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National Handloom Day: अपने वॉर्डरोब में शामिल करें ये 7 मशहूर हैंडलूम साड़ियां, हर मौके पर मिलेगा शाही लुक
Best Handloom Sarees: भारत में हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य देश के हथकरघा बुनकरों और उनकी पारंपरिक कला को बढ़ावा देना है। ऐसे में अगर आप भी भारतीय हस्तकरघा को समर्थन देना चाहती हैं, तो इसकी शुरुआत अपने वॉर्डरोब से कर सकती हैं। हाथ से बुनी गई हैंडलूम साड़ियां न सिर्फ पहनने में आरामदायक होती हैं, बल्कि उनकी बुनाई और डिजाइन भी उन्हें खास बनाते हैं। बनारसी से लेकर कांजीवरम और पैठानी जैसी कई हैंडलूम साड़ियां आज भी महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। आइए, जानते हैं ऐसी 7 लोकप्रिय हैंडलूम साड़ियों के बारे में, जो आपके एथनिक कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए।

बनारसी साड़ी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तैयार होने वाली बनारसी साड़ी भारतीय हथकरघा कला की सबसे लोकप्रिय पहचान मानी जाती है। शुद्ध रेशम, जरी और ब्रोकेड की महीन बुनाई इसे खास बनाती है। इसकी खूबसूरत कारीगरी के कारण यह शादी और अन्य पारंपरिक समारोहों में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। बाजार में बनारसी साड़ियां अलग-अलग डिजाइनों और बजट में उपलब्ध हैं, जबकि प्रीमियम साड़ियों में सोने और चांदी की जरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप अपने वॉर्डरोब में एक क्लासिक हैंडलूम साड़ी ऐड करना चाहती हैं, तो बनारसी साड़ी बेहतरीन विकल्प हो सकती है।
कांजीवरम साड़ी
तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी भारतीय हैंडलूम की सबसे प्रतिष्ठित साड़ियों में गिनी जाती है। इसे शुद्ध रेशम के धागों और जरी की बारीक कारीगरी से तैयार किया जाता है। इसके चौड़े बॉर्डर और पारंपरिक डिजाइन इसे खास बनाते हैं। शादी, रिसेप्शन और बड़े धार्मिक आयोजनों में यह महिलाओं की पहली पसंद रहती है। इसकी कीमत डिजाइन, रेशम और जरी की गुणवत्ता के अनुसार करीब 12 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है।
मुगा सिल्क साड़ी
असम की मुगा सिल्क साड़ी अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए देश-दुनिया में मशहूर है। यह खास रेशम से तैयार की जाती है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊ रहना है। कहा जाता है कि समय के साथ इसकी चमक और भी निखरती जाती है। साधारण से लेकर प्रीमियम डिजाइन तक इसकी कीमत लगभग 2 हजार रुपये से 2 लाख रुपये तक हो सकती है।
चंदेरी सिल्क साड़ी
मध्य प्रदेश की चंदेरी सिल्क साड़ी हल्के वजन और शानदार बुनाई के लिए जानी जाती है। इसमें रेशम और सूती धागों का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है, जबकि सुनहरी और चांदी जैसी जरी इसकी खूबसूरती बढ़ाती है। यह साड़ी पहनने में आरामदायक होने के साथ-साथ बेहद एलिगेंट लुक देती है। त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और पारंपरिक आयोजनों के लिए इसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है।
पटोला साड़ी
गुजरात के पाटन शहर में तैयार होने वाली पटोला साड़ी अपनी अनोखी डबल इकत बुनाई के कारण खास पहचान रखती है। इसे बनाने में कई महीनों की मेहनत लगती है, इसलिए यह भारत की सबसे खास हैंडलूम साड़ियों में शामिल है। इसके पारंपरिक डिज़ाइन और रंगों का आकर्षण कभी पुराना नहीं पड़ता। अच्छी गुणवत्ता वाली पटोला साड़ी की कीमत लगभग 3 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है।
कसावु साड़ी
केरल की पारंपरिक कसावु साड़ी, जिसे सेट्टू साड़ी भी कहा जाता है, अपनी सादगी और शाही अंदाज के लिए प्रसिद्ध है। ऑफ-व्हाइट रंग की इस साड़ी पर सुनहरे जरी का बॉर्डर इसकी खास पहचान है। ओणम, विषु, शादी और अन्य शुभ अवसरों पर महिलाएं इसे बड़े उत्साह से पहनती हैं। अलग-अलग रंग के ब्लाउज के साथ यह साड़ी बेहद आकर्षक और क्लासिक लुक देती है।
पैठणी साड़ी
महाराष्ट्र की पैठणी साड़ी राज्य की सबसे प्रतिष्ठित पारंपरिक साड़ियों में गिनी जाती है। इसकी शुरुआत प्राचीन काल में औरंगाबाद के पास स्थित पैठण नगर से मानी जाती है। यह साड़ी शुद्ध रेशम और हाथ से की गई जरी की बारीक बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। इसके पल्लू और बॉर्डर पर मोर, कमल और अन्य पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं। शादी, त्योहार और विशेष अवसरों पर पैठणी साड़ी महिलाओं की पहली पसंद मानी जाती है।



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