Kalashtami Upay: शिवजी के अंश काल भैरव को प्रसन्न करने के 3 महाउपाय, चमकेगी सोई हुई किस्मत

Kalashtami 2026 Upay: 10 अप्रैल 2026, दिन शुक्रवार को कालाष्टमी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में कालाष्टमी का दिन बहुत महत्वपुर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा होती है और जिन्हें 'काशी का कोतवाल' भी कहा जाता है। काल भैरव न केवल भय का नाश करते हैं बल्कि अपने भक्तों की शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि दोष, राहु-केतु की पीड़ा और जीवन में आ रही आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए कालाष्टमी का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। प्रसिद्ध एस्ट्रोलोजर कुसुम डोगरा ने कालाष्टमी पर 3 ऐसे उपाय बताए हैं जिन्हें करने से आपकी सोई हुई किस्मत चमक उठेगी और सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। आइए जानते हैं काल भैरव को प्रसन्न करने के वे 3 महाउपाय, जो आपकी सोई हुई किस्मत को जगा सकते हैं।

1. शत्रुओं के नाश के लिए चढ़ाएं नींबू की माला

यदि आप गुप्त शत्रुओं से परेशान हैं या आपके बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं, तो कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव को नींबू की माला अर्पित करें। इस बात का ध्यान रखें कि आप माला बनाने के लिए 11 या 21 ताजे नींबू लें और उनकी माला बनाकर भैरव मंदिर में जाकर उन्हें काल भैरव को पहना दें। ऐसा माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और शत्रुओं का प्रभाव कम हो जाता है।

2. आर्थिक तंगी दूर करने के लिए जलेबी का भोग

अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं तो कालाष्टमी के दिन जलेबी का भोग लगाएं जो उन्हें अति प्रिय है। इसके बाद इस प्रसाद को गरीबों में बांट दें। ऐसा करने से आर्थिक बाधाएं दूर होंगी।

3. शनि दोष से मुक्ति के लिए काले कुत्ते को खिलाएं मीठी रोटी

शास्त्रों में काले कुत्ते को भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि काले कुत्ते की सेवा करने से भैरव बाबा साक्षात प्रसन्न होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि काले कुत्ते को रोटी खिलाने से कुंडली से शनि और राहु के दोषों को शांत करने के लिए अचूक माना जाता है।

कालाष्टमी पूजा का महत्व और लाभ

कालाष्टमी पर की गई साधना न केवल मनोकामनाएं पूरी करती है, बल्कि साधक को साहस और मानसिक शांति भी प्रदान करती है।

शत्रु बाधा से मुक्ति: विरोधियों के षडयंत्र विफल होते हैं।

ग्रह शांति: शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

सुरक्षा कवच: काल भैरव की कृपा व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाती है, जिससे अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं का भय दूर होता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

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