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Ganesh Chaturthi 2025: कब है गणेश चतुर्थी? पहली बार कर रहे हैं गणपति स्थापना तो जरूर जानें ये 7 खास बातें
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी का पर्व का हिंदू धर्म में बहुत महत्व होता है। इस साल गणेश चतुर्थी की दो तारीख हैं जिसकी वजह से लोगों को बहुत कन्फ्यूजन हो रहा है। दरअसल, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गणपति को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है, जो भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि इस दिन घर-घर में बप्पा का आगमन होता है।अगर आप भी इस बार पहली बार घर पर गणपति बिठाने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियम और परंपराओं का पालन करना बेहद आवश्यक है।
क्योंकि माना जाता है कि अगर स्थापना विधिवत न की जाए, तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। तो आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी 2025 पर पहली बार गणपति स्थापना करने वालों को कौन-सी 7 खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही कब करें गणपति की स्थापना और किस दिन करें व्रत।

कब है गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है कि इस साल गणेश चतुर्थी कब हैा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि को ये पर्व मनाया जाता है। ऐसे में 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट से चतुर्थी तिथि लग रही है जिसका समापन 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगा। ऐसे में गणपति स्थापना के लिए शुभ दिन 27 अगस्त है और व्रत के लिए 26 अगस्त। हालांकि दोनों ही दिन लोग इस पर्व को मना सकते हैं।
गणपति स्थापना के लिए रखें इन बातों का ध्यान
1. गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी पर गणपति को घर लाने और स्थापित करने के लिए शुभ मुहूर्त देखना बहुत महत्वपूर्ण है। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि के दौरान दिन के समय स्थापना करना उत्तम माना जाता है। इस बार शुभ मुहूर्त प्रातः से दोपहर तक रहेगा। कोशिश करें कि राहुकाल में गणपति की स्थापना न करें।
2. मूर्ति का चुनाव
गणेश जी की मूर्ति सदैव इको फ्रैंडली और मिट्टी की होनी चाहिए। मूर्ति घर के बजट और स्थान के अनुसार छोटी या मध्यम रखें। ध्यान रखें कि एक से डेढ़ फीट से बड़ी मुर्ती न हो। साथ ही दाएं सूंड वाली गणेश मूर्ति घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए।
3. स्थापना की दिशा और स्थान
गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या घर के पूजा स्थल में स्थापित करें। मूर्ति को लकड़ी के पाटे पर लाल/पीले कपड़े बिछाकर विराजमान करें। मूर्ति के चारों ओर स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहनी चाहिए। पास में कलश और नारियल रखना न भूलें।

4. पूजन सामग्री और विधि
गणपति की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री रखें जैसे लाल या पीले फूल, दूर्वा (तीन पत्तियों वाली घास), मोदक या लड्डू, धूप, दीप, कपूर, सिंदूर, हल्दी, चंदन। पूजा के दौरान गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश मंत्र और गणेश चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
5. गणपति का भोग
गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय है, इसलिए प्रतिदिन उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके अलावा फल, पंचामृत और बेसन के लड्डू भी अर्पित किए जा सकते हैं।
6. पूजा के नियम और सावधानियां
गणपति स्थापना के बाद मूर्ति को अकेला न छोड़ें। हर सुबह-शाम दीपक जलाकर आरती करें। घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखें। पूजा में नीले या काले कपड़े का उपयोग न करें।
7. गणपति विसर्जन
गणेश चतुर्थी पर गणपति की स्थापना 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन (अनंत चतुर्दशी तक) की जा सकती है। विसर्जन के समय "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" का जयघोष करें। कोशिश करें कि मूर्ति को नदी या तालाब की जगह घर के ही जल-पात्र या कृत्रिम तालाब में विसर्जित करें ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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