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Surya Grahan 2026: कब लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? नोट करें सूतक काल और भारत में दिखने का समय
Surya Grahan 2026 Date: खगोल विज्ञान और ज्योतिष प्रेमियों के लिए साल 2026 एक ऐतिहासिक साल होने जा रहा है। अब तक साल के दो ग्रहण लग चुके हैं और अब आने वाले दिनों में दो ग्रहण एक चंद्र ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। लोगों में ये जानने की जिज्ञासा है कि कब लगने वाला है साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? जल्द ही दुनिया एक दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय घटना की गवाह बनेगी, जिसे 'सदी का दूसरा सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण' (Total Solar Eclipse) कहा जा रहा है। इस दिन चंद्रमा, सूर्य को इस तरह पूरी तरह ढंक लेगा कि दिन के समय भी धरती पर रात जैसा अंधेरा छा जाएगा।
खगोलविदों के अनुसार, 21वीं सदी के सबसे भव्य दृश्यों में से एक होने के कारण इसे 'द ग्रेट यूरोपियन एक्लिप्स' भी कहा जा रहा है। इसी बीच भारत में ग्रहण और सूतक काल को लेकर हमेशा से गहरी आस्था और कई सवाल रहे हैं। क्या लगने वाला यह विशाल ग्रहण भारत में दिखाई देगा? क्या इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और सूतक के कड़े नियम लागू होंगे?

अक्सर लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि विदेशी धरती पर दिखने वाले ग्रहण का प्रभाव भारत पर क्या पड़ेगा। आज के इस विशेष लेख में हम आपको 2026 के इस सबसे बड़े सूर्य ग्रहण की सटीक तारीख, समय, दृश्यता और सूतक काल से जुड़ी हर बारीक जानकारी देंगे।
कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?
ज्योतिषीय गणना और वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, साल का दूसरा सूर्य ग्रहण इस सदी का सबसे लंबा ग्रहण होने वाला है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) रात के समय घटित होगा। ग्रहण का प्रारंभ (स्पर्श) 12 अगस्त 2026, रात 09:04 बजे होगा। ग्रहण का मध्य (परमग्रास) रात 11:26 बजे होगा और ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष) 13 अगस्त 2026, रात 01:28 बजे होगा। ऐसे में सूर्य ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट होगी।
क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
यह सवाल हर भारतीय के मन में है कि 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं? वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को जब यह ग्रहण अपने चरम पर होगा, तब भारत में रात का समय होगा। क्योंकि भारत में उस समय सूर्य अस्त हो चुका होगा, इसलिए यह अद्भुत नजारा भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत के किसी भी हिस्से में आंशिक प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।
साफ शब्दों में कहें तो 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और ऐसे में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर और उत्तरी स्पेन में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।
सूतक काल: क्या भारत में लागू होंगे नियम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब ग्रहण नग्न आंखों से उस स्थान पर दिखाई दे। शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। क्योंकि यह ग्रहण भारत में अदृश्य है, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। आप सामान्य रूप से पूजा-पाठ, भोजन और अपने दैनिक कार्य कर सकते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं किए जाएंगे।
ग्रहण के दौरान सावधानियां
भले ही यह भारत में न दिखे, लेकिन जो लोग विदेशों में इसे देखेंगे, उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:
नग्न आंखों से न देखें: पूर्ण सूर्य ग्रहण को कभी भी बिना विशेष 'सोलर फिल्टर' वाले चश्मों के न देखें, इससे आंखों की रोशनी जा सकती है।
गर्भवती महिलाएं: भारत में नियम लागू नहीं हैं, लेकिन ज्योतिष में आस्था रखने वाली गर्भवती महिलाएं मानसिक शांति के लिए इस दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप कर सकती हैं।
वैज्ञानिक उपकरण: इसे देखने के लिए टेलीस्कोप या बाइनोक्युलर्स का प्रयोग तभी करें जब उनमें उचित फिल्टर लगे हों।
क्यों खास है यह ग्रहण?
यह ग्रहण इसलिए भी दुर्लभ है क्योंकि इसका 'टोटलिटी पाथ' (Path of Totality) स्पेन और यूरोप के प्रमुख पर्यटन स्थलों से होकर गुजरेगा। 21वीं सदी में ऐसा बहुत कम होता है जब एक पूर्ण सूर्य ग्रहण इतने सुलभ और विकसित देशों के ऊपर से गुजरे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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