Latest Updates
-
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम -
Corona Alert: फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश में 2 मौतें, 4 नए केस से बढ़ी चिंता -
बारिश में बनाएं क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े और हरे धनिए-पुदीने की चटनी, नोट कर लें आसान रेसिपी -
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय -
इस कथा के बिना अधूरा है योगिनी एकादशी व्रत, मिलता है 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य -
Yogini Ekadashi 2026 Wishes: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें शुभकामनाएं -
बारिश का पानी स्किन के लिए अच्छा या खराब, जानें मानसून में इसके फायदे और नुकसान -
AC कोच बना 'हनीमून सुइट', फूलों-गुब्बारों से सजाया ट्रेन का डिब्बा, वायरल हुआ वीडियो, जानें रेवले के नियम
धनतेरस कब है, 18 या 19 अक्टूबर? जान लें सही डेट, खरीदारी के शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Dhanteras 2025 Date: हिंदू धर्म में धनतेरस पर्व का खास महत्व है। पांच दिनों तक चलने वाला दीपावली का पर्व धनतेरस से शुरू होता है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवों के वैद्य भगवान धन्वंतरि की प्राकट्य दिवस होता है, इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर और यम देवता की पूजा की जाती है। यह दिन धन, समृद्धि और स्वास्थ्य की देवी-देवताओं की आराधना का प्रतीक है। इस दिन सोना-चांदी, नए बर्तन, गाड़ी, मकान और अन्य चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन त्रयोदशी तिथि दो दिन (18 और 19 अक्टूबर) की होने के कारण धनतेरस की सही तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए, इस लेख में जानते हैं धनतेरस की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में -
धनतेरस कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर (शनिवार) को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में, धनतेरस का पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:16 से रात 8:20 बजे तक (18 अक्टूबर)
प्रदोष काल: शाम 5:48 से रात 8:20 बजे तक (18 अक्टूबर)
वृषभ काल: शाम 7:16 से रात 9:11 बजे तक (18 अक्टूबर)
धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त
सुबह 7:50 से 10:00 बजे तक (वृश्चिक लग्न)
दोपहर 2:00 से 3:30 बजे तक (कुंभ लग्न)
शाम 6:36 से रात 8:32 बजे तक (प्रदोष काल)
धनतेरस की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से दीर्घायु और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
एक और कथा के अनुसार, राजा हिम की पुत्रवधू ने अपने पति की मृत्यु को टालने के लिए सोना-चांदी के दीप जलाए थे। उस रात यमराज सांप के रूप में आए, लेकिन दीपों की रौशनी और चमक से वे लौट गए। तभी से यह परंपरा चली कि धनतेरस की रात घर के बाहर दीप जलाने से मृत्यु के भय का नाश होता है और परिवार में सुख-शांति आती है।
धनतेरस पर पूजन विधि
सबसे पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें और दीपक जलाएं।
भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें।
रोली, अक्षत, फूल, दीपक, मिठाई और फलों से पूजा करें।
शाम के समय यमदीप जलाकर घर के मुख्य द्वार पर रखें, इसे दक्षिण दिशा में जलाना शुभ माना गया है।
इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या झाड़ू खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



Click it and Unblock the Notifications