कहीं ज्यादा बड़ा सवाल यह होता है कि क्या ग्रहण के दौरान पानी पीना सुरक्षित है?
वहीं, दूसरी ओर आधुनिक विज्ञान और डॉक्टरों की इस बारे में कुछ अलग ही राय है। ऐसे में सूतक काल शुरू होते ही प्यास लगने पर क्या करें? क्या वाकई ग्रहण की किरणें पानी को दूषित कर देती हैं, या यह केवल एक सदियों पुराना मिथक है? इस लेख में हम परंपरा और तर्क की गहराई में जाकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि ग्रहण के दौरान पानी पीने को लेकर शास्त्र और विज्ञान आखिर क्या कहते हैं।

1. शास्त्रों में क्यों वर्जित माना गया है ग्रहण के दौरान जल ग्रहण करना?
सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव चरम पर होता है। माना जाता है कि इस दौरान चंद्रमा से आने वाली किरणें जल की सात्विकता को खत्म कर देती हैं, जिससे इसका सेवन मन और शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में सूतक काल से पहले ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं।
2. क्या ग्रहण की किरणें वाकई पीने के पानी को 'जहरीला' बना देती हैं?
विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण एक छाया का खेल है, जिसे खगोलीय घटना कहा जाता है। हालांकि, शोध बताते हैं कि ग्रहण के दौरान सूरज की रोशनी कम होने से वायुमंडल में बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीव अधिक सक्रिय हो सकते हैं। क्या यही कारण है कि पानी को ढक कर रखने या न पीने की सलाह दी जाती है?
3. क्या 9 घंटे पहले से ही पानी पीना बंद कर देना चाहिए?
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इतने लंबे समय तक प्यासा रहना सेहत के लिए सही है? ऐसे में आप प्यास लगने पर पानी पी सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि उसमें तुलसी डली हो। तुलसी में मौजूद तत्व शुद्धता को बनाए रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि ग्रहण काल के दौरान प्यास रोकना संभव न हो, तो पारंपरिक तरीके से पानी को शुद्ध करें। इसके लिए पानी के बर्तन में तुलसी के पत्ते या कुशा (घास) डालें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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