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सुंदर दिखने के लिए महिलाएं करती थी ये अजीबो-गरीब काम, देख हैरान रह जाएंगे आप

दुनिया की हर महिला सुंदर दिखना चाहती है। महिलाओं का मानना है कि उनमें प्राइड और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के लिए उनके शारीरिक बनावट का खूबसूरत होना बहुत जरुरी है। जिसके लिए वो अक्सर अपने साथ कुछ न कुछ एक्सपेरिमेंट करती रहती हैं। चाहे वो करने में उन्हें कितनी ही तकलीफ क्यों न हो, लेकिन सुंदर दिखने के लिए वो हर तरह का दर्द झेल जाती हैं। पूराने समय में महिलाएं अपने साथ ऐसे कई प्रयास किए ही जिसके कारण वो खूबसूरत दिख सकें। भले ही वो तरीके बहुत अजीबो-गरीब थे, लेकिन फिर भी वो उन तरीकों को आजमाती थी। इतिहास में अजीब आविष्कारों और तकनीकों की एक श्रृंखला बनाने की कोशिश की गई है। जिसका उद्देश्य महिलाओं की स्थिति में सुधार करना था, लेकिन उनमें से कई आविष्कार अब बस इतिहास बनकर रह गए हैं।

1. 10वीं शताब्दी में चीन की परंपरा - फुट बाइंडिंग
फुट बाइंडिंग 10वीं सदी में चीन में एक फैशन की परंपरा थी। 10वीं से 20वीं सदी तक, इसे इतिहास के सबसे खतरनाक फैशन ट्रेंड में से एक माना जाता है। छोटे, घुमावदार पैर चीन की संस्कृति में महिलाओं के लिए सुंदरता का प्रतीक माना जाता था। फुट बाइंडिंग की इस परंपरा को हर महिला अपनाती थी। इस परंपरा के कारण महिलाओं को कई तरह की चिकित्सा समस्याएं भी हुईं। यहां तक की कई केस में महिलाओं की मौत भी हो गई।

2. फुल फेस स्विमिंग मास्क
आज भी महिलाएं अपने चेहरे को धूप से बचाने के लिए सन क्रीम, या किसी कपड़े से अपने चेहेर को ढक कर धूप से बचाने की कोशिश करती हैं। 1920 के दशक में भी महिलाएं अपने चेहरे को धूप से बचाने के लिए एक फुल-फेस स्विमिंग मास्क का इस्तेमाल करती थी।

3. जापान में काले दांत
जापान में काले दांत होना मतलब महिला का सुंदर होना माना जाता था। तीसरी और छठी शताब्दी के बीच कोफुन काल के दौरान जापान में महिलाओं के काले दांतों देखे जा सकते हैं। लेकिन काले दांते के पीछे और भी कई प्रथाएं थी। जैसे महिला की शादी हुई है या नहीं। इसे दांतों की सड़न को रोकने का एक तरीका भी माना जाता था। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि काले दांत विवाहित महिलाओं को अनाकर्षक बनाने का एक तरीका था।

4. 1940 की सदी में पोर्टेबल हेयर ड्रायर
आज के समय में महिलाओं के जीवन में हेयर स्ट्रेटनर, हेयर ड्रायर के बिना अधूरी है। लेकिन इन सबकी शुरूआत सालों पहले हो चुकी थी। 1940 के दशक में कठोर-हुड हेयर ड्रायर की शुरुआत हुई थी। इसमें एक सख्त प्लास्टिक का हेलमेट था जो व्यक्ति के सिर के चारों ओर लपेटा जाता था। जिससे महिलाओं के बाल जल्दी सुख जाते थे।

5. 1936 में डिंपल मेकर मशीन का आविष्कार
गालों पर डिम्पल आना अक्सर ही सुंदरता से जोड़ा जाता है। डिम्पल से किसी भी व्यक्ति का चेहरा काफी आकर्षित लगता है। ये आपके चेहरे की मुस्कान को और ज्यादा प्रभावी बनाता है। साल 1936 में, इसाबेला गिल्बर्ट ने डिंपल मेकर मशीन का आविष्कार किया। इसकी मदद से गालों पर डेंट किया जाता था। जिससे डिम्पल बन जाते थे। लेकिन इससे लोगों को कई स्वास्थ संबंधी समस्याएं भी हो जाती थी। अब वर्तमान में कई लोग डिम्पल चिक्स पाने के लिए सर्जरी भी करवाते हैं।

6. 1920- झुर्रियों के लिए रबर ब्यूटी मास्क
कोई भी महिला कभी बुढ़ी नहीं होना चाहती। वो लंबे समय तक अपनी सुंदरता बनाए रखना चाहती है। जिसके लिए वो कई तरह के उपाय भी करती है। इसी तरह 1920 के दशक में महिलाओं को झुर्रियों से छुटकारा देने के लिए रबर ब्यूटी मास्क बनाया गया। जिसका इस्तेमाल महिलाएं झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए करती थी।

7. यूरोप में ऊंचे एड़ी के जूते का फैशन
15वीं और 16वीं शताब्दी में इटली की हाई क्लस की महिलाओं ने खुद को औरो से अलग दिखाने के लिए बहुत ऊंटे जूते पहनें शुरू किए। जिसे चोपाइन कहा जाता है। इन ऊंचे जुटों को लेकर एक और मान्यता है कि अमीरों के कपड़े शहर की गंदी सड़कों से गंदे न हो जाए, इसके लिए वो इतने ऊंचे जुटे पहनती थी। चॉपिन्स का फैशन वेनिस से शुरू होकर फ्रांस और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में फैल गया।

8. चर्बी से चिपकाया हुआ भारी विग
18वीं शताब्दी में फ्रांस में सुंदर दिखने के लिए लड़कियों को बड़े विग पहनने पड़ते थे। इस विग को सभी तरह के फूलों, गहनों, रिबन से सजाया जाता था। इस विग को कुशल करीगरों ने जानवरों की चर्बी का उपयोग करके असली बालों के साथ जोड़ा था।

9. फ्रीकल्स प्रूफ कैप
1940 के दशक तक सन-स्क्रीन क्रीम का आविष्कार नहीं हुआ था। इस समय महिलाएं खुद को धूप से बचाने के लिए इस तरह के फ्रीकल्स प्रूफ कैप जैसे कपड़े पहनती थी। इन कैप में सनग्लासेस भी लगे होते थे।

10. द्वितीय विश्व युद्ध- इलुजन ऑफ स्टॉकिंग्स
1940 में नायलॉन स्टॉकिंग्स का फैशन महिलाओं में काफी फेमस हो गया था। इस दौरान 1941 में, जब संयुक्त राज्य अमेरिका में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हो गया। जिसके कारण नए सिंथेटिक फाइबर का उत्पादन होना बंद हो गया। जिसके बाद महिलाओं ने अपने पैरों में इस तरह टैटू बनवाएं कि उसे देखकर लगे की महिलाओं ने स्टॉकिंग्स पहनी है।



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