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महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या के क्या कारण हैं?
बाल झड़ने की समस्या से केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी परेशान रहती हैं। जहाँ पुरुषों में विभिन्न तरीकों से बाल गिरते हैं वहीं महिलाओं में बालों का घनापन कम होता जाता है, बालों को विभाजित करने वाली रेखा की चौडाई बढ़ती जाती है या गंजापन बढ़ने लगता है।
बालों के झड़ने का सही कारण जानना बहुत आवश्यक है ताकि उसका सही उपचार किया जा सके। समस्या की गंभीरता के आधार पर उचित हल निकाला जा सकता है। यहाँ हमने महिलाओं में बाल झड़ने के 10 कारण बताए हैं। किचन में छुपा है बालों की खूबसूरती का राज

बालों से संबंधित बुरी आदतें:
बालों की स्टाइल बनाने के लिए विभिन्न उपकरणों जैसे स्ट्रेटनर्स और कार्लिंग आयरन का अत्यधिक उपयोग या बालों के विभिन्न उत्पाद जैसे जेल, मूस, स्प्रे, कलर आदि का अधिक उपयोग भी बालों के शाफ़्ट को नुकसान पहुंचा सकता है या अधिक समय तक इसका उपयोग बालों के विकास को प्रभावित कर सकता है। कसी हुई पोनीटेल, गलत तरीके से कंघी करना, बालों को बांटना इस समस्या को अधिक बढ़ा सकता है।

पी सी ओ एस :
इस स्थिति में पुरुष हार्मोंस या एंड्रोजन अतिरिक्त मात्रा में स्त्रावित होते हैं तथा वे अंडाशय में छोटी तरल थैलियों जैसी संरचना बनाते हैं जिसे सिस्ट कहा जाता है। यह आपके शरीर में हार्मोंस के असंतुलन के कारण होता है जो आपके बालों के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसमें जहाँ एक ओर आप देखेंगे कि आपके शरीर पर बाल बढ़ रहे हैं वहीं आपके सिर से बाल कम होते जाते हैं।

एनीमिया :
आपके आहार में लोह तत्व की कमी के कारण एनीमिया होता है। बहुत सी महिलाएं मासिक धर्म में अधिक रक्तस्त्राव या शरीर में उचित मात्रा में फोलिक एसिड न होने के कारण एनीमिया की शिकार हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप हीमोग्लोबिन का उत्पादन कम होता है जिसके कारण आपके अंगों को ऑक्सीजन कम मिलती है। जब ऑक्सीजन आपके बालों के रोम छिद्रों तक नहीं पहुँच पाती तो वे कमज़ोर हो जाते हैं और आसानी से टूट जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप बाल गिरने लगते हैं।

मेनोपॉज़ :
जब कोई महिला मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) की उम्र में पहुँचती है तो उसके शरीर में कई परिवर्तन होते हैं जिनमें से के बालों का गिरना भी है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। इसके कारण बाल रूखे हो जाते हैं और यदि उनकी ठीक से देखभाल न की जाए तो वे गिरने लगते हैं। अत: सौम्य शैम्पू का उपयोग करें तथा उन्हें कंडीशन करें और उचित आहार लें।

लेबर (प्रसव) :
बहुत सी महिलाओं को डिलीवरी (प्रसव) के बाद बाल झड़ने की समस्या से जूझना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन का स्त्राव बहुत अधिक होता है जिसके कारण सिर के बाल बहुत बढ़ते हैं। परंतु बच्चे का जन्म हो जाने के बाद हार्मोंस अपने सामान्य स्तर पर आ जाते हैं जिसके कारण बाल झड़ने लगते हैं। परंतु यह एक अस्थायी अवस्था होती है तथा बालों का विकास कुछ सप्ताह बाद अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है।

प्रोटीन की कमी
: हमारे बाल केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं। जब हम प्रोटीन युक्त आहार नहीं लेते हैं तो यह कमी हमारे शरीर से पूरी की जाती है जिसके कारण बाल कमज़ोर हो जाते हैं। बाल कमज़ोर होने के कारण समय से पहले गिरने लगते हैं। (पढ़ें : बालों को झड़ने से रोकने के लिए इन 5 वेजीटेबल पैक का उपयोग करें)

औषधियाँ :
वे महिलाएं जो जन्म नियंत्रण करने वाली दवाईयों का सेवन करती हैं वे यदि अचानक इनका उपयोग करना बंद दे तो उन्हें बाल गिरने जैसे दुष्परिणामों से जूझना पड़ सकता है। कीमोथेरिपी के कारण भी बाल गिर सकते हैं।

वज़न बहुत अधिक कम होना :
बहुत कड़ी डाइटिंग और अचानक या बहुत जल्दी बहुत कम वज़न कम होना बालों के विकास को प्रभावित कर सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डाइटिंग के कारण आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते या कुछ खाद्य पदार्थ न खाने से आपके बालों के विकास पर प्रभाव पड़ता है।

बीमारियाँ जैसे थायराइड, ऑटोइम्यून बीमारियाँ :
ऑटोइम्यून बीमारियों में हमारा शरीर ही हमारे शरीर की कोशिकाओं और उतकों के विरुद्ध ही एंटीबॉडीज़ बनाने लगता है। ये बालों पर तथा शरीर के अन्य अंगों पर भी हमला करते हैं जिसके परिणामस्वरूप बाल झड सकते हैं।

कोई गंभीर बीमारी :
विभिन्न बीमारियाँ जैसे सोरेसिस, डाईबिटीज़ (मधुमेह) भी बालों के झड़ने का एक कारण हो सकते हैं। डाईबिटीज़ शरीर के परिसंचरण तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसका अर्थ यह है कि शरीर के सबसे निचले अंगों जैसे पैर के तलुओं और सिर की त्वचा को पोषक तत्व और ऑक्सीजन कम मात्रा में मिलते हैं। यदि डाईबिटीज़ के कारण सिर की त्वचा में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है तो बालों के फॉसिल्स मृत हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप बाल झड़ने लगते हैं। सोरेसिस त्वचा की एक बीमारी है जो सिर की त्वचा और बालों के फॉसिल्स को भी प्रभावित करती है।



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