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Chandra Grahan in September 2024: साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण इन 3 राशियों पर पड़ेगा भारी
Chandra Grahan in September 2024: सनातन धर्मग्रंथों के अनुसार अमृतपान के दौरान सूर्य और चंद्र देवों ने स्वरभानु को पहचान लिया। उन्होंने भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दी। तब तक स्वरभानु अमृत पी चुका था। जवाब में भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का वध कर दिया। उस घटना के बाद से स्वरभानु सूर्य और चंद्र देवों को अपना शत्रु मानने लगा।
वैदिक कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा 18 सितंबर को है। इस दिन साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा। सनातन धर्मग्रंथों में बताया गया है कि ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर राहु और केतु का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान भोजन करने और शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।

चंद्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव
ज्योतिषियों का कहना है कि हालांकि चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका असर सभी राशियों पर पड़ेगा। इनमें से तीन राशियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
कर्क राशि:
कर्क राशि के स्वामी चंद्र देव हैं, जिन्हें भगवान शिव के रूप में पूजा जाता है। राहु और केतु चंद्र देव को अपना शत्रु मानते हैं। इसलिए कर्क राशि वालों को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कोई भी शुभ कार्य करने से बचें और तामसिक भोजन का सेवन न करें। किसी को नुकसान न पहुँचाएँ और राहु और केतु के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए भगवान शिव के मंत्र का जाप करें।
सिंह राशि:
सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं, भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसलिए सिंह राशि वाले लोगों को सतर्क रहना चाहिए। वाद-विवाद से बचें और वाहन सावधानी से चलाएं। द्वेष की भावना को दूर रखें और बड़ों की आदरपूर्वक सेवा करें। भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर शुभ कार्य करने से बचें। ग्रहण के बाद स्नान, ध्यान, भगवान सत्यनारायण की पूजा और दान-पुण्य करें।
कन्या राशि:
केतु अभी कन्या राशि में है और अगले साल 18 मई तक रहेगा। इसके अलावा 17 सितंबर को सूर्य देव ग्रहण से ठीक पहले कन्या राशि में गोचर करेंगे। सूर्य देव और राहु-केतु के बीच शत्रुता को देखते हुए कन्या राशि वालों को इस दौरान सावधान रहना चाहिए। इस दौरान शुभ कार्य करने या किसी को पैसा उधार देने से बचें। लंबी यात्राएं भी टालनी चाहिए। सुरक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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