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Puja Aasan Rules: पूजा में आसन से जुड़े इन नियमों का पालन करने से मिलता है मनचाहा फल
पूजा करने से मन और आत्मा दोनों को ही शांति मिलती है। साथ ही पूजा हमें ईश्वर से जोड़े रखती है। कहते हैं जिस घर में सुबह शाम ईश्वर की आराधना की जाती है उस घर की खुशियां हमेशा बनी रहती है। यदि सच्चे मन से भगवान को केवल याद किया जाए तो वे अपने भक्तों की मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। हिंदू धर्म में पूजा करने के कई नियम होते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। माना जाता है यदि नियमों के अनुसार पूजा की जाए तो भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है।

इन नियमों में से एक है आसन पर बैठकर पूजा करने का। जी हां पूजा करते समय कभी भी जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। आप जब भी पूजा करें हमेशा जमीन पर कुछ न कुछ जरूर बिछा लें। सीधे जमीन पर बैठकर पूजा करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा हर पूजा के लिए अलग अलग तरह के आसन का प्रयोग करना चाहिए। आइए आपको आसन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं।

क्यों जरूरी है आसन पर बैठना
कहते हैं पूजा करते समय या फिर मंत्रों का जाप करते समय हमारे शरीर की ऊर्जा बढ़ने लगती है। ऐसे में सीधे जमीन पर बैठने से वह ऊर्जा जमीन में चली जाती है। यदि आप आसान पर बैठकर पूजा करते हैं तो यह ऊर्जा आपके शरीर में बनी रहेगी क्योंकि आसान आपके शरीर और जमीन के बीच कुचालक का काम करता है।

पूजा के लिए अलग अलग आसन
बाजार में आपको कई तरह के आसन मिलेंगे लेकिन घर में हमेशा कंबल या ऊनी आसन पर बैठकर ही पूजा करना चाहिए। इस तरह के आसन पर बैठकर मंत्रों का उच्चारण करना भी शुभ होता है।
लाल आसन पर बैठकर करें इन देवी देवताओं की पूजा
लाल रंग के आसन पर बैठकर माता लक्ष्मी, पवन पुत्र हनुमान और देवी दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। कहते हैं इस रंग के आसन पर बैठकर इन देवी देवताओं की पूजा से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
कुशा का आसन
मंत्रो का जाप करने के लिए आप कुशा के आसन का ही इस्तेमाल करें। इससे आपका मन एकाग्र रहेगा और आपको मानसिक शांति की भी अनुभूति होगी। कहते हैं इस आसन पर बैठकर मंत्र जाप करने से मंत्र बहुत जल्दी सिद्ध होते हैं।
गुजरा का आसन
श्राद्ध कर्म में गुजरा का आसन इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह की पूजा के लिए यह आसन श्रेष्ठ माना जाता है। भूलकर भी श्राद्ध कर्म में कुशा के आसन का प्रयोग न करें।

इन नियमों का करें पालन
पूजा के आसन से जुड़े कुछ जरूरी नियम होते हैं जिनका हमें पालन करना चाहिए।
1. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस आसन पर बैठकर आप पूजा यह मंत्रों का जाप करते हैं उस आसन का प्रयोग किसी दूसरे को नहीं करना चाहिए।
2. पूजा खत्म होने के बाद आसन को इधर-उधर न रखें बल्कि उसे साफ-सुथरे हाथों से स्वच्छ स्थान पर ही रखें।
3.आसन को हमेशा सही तरीके से उठाना चाहिए और उचित स्थान पर ही रखना चाहिए।
4.जिस आसन पर बैठकर आप रोजाना पूजा या मंत्रों का जाप करते हैं उसका इस्तेमाल आप किसी दूसरे कार्य के लिए न करें जैसे भोजन आदि।
5. पूजा करने के बाद ऐसे ही कभी भी आसन को नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि आचमन से थोड़ा जल धरती पर अर्पित कर ईश्वर को प्रणाम करने के बाद ही आसन से उठना चाहिए।



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