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क्या सनस्क्रीन लगानी चाहिये?
गर्मी के दिनों में यदि अपनी त्वचा को सुरक्षित रखना हो तो सनस्क्रीन लगाने की हिदायत दी जाती है। लेकिन कई रिसर्च सनस्क्रीन को स्वास्थ्य के प्रति अच्छा नहीं मानती है। जैसा की हम जानते हैं कि हर चीज का गुण और दोष होता है उसी तरह से सनस्क्रीन भी इससे बच नहीं पाई है।
ऐसी सनस्क्रीन जो एसपीएफ 30 के नीचे होती है वह अच्छी नहीं मानी जाती यहां तक की सर्दियों में भी वह कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाती। लेकिन फिर भी महिलाओं को इस रेंज की ही सनस्क्रीन लगाने की हिदायत दी जाती है। सनस्क्रीन खरीदते वक्त आपको हमेंशा सावधान रहना चाहिये क्योंकि हो सकता है कि आपकी स्किन संवेदनशील हो और वह आपको सूट ना करे। सनस्क्रीन में कई प्रकार के रसायन मिलाए जाते हैं जो कि सूरज की किरणों से त्वचा की सुरक्षा करते हैं। पर इसमें मिले रसायन की वजह से आपकी त्वचा रूखी और खराब तक हो सकती है।
हां, पर हर्बल और प्राकृतिक रूप से बनी हुई सनस्क्रीन इस्तमाल करने से कुछ नहीं होता। इनमें ज्यादा कैमिकल नहीं मिला होता है। आपने सुना होगा कि तेज धूप के समक्ष आने पर स्किन कैंसर होने की संभावना होती है, लेकिन सनस्क्रीन लगा लेने से भी कोई खास बचाव नहीं होता।
आप सोंच रही होगी कि हम आपको केवल सनस्क्रीन की खराबी के बारे में ही क्यों बता रहें हैं, तो ऐसी बात नहीं है। सनस्क्रीन लगाने से कैंसर पैदा करने वाली किरणों से थोडा़ बचाव भी होता है। इसे लगाने से त्वचा काली नहीं पड़ती और यदि आपको सूरज की धूप से एलर्जी है तो सनस्क्रीन जरुर लगाएं। यहां पर कई ऐसे कारण दिये हुए हैं जिनको आपके लिये जानना जरुरी है।

सन टैनिंग से बचाए
यदि आप सनस्क्रीन को लगाएंगी तो आपकी त्वचा बिल्कुल भी काली नहीं पडे़गी।

त्वचा की खराबी
इसमें मौजूद हानिकारक रसायन त्वचा को संभावित नुकसान पहुंचाते हैं जिससे त्वचा रूखी और बेजान सी लगने लगती है।

स्किन कैंसर
हर सनस्क्रीन के पीछे UVA किरणों के बजाए केवल UVB किरणों से सुरक्षा प्रदान करने की बात लिखी जाती है, जो कि सबसे ज्यादा खतरनाक किरणे मानी जाती हैं।

हार्मोन्स प्रभावी होना
सनस्क्रीन को हमेशा लगाना सही नहीं है क्योंकि इसमें मौजूद कैमिकल त्वचा के भीतर जा कर खून की धारा में मिक्स हो जाते हैं जो कि हार्मोनल फंक्शन को प्रभावित करता है। इससे कई तरह की बीमारियां जैसे, त्वचा पर चकत्ते, एलर्जी और एल्जाइमर की बीमारी हो सकती है।

विटामिन डी
यह विटामिन हमारे शरीर में प्राकृतिक तौर पर उत्पादित होता है। तो जब आप सनस्क्रीन लगाती हैं तब आपकी त्वचा सूरज से सीधा संपर्क नहीं बना पाती और वह संश्लेषण करने में असमर्थ हो जती है।



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