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सावन में महामृत्युंजय मंत्र का लाभ मिलता है दोगुना, बस ये सावधानी है जरूरी

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हिंदू धर्म में मंत्र, जप, यज्ञ आदि का बहुत महत्व माना गया है। शिवपुराण तथा दूसरे कई ग्रंथों में महामृत्युंजय मंत्र का जिक्र मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भगवान शिव बहुत प्रसन्न होते हैं। शिव का प्रिय सावन का महीना भी लग चुका है।

Benefits of Mahamrityunjaya Mantra during Sawan

भोलेनाथ अपने भक्तों के उद्धार के लिए हमेशा तैयार रहते हैं लेकिन सावन के महीने में शिव भक्तों को उनकी विशेष कृपा मिल पाती है। शिव को प्रसन्न करने में महामृत्युंजय मंत्र भी अहम भूमिका अदा करता है। सावन के खास महीने में आप भी भगवान शिव का खास आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। जानते हैं कौन कौन से लाभ आपको महामृत्युंजय मंत्र से मिल सकते हैं।

जानें पूर्ण महामृत्युंजय मंत्र और अर्थ

जानें पूर्ण महामृत्युंजय मंत्र और अर्थ

ऊं हौं जूं सः ऊं भूर्भुवः स्वः ऊं त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ऊं स्वः भुवः भूः ऊं सः जूं हौं ऊं

महामृत्युंजय मंत्र से मिलने वाले लाभ से पहले इस चमत्कारी मंत्र का अर्थ जानना जरूरी है।

इस मंत्र का मतलब है कि हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो हर सांस में जीवन शक्ति का संचार करते हैं और पूरी सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं। इस मंत्र के साथ महसूस करें कि आपको एक ताकत मिलती है जो जीवन में खुशी, संतुष्टि और शांति का एहसास कराती है। इस बात से सभी वाकिफ हैं कि अमरता हासिल करना संभव नहीं है लेकिन भोलेनाथ अपनी शक्तियों से हमारी मृत्यु के समय को कुछ समय के लिए बढ़ा सकते हैं।

ये विधि है असरकारी

ये विधि है असरकारी

किसी भी व्यक्ति को महामृत्युंजय मंत्र की साधना श्रद्धापूर्वक और निष्ठा के साथ करनी चाहिए। इस मंत्र का अनुष्ठान शुभ दिन, शुभ पर्व, शुभ काल या शुभ मुहूर्त में सम्पन्न करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करने के दौरान भगवान शिव और पार्वती माता की तस्वीर लगाकर महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करना चाहिए।

महामृत्युंजय मंत्र के निरतंर जप से मिलते हैं ये लाभ

महामृत्युंजय मंत्र के निरतंर जप से मिलते हैं ये लाभ

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक उत्तम मार्ग है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक शंकर भगवान के इस महामंत्र से निश्चित मृत्यु को भी टाला जा सकता है। महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख बार निरंतर जप करने से आने वाली अथवा मौजूद किसी भी तरह के रोग और नुकसान पहुंचाने वाले ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। महामृत्युंजय मंत्र असाध्य रोग और अकाल मृत्यु से लोगों की रक्षा करता है और ये बात वैदिक शास्त्रों और पुराणों से भी साबित होती है। कुंडली में किसी तरह के दोष, पारिवारिक कलह, धन संपत्ति से जुड़े विवाद में भी ये मंत्र लाभकारी होता है।

महामृत्युंजय मंत्र के जप का उचित समय

महामृत्युंजय मंत्र के जप का उचित समय

शास्त्रों में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने के लिए सुबह 2 बजे से 4 बजे का समय श्रेष्ठ माना गया है। अगर किसी वजह से इस समय में आप मंत्र जाप नहीं कर पाते हैं तो सवेरे उठकर स्नानादि करें और साफ वस्त्र धारण करें और फिर पांच बार रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप कर लें।

महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी सावधानी

महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी सावधानी

महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं। लोगों को इससे जुड़े नियम और सावधानी का ज्ञान होना भी जरूरी है ताकि वो इस मंत्र का पूरा लाभ ले सकें। अगर आपको इस मंत्र के जप से जुड़ी कोई भी आशंका है तो इसका जाप किसी पंडित से कराना ही बेहतर रहेगा।

English summary

Benefits of Mahamrityunjaya Mantra during Sawan

Mahamrityunjaya Mantra helps to improve mental, physical and emotional health, especially in the sawan month. This mantra belongs to Lord Shiva. Sage Markandeya was the only one who knew this initially.
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