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क्यों लगता है सूर्य ग्रहण? भारत में दिखेगा या नहीं! यहां जानें Solar Eclipse से जुड़ी सारी बातें और मान्यताएं
Solar Eclipse 2025: आज यानी 21 सितंबर 2025, दिन रविवार सर्वपितृ अमावस्या वाले दिन साल का आखिरी और सबसे लंबा सूर्य ग्रहण लगने वाला है। हिंदू धर्म में किसी भी ग्रहण फिर चाहे वो सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व होता है। इस दौरान कई तरह के नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है और कुछ काम न करने के लिए कहा जाता है।
आज जो सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है उसके बारे में हर कोई जानना चाहता है कि ये भारत में दिखेगा या नहीं, क्या होता है सूर्य ग्रहण और कहां-कहां दिखेगा साथ ही इस दौरान क्या करें या क्या न करें खासतौर पर गर्भवती महिलाएं क्या करें क्या न करें? ऐसे कई सवालों के जवाब हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़ी सारी बातें।

क्या होता है सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को रोक देता है। इस दौरान धरती के कुछ हिस्सों में अंधकार छा जाता है और यह दृश्य बेहद खास माना जाता है। इस स्थिति में सूर्य पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है। जब सूरज पूरी तरह ढक जाए तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण और जब कुछ हिस्सा ढके तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण?
अब लोगों के मन में सवाल है कि आज लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं? दरअसल, आज का सूर्य ग्रहण 21 सितंबर की रात को 10 बजकर 59 मिनट पर लगेगा और 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में रात को लग रहे सूर्य ग्रहण का भारत में कोई असर नहीं होगा। वो न तो पूर्ण रूप से न आंशिक रूप भारत में दिखाई नहीं देगा। न ही इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा।

कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
भारत में आज लगने वाला सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा तो वो कहां दिखाई देगा? बता दें कि आज का ग्रहण आंशिक रूप से भी भारत में दिखाई नहीं देगा। आज का ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, न्यूजीलैंड, समोआ, फिजी और अटलांटिक में दिखेगा। वो इसलिए क्योंकि रात को जहां सूर्य निकलता है वो वहीं दिखने वाला है।
सूतक काल कब से मान्य होता है?
अब ये भी जान लेते हैं कि ग्रहण से पहले लगने वाला सूतक काल कितने घंटे पहले से मान्य होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल 12 घंटे पहले से ही लग जाता है, लेकिन 9 घंटे बाद से पूर्ण रूप से मान्य हो जाता है। इस दौरान शुभ कार्य करने की मनाही होती है और पूजा-पाठ नहीं किया जाता। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। लोगों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।
सूर्य ग्रहण के दौरान और बाद में क्या करें?
- पूजा-पाठ और शुभ कार्य न करें।
- सूर्य ग्रहण के दौरान राशि अनुसार मंत्र जाप करें।
- सूर्य ग्रहण के दौरान खाना-पीना न खाएं।
- सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें।
-सूर्य ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता और कुशा डालें।
-सूर्य ग्रहण के बाद स्नान करें।
-सूर्य ग्रहण के बाद दान की चीजें निकालें और अगले दिन दान करें।
- सूर्य ग्रहण के बाद शुद्धिकरण कर खाना खाएं और पानी पिएं।
गर्भवती महिलाएं सूर्य ग्रहण के दौरान और बाद क्या करें?
- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं कोई सिलाई-कटाई का काम न करें।
- सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं किचन में कटिंग आदि का काम न करें।
- सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं कुछ खाना न खाएं और पानी न पिएं।
- सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं मंत्रों का जाप करें।
- सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न जाएं।
- सूर्य ग्रहण के बाद गर्भवती महिलाएं स्नान करें और बाल धोएं।
- सूर्य ग्रहण के बाद गर्भवती महिलाएं ताजा खाना खाएं और पानी पिएं।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्यों लगती हैं इतनी पाबंदियां?
ऐसा विश्वास है कि सूर्य ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए खाना बनाना, सोना और शुभ काम करना मना होता है। यही वजह है कि ग्रहण के समय खाने-पीने की चीजों में तुलसी पत्ता या कुश डालने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके शुद्धि करना भी आवश्यक माना गया है।
वैज्ञानिकों की नजर में सूर्य ग्रहण रहस्य?
धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण के दौरान कई चीजों की मनाही होती है। वहीं वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। इसका कोई धार्मिक या नकारात्मक प्रभाव नहीं होता, बल्कि यह ब्रह्मांड की अद्भुत घटनाओं में से एक है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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