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Mokshada Ekadashi पर कर लें ये उपाय, संतान प्राप्ति और विवाह में आ रही है रुकावट होगी दूर
Mokshada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी अत्यंत पवित्र तिथि मानी गई है, जिस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत रखा जाता है। आज मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि एकादशी का व्रत न सिर्फ मन और आत्मा को शुद्ध करता है बल्कि जीवन में चल रही परेशानियों को भी दूर करता है। हर महीने की ग्यारहवीं तिथि को आने वाली एकादशी में से मोक्षदा एकादशी सबसे शुभ और कल्याणकारी मानी जाती है।
कहा जाता है कि मोक्षदा एकादशी के दिन द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद गीता का दिव्य ज्ञान दिया था, इसलिए इस तिथि पर किए गए पुण्य कार्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन श्रीहरि की आराधना करने से विवाह में आ रही बाधा, संतान प्राप्ति में देर, कुंडली संबंधी दोष, और जीवन की रुकावटें दूर होने का आशीर्वाद मिलता है।

कब है मोक्षदा एकादशी 2025
इस साल मोक्षदा एकादशी की तिथि 30 नवंबर की रात 9 बजकर 27 मिनट से शुरू हो रही है जो 1 दिसंबर 2025 सोमवार की रात 7 बजकर 1 मिनट तक है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर को ही रखा जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खास उपाय करने से शादी में आ रही अड़चन को दूर करेगी और संतान प्राप्ति में भी मदद करेगा।
मोक्षदा एकादशी पर विशेष उपाय
यदि विवाह पक्का नहीं हो रहा, संतान सुख में बाधा है या जीवन में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो इस दिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें। मान्यता है कि ऐसा करने से कर्म दोष, पितृ दोष, विवाह बाधा और संतान संबंधी रुकावटें समाप्त होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र (पूर्ण पाठ)
ओं श्री परमात्मने नमः।
श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं विष्णोः सहस्रनामस्तोत्रपाठं करिष्ये॥
न्यास
शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये॥
प्रारंभिक श्लोक
विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।
भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥ 1॥
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमां गतिः।
अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥ 2॥
योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः।
नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः॥ 3॥
1000 नाम श्लोकबद्ध
सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः।
संभवो भावनो भर्ता प्रभवः प्राभवो यः॥ 4॥
ईश्वरः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः।
हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः॥ 5॥
ईश्वरः विक्रमो धन्वी मेधावी विक्रमः क्रमः।
अनुत्तमो दुराधर्षो कृतज्ञः कृतिरात्मवान्॥ 6॥
सुरेशः शरणं शर्मा विश्वरेता प्रजाभवः।
अहः संवत्सरो व्यालः प्रत्ययः सर्वदर्शनः॥ 7॥
अजः सर्वेश्वरः सिद्धः सिद्धिः सर्वादिरच्युतः।
वृषाकपिरमीदेव पुर्षः वीरे प्रसिद्धकृत्॥ 8॥
सहस्रमूर्तयः विश्वतश्चक्षुराननः।
निरञ्जनः शाश्वतः शुद्धो धनो धन्यः श्रीनिधिः॥
व्याख्यातः कविरादित्यः सोमः सोमपतिर्धुवः।
हुताशनः शीतोष्णः पवमानो हिमांशुः॥
बहुरूपो महारूपो सर्वरूपो महातपाः।
महाबलः पराक्रान्तो मानदः कल्याणप्रियः॥
महादेवो महीदेवो देवेशो देवभृद्गुरुः।
उत्तरो गोपतिर्गोप्ता ज्ञानगम्यो पुरातनः॥
शरदिन्दुरिव व्योम कुमुदाकरसोदरः।
आनंदो ब्रह्मणः ब्रह्म ब्रह्मविद् ब्रह्मणप्रियः॥
उत्तमः श्लोकनायकः विष्णुः चक्रधरः प्रभुः।
धर्मगुप् धर्मकर्ता राजा सर्वात्मा सर्वमङ्गलः॥
इदं स्तवं भगवतो विष्णोर्व्यासेन कीर्तितम्।
पठेन्नरः सदाभक्त्या तद्भक्तिमवाप्नुयात्॥
धर्मार्थकाममोक्षाणां प्राप्त्यर्थे मानवा धीयात्।
पठन् मित्रं सुलभं संसारभयरं हरिम्॥
समापन मंत्र
ओम् शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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