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शिव के इस महामंत्र से खत्म करें, शनि और राहु का साया
इस शिवरात्री भगवान शिव के मंत्रों का उच्चारण कर ग्रहों की बनती बिगड़ती स्थितियों पर काबू कर सकते हैं।
कुंडली में राहु और केतु दोष है। क्या आपकी कुंडली पर साढ़े साती चल रही है ? ये सब ऐसे प्रभाव है जो व्यक्ति के जीवन में बड़ी से बड़ी उथल पुथल हो जाती है।
ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक जिन ग्रहों की दृष्टि बहुत रौद्र होती है। उनकी रौद्र स्वभाव के चलते व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। लेकिन कहते है हर मुश्किल का एक तोड़ होता हैं। जी हां इस शिवरात्री भगवान शिव के मंत्रों का उच्चारण कर ग्रहों की बनती बिगड़ती स्थितियों पर काबू कर सकते हैं।

ये अचूक मंत्र करेगा काम
शनि और राहु के कुण्डली में बुरे योग गंभीर और मृत्यु के समान शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं को देने वाले भी साबित हो सकते हैं।
इन ग्रहों के योग से ही किसी व्यक्ति की कुण्डली में कालसर्प, पितृदोष बनते हैं। माना जाता है कि इन दोषों से किसी भी व्यक्ति के जीवन में गहरी मानसिक परेशानियां भी पैदा होती है।
धार्मिक मान्यताओं में सारे ग्रह काल गणना के आधार हैं और चूंकि काल पर शिव का नियंत्रण है, इसलिए महाकाल यानी शिव की उपासना ग्रह दोषों की शांति के लिए बहुत असरदार मानी गई है। जिसमें शिव के ऐसे अचूक मंत्र के जप का महत्व है, जो ग्रह पीड़ा ही दूर नहीं करता बल्कि मनचाहे फल भी देता है। यह अद्भुत और प्रभावकारी मंत्र है - शिव गायत्री मंत्र।

जानते हैं शिव पूजा की सामान्य विधि के साथ यह शिव गायत्री मंत्र -
- शनिवार, सोमवार, शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची चढाएं। इसके बाद इस शिव गायत्री के दिव्य मंत्र का जप करें -
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे।
महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।।

यह है इस मंत्र की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव परम शिव भक्त हैं और शिव के आदेश के मुताबिक ही शनि जगत के हर प्राणी को कर्मों के आधार पर दण्ड देते हैं। इसीलिए शनि या राहु आदि ग्रह पीड़ा शांति के लिए शिव की पूजा खासतौर पर शनिवार, सोमवार को बहुत ही कारगर होती है।



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