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Sheetala Ashtami Fasting Rules: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। कई जगहों पर शीतला अष्टमी को ही बसौड़ा के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल 11 मार्च, बुधवार को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी। यह दिन आरोग्य की देवी, शीतला माता को समर्पित होता है। इस दिन शीतला माता की पूजा करके बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और सभी वही बासी भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। परंपरा के अनुसार, शीतला अष्टमी के लिए भोजन एक दिन पहले शीतला सप्तमी को ही तैयार कर लिया जाता है। बसौड़ा के दौरान खानपान से जुड़े कुछ विशेष नियम माने जाते हैं। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से शीतला माता की कृपा प्राप्त होती है और रोग-दोष दूर रहते हैं। ऐसे में, आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि शीतला अष्टमी या बसौड़ा के दिन दिन क्या खाना चाहिए और क्या नही?

शीतला अष्टमी के दिन क्या खाना चाहिए?
बसौड़ा का अर्थ ही है पहले से बना हुआ या ठंडा भोजन। इसलिए शीतला अष्टमी के दिन ताजा भोजन बनाने की बजाय एक दिन पहले तैयार किया गया खाना ही ग्रहण करने की परंपरा है।
इस दिन ठंडा और पहले से बना भोजन ही खाने की परंपरा मानी जाती है।
पूजा के समय माता को पानी में भिगोई हुई चने की दाल अर्पित की जाती है।
कई स्थानों पर दही-चावल का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
बासोड़ा के लिए एक दिन पहले ही कई तरह के पकवान तैयार कर लिए जाते हैं, जैसे कैर-सांगरी की सब्जी, दाल की पूरी, दही वड़े, पूए, कढ़ी और रबड़ी आदि।
अगले दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और शीतला माता को इन व्यंजनों का भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग पूरे दिन यही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
इस दिन घर में मिट्टी का घड़ा लाना शुभ माना जाता है। घड़े की पूजा करने के बाद उसमें रखा ठंडा पानी पीने की परंपरा भी है, जिसे शीतलता और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
शीतला अष्टमी के दिन क्या नहीं खाना चाहिए?
बसौड़ा के दिन गरम या ताजा बना भोजन खाने से बचने की सलाह दी जाती है।
परंपरा के अनुसार इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
इस पर्व पर लहसुन और प्याज का सेवन भी नहीं किया जाता, क्योंकि जो भोजन तैयार होता है उसे सबसे पहले शीतला माता को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।
शीतला अष्टमी के दिन शराब का सेवन करना भी अशुभ माना जाता है।
इस दिन मांसाहारी भोजन से भी दूर रहना चाहिए।
शीतला अष्टमी के दिन क्या चाय पी सकते हैं?
शीतला अष्टमी या बसौड़ा के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है। ऐसे में, कई लोगों का यह सवाल होता है कि क्या शीतला अष्टमी के दिन चाय पी सकते हैं? तो इसका जवाब है नहीं। चूंकि ल इस दिन चूल्हा जलाने की मनाही होती है और चाय एक दिन पहले बनाकर नहीं रखी जा सकती है। ऐसे में, शीतला अष्टमी के दिन चाय नहीं पी सकते हैं। हालांकि, कई जगहों पर शाम के समय लोग चूल्हे पर चाय बनाकर पी लेते हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि शीतला माता को अर्पित किए गए भोग को आप किसी गर्म या ताजी चीज के साथ नहीं खा सकते हैं। सिर्फ भोग में चढ़ाए गए व्यंजन को उसी रूप में प्रसाद के तौर पर ग्रहण करने की परंपरा मानी जाती है।



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