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क्या है उर्फी जावेद का पसीना रोकने वाला खास ट्रीटमेंट और कैसे काम करता है?
What is Underarms Botox : टीवी एक्ट्रेस और फैशन इंफ्लुएंसर उर्फी जावेद अपने अतरंगी फैशन, बयानों और अनोखे अंदाज़ के कारण अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया तक, उर्फी का हर कदम चर्चा का विषय बन जाता है।
हाल ही में उन्होंने अपने अंडर आर्म्स को लेकर एक ऐसा खुलासा किया जिसने सभी को चौंका दिया। उर्फी ने बताया कि उनकी बगलों से पसीने की बदबू नहीं आती और इसका श्रेय वे एक खास कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट को देती हैं।

क्या है उर्फी का पसीना रोकने वाला ट्रीटमेंट?
उर्फी ने मैशेबल इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे बोटॉक्स ट्रीटमेंट लेती हैं, जिससे उनकी बगल में पसीना आना लगभग बंद हो जाता है। पसीना न आने का मतलब है कि बदबू की समस्या भी नहीं रहती। यह सुनकर कई लोग हैरान रह गए क्योंकि बोटॉक्स का नाम आमतौर पर चेहरे की झुर्रियां कम करने के लिए लिया जाता है।
लेकिन असल में, चिकित्सा जगत में बोटॉक्स का उपयोग एक खास स्थिति के इलाज में भी किया जाता है जिसे एक्सिलरी हाइपरहाइड्रोसिस (Axillary Hyperhidrosis) कहते हैं। यह ऐसी अवस्था है जिसमें बगलों में अत्यधिक पसीना आता है, भले ही मौसम ठंडा हो या शरीर आराम की स्थिति में हो।
बोटॉक्स कैसे करता है काम?
बोटॉक्स पसीने की गंध को सीधे तौर पर नहीं बदलता, बल्कि पसीने की मात्रा कम करता है। जब पसीना कम होगा, तो बैक्टीरिया का रिएक्शन भी कम होगा और बदबू स्वाभाविक रूप से घट जाएगी।
बोटॉक्स दरअसल क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया से बनने वाला एक शुद्ध प्रोटीन है। इसे बहुत कम मात्रा में बगल की त्वचा में इंजेक्ट किया जाता है। यह इंजेक्शन उन तंत्रिका संकेतों को अस्थायी रूप से रोक देता है जो पसीने की ग्रंथियों को सक्रिय करते हैं। नतीजा यह होता है कि कई महीनों तक पसीना आना काफी हद तक रुक जाता है।
लोग बोटॉक्स क्यों करवाते हैं?
कुछ लोगों के लिए बगल में पसीना आना केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक समस्या होती है।
- कपड़ों पर पसीने के दाग
- लगातार बदबू की परेशानी
- भीड़ में असहज महसूस करना
- मीटिंग या पब्लिक अपीयरेंस में शर्मिंदगी
ऐसे मामलों में बोटॉक्स एक तेज़, प्रभावी और न्यूनतम आक्रामक (minimally invasive) समाधान बन जाता है।
कितना रहता है असर?
विशेषज्ञ बताते हैं कि बोटॉक्स का असर औसतन 6-8 महीने तक रह सकता है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर दोबारा इंजेक्शन लगवाया जा सकता है। हालांकि, यह एक अस्थायी इलाज है और इसे बार-बार करवाना पड़ता है।
क्या है खतरे और सावधानियां?
- इंजेक्शन लगवाने के बाद हल्की सूजन या दर्द हो सकता है
- बहुत दुर्लभ मामलों में मांसपेशियों की कमजोरी
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे टालना चाहिए!



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