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Jal Abhishek Rules: शिवजी को जल चढ़ाते समय न करें ये गलती, वरना अधूरा रह जाएगा आपका पुण्य
How to Offer Water To Lord Shiva Correctly: सावन तो खत्म हो गया है लेकिन अभी उत्तराखंड और कुछ अन्य जगहों पर सावन का पावन महीना चल रहा है। ये 15 अगस्त तक रहेगा। ऐसा नहीं है कि सावन में ही शिवजी की पूजा की जाती है। हर हर सोमवार भोले बाबा की पूजा के लिए खास होता है। माना जाता है कि सोमवार को शिवजी की सच्चे मन से पूजा करने और जल चढ़ाने से वो भक्त की सारी मनोकामना पूरी करते हैं। शिवजी की पूजा में जल अर्पित करना सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जल चढ़ाते वक्त अगर कुछ गलतियां हो जाएं, तो आपका पुण्य अधूरा रह सकता है?
शिवजी को जल चढ़ाना केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धा और सही विधि से किया जाने वाला कार्य है। यदि आप अनजाने में कुछ गलतियां कर रहे हैं, तो इसका असर आपके भक्ति फल पर पड़ सकता है। आज हम आपको बताएंगे शिवजी को जल चढ़ाते वक्त किन-किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि आपकी पूजा सफल और पूर्ण हो, और आप अपार पुण्य अर्जित कर सकें।

सबसे पहले कहां चढ़ाएं जल
अक्सर मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की लोगों की भीड़ लगी होती है। भक्त सीधे शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता कि वो जैसे जल चढ़ा रहे हैं वो सही तरीका नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले गणेश जी को जल चढ़ाना चाहिए। जो शिव दरबार में दाएं हाथ पर विराजमान होते हैं।
लिंग पर जल चढ़ाने से पहले ये जान लें
गणेश जी को जल चढ़ाने के बाद आप बाएं हाथ पर कार्तिकेय को जल चढ़ाएं। उसके बाद बीच में अशोक सुंदरी जी होती हैं और उन्हें जल चढ़ाएं। उनके बाद माता पार्वती के हस्त कमल को जल चढ़ाना चाहिए। आप सोच रहे होंगे की पार्वती माता का हस्त कमल कहां होता है। आपने देखा होगा कि शिवलिंग के नीचे की ओर एक हाथ जैसा आकार होता है वही पार्वती का हस्त कमल कहलाता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका
अब लास्ट में शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए और उसके बाद नाग देवता पर जल चढ़ाएं जो शिवलिंग के ऊपर होते हैं। अब शिवलिंग के ऊपर जो कलश होता है उसमें जल डालें जो हमेशा शिवलिंग पर जलाभिषेक करता रहता है। लास्ट में नंदी पर जल अर्पित करें जिन्हें शिवजी का वाहन कहा जाता है। अब लास्ट में एक काम और कर लें कि आप शिवलिंग के पास तीन तालियां बजाएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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