रक्षाबंधन के कितने दिन बाद उतारनी चाहिए राखी? जानें उसमें कितनी गांठ लगानी चाहिए

Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके लंबे जीवन और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देता है। लेकिन एक सवाल अक्सर सबके मन में आता है राखी आखिर कब उतारनी चाहिए? क्या इसे तुरंत उतारना सही है या कुछ दिन पहनना शुभ माना जाता है? और राखी में कितनी गांठ लगानी चाहिए, क्या इसका भी कोई खास महत्व है?

दरअसल कई लोग ऐसे होते हैं जो अपनी कलाई पर पूरे साल राखी रखते हैं, उन्हें लगता है कि ये उनका अपनी बहन के प्रति प्यार है। मगर शास्त्र कुछ और ही कहते हैं। आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन के कितने दिन बाद उतारनी चाहिए राखी और क्यों। साथ ही ये भी कि राखी में कितनी गांठ लगानी चाहिए और हर गांठ का क्या मतलब होता है।

When to Remove Rakhi After Raksha Bandhan

कब है रक्षाबंधन?

इस साल 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन का त्योहार है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी आयु के लिए और उनकी उन्नति के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। इस दिन अच्छी बात ये है कि कोई भद्रा का काल भी नहीं है। ऐसे में आप सुबह 5 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट कर बिना किसी संकट के राखी बांध सकते हैं।

कब तक कलाई में बांधे राखी?

कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि राखी हाथ में कितने समय तक बांधनी चाहिए। पौराणिक कथा के हिसाब से लक्ष्मी जी ने बाली को राखी बांधी थी। हिंदू धर्म में राखी बांधने और उतारने से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। मान्यता है कि राखी केवल सजावट का धागा नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है, जिसे बांधने के बाद कुछ समय तक कलाई पर रखना शुभ होता है। शास्त्रों के अनुसार, कम से कम 24 घंटे और ज्यादा से ज्यादा 15 दिन तक कलाई पर राखी बांधनी चाहिए। उसके पीछे का कारण ये है कि जब हम कलावा या राखी सूत्र बांधते हैं को उसके 5 दिन तक उसमें ऊर्जा बढ़ती रहती है और 11 वें दिन तक उसमें पॉजिटिव एनर्जी रहती है। ऐसे में 15 दिन से पहले राखी उतार दें और उसे जल में प्रवाहित कर दें वरना उसका दोष लगता है।

राखी में कितनी गांठ लगानी चाहिए?

परंपरा के अनुसार राखी में 4 गांठ लगाना शुभ माना जाता है। पहली गांठ भाई की लंबी उम्र के लिए बांधी जाती है। दूसरी गांठ बहन की लंबी उम्र के लिए बांधी जाती है। तीसरी गांठ भाई और बहन के बीच के प्रेम को बनाए रखने के लिए बांधी जाती है।

और चौथी गांठ हमेशा अपने इष्ट देव के नाम पर बांधी जाती है और प्रार्थना की जाती है कि मेरे भाई की हमेशा रक्षा करना उसकी मनोकामना पूरी करना। उसके साथ कभी भी कोई गलत काम न हो। इन सभी प्रार्थनाओं के साथ भाई को सुरक्षित करने का सुरक्षा कवच बांधा जाता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

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