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इन ज्योतिष उपायों से आपका बच्चा होगा पढ़ाई में होशियार
बदलते हुए समय की मांग के कारण माता पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं। जब बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पता तो यह पेरेंट्स के लिए सिर दर्द बन जाता है। कई मामलों में बच्चे लाख कोशिशों के बाद भी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते। इसका सबसे बड़ा कारण है इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का ज़्यादा इस्तेमाल जिससे बच्चों की एकाग्रता भंग होती है।
इसके अलावा भी कई ऐसे कारण हो सकते हैं जैसे घर का वास्तु, स्टडी रूम का वास्तु, कुंडली में कोई दोष, या फिर जिस दिशा में आपका बच्चा बैठकर पढ़ रहा है आदि। आज इस लेख में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे। हम आपको वास्तु के कुछ टिप्स के साथ इस समस्या से निपटने के आसान उपाय भी बताएंगे। तो चलिए अपनी इस चर्चा को हम आगे बढ़ाते हैं।

कमरे के वास्तु को ध्यान में रखें
1. कमरे को डिज़ाइन करते समय या फिर कंस्ट्रक्शन के दौरान इस बात को ध्यान में रखें कि कमरा पूर्वी उत्तर कोने में हो। अगर यह संभव न हो तो उत्तर दिशा में भी आप अपना कमरा बनवा सकते हैं लेकिन याद रखिये कमरे का दरवाज़ा पूर्वी उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।
2. घर बनवाते समय एक अन्य बात आपको ध्यान में रखनी चाहिए कि कभी भी वाशरूम बच्चों के बैडरूम और स्टडी रूम के ऊपर न हो। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है जिसका प्रभाव आपके बच्चे पर भी पड़ता है। इसके अलावा वाशरूम न तो पलंग के सामने होना चाहिए और न ही स्टडी टेबल के सामने। यदि ऐसा हुआ तो वाशरूम का दरवाज़ा हमेशा बंद ही रखें।
3. कमरे की सिर्फ दिशा ही नहीं बल्कि आकार भी बहुत मायने रखता है। कहते हैं स्टडी रूम चौकौर होना चाहिए क्योंकि यह चारों तरफ से आने वाली ऊर्जा को संतुलित रखता है।
4. कमरे की दीवार का रंग और पर्दों का रंग हरा ही रखें। इससे आपको एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही सभी बाधाएं दूर होंगी और आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा।
5. यदि लाख कोशिशों के बाद भी आपके बच्चे को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने में दिक्कत होती है तो आप उन्हें सोते समय अपने पैर उत्तर दिशा में रखने की सलाह दें। इससे उनके कॉन्सेंट्रेशन पावर में सुधार आएगा। इसके अलावा पूर्व दिशा में सिर रख कर सोना भी आपके बच्चे के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। इससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी और जब वे सुबह उठेंगे तो तरोताज़ा महसूस करेंगे।
6. स्टडी रूम में बुक शेल्फ कभी भी स्टडी टेबल के आगे या फिर बच्चे के सामने नहीं होना चाहिए। इससे उनकी एकाग्रता भंग होती है।
7. यदि स्टडी रूम में खिड़की है तो वह हमेशा पूर्व दिशा में होनी चाहिए।
8. स्टडी टेबल पूर्व या फिर पूर्वी उत्तर दिशा में रखें ना कि खिड़की के ठीक सामने।
9. टेबल के ऊपर स्टडी लैंप ज़रूर रखें चाहे आपका बच्चा इसे इस्तेमाल करे या नहीं। माना जाता है कि इससे पढ़ाई का माहौल बनता है साथ ही बच्चे का कॉन्सेंट्रेशन पावर भी बढ़ता है।
10. कमरे में अच्छे चित्र लगाएं जैसे दौड़ते हुए घोड़े, उगता हुआ सूरज आदि इससे आपके बच्चे के कमरे में सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा। भूलकर भी कमरे में नकारात्मक तस्वीरें ना लगाएं।
11. देवी सरस्वती ज्ञान की देवी होती है। कमरे के दक्षिण दिशा में माता का चित्र लगाना शुभ होता है।
12. दक्षिण दिशा में आप अपने बच्चे के सर्टिफिकेट्स, ट्रॉफी, मेडल आदि जैसी चीज़ें रख सकते हैं। यह बेहद शुभ होता है साथ ही आपके बच्चे को प्रोत्साहित भी करता है।
13. कमरे में जिस दिशा से हवा आ रही हो बच्चे को उस दिशा में बैठकर पढ़ना नहीं चाहिए। इसे उनकी एकाग्रता भंग होती है। इसी वजह से खिड़की और दरवाज़े के पास बैठकर नहीं पढ़ना चाहिए।
14. ध्यान रहे पढ़ते समय बच्चे के ठीक सामने दीवार न हो या फिर आपका बच्चा कोने में बैठकर न पढ़ें। इससे उसे एकाग्रता बनाए रखने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
कई बार विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने में मुश्किलें आती है और उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता। इस स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास कुछ बेहतरीन उपाय हैं।
यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा आलसी है और पढ़ना नहीं चाहता तो ऐसे में आप उसे तांबे में जड़ा हुआ पंचमेश रत्न या फिर सोने में जड़ा हुआ नवमेश रत्न पहनाएं।
अगर आपके बच्चे को पढ़ाई में एकाग्रता बनाने में परेशानी हो रही है तो उसे ज़्यादा मीठा खाने की सलाह दें ना कि नमकीन।
नीम के पौधे को कमरे के दरवाज़े के आस पास रखने से सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर रहेंगी।
ध्यान के लिए ब्रह्ममुहूर्त को सबसे अच्छा समय माना जाता है इसलिए अगर आपके बच्चे को लगता है कि वह पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहा है तो उसे ब्रह्ममुहूर्त के दौरान पढ़ने की सलाह दें। कहते हैं इस समय की हुई पढ़ाई लंबे समय तक याद रहती है। ब्रह्ममुहूर्त सुबह 4 से 6 बजे तक रहता है।
सुलेमानी हकीक एक पत्थर है। नौ सुलेमानी हकीक के पत्थरों को हरे कपड़े में बांध कर स्टडी रूम में रखने से भी पढ़ाई में ध्यान लगाने में मदद मिलती है।
कभी हमारे दायीं तरफ की नॉस्ट्रिल एक्टिव रहती है तो कभी हमारी बायीं तरफ की नॉस्ट्रिल सक्रिय रहती है। जब बच्चे के दायीं तरफ की नॉस्ट्रिल एक्टिव रहती है तो उसे कठिन विषय की पढ़ाई करनी चाहिए। इसके अलावा यदि दायीं तरफ की नॉस्ट्रिल एक्टिव है तो स्कूल के या एग्जाम के लिए जाते समय घर से पहले दांया पैर बाहर निकालें। यहां तक की स्कूल या एग्जाम हॉल में प्रवेश करते समय यदि बायीं तरफ की नॉस्ट्रिल एक्टिव हो तो पहला बायां पैर आगे बढ़ाएं।
अपने स्टडी टेबल पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर श्री यंत्र रखें। पढ़ाई शुरू करने से पहले थोड़ी देर के लिए आप श्री यन्त्र के सामने हाथ जोड़कर ध्यान करें। साथ ही ॐ भवाये विद्यम देहि देहि ॐ नमः मंत्र का जाप करें।
इन उपायों से आपके बच्चे की पढ़ाई में सुधार आएगा और वह अच्छा प्रदर्शन कर पाएगा। यह सभी उपाय आपके बच्चे के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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