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कौन थे जसवंत सिंह खालरा, जिन पर बनी है दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘Satluj'; रिलीज के 2 दिन बाद क्यों हटाई गई?
Who Was Jaswant Singh Khalra: पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित इस फिल्म को 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन रिलीज के कुछ ही दिनों बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। जी5 इंडिया ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फिल्म फिलहाल अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेगी। गौरतलब है कि इस फिल्म का नाम पहले 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है। आइए, जानते हैं कि जसवंत सिंह खालरा कौन थे -

कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
जसवंत सिंह खालरा का जन्म 1952 में पंजाब के अमृतसर जिले के खालरा गांव में हुआ था। पेशे से बैंक कर्मचारी रहे खालरा बाद में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हो गए। 1980 और 1990 के दशक में पंजाब हिंसा, उग्रवाद और सुरक्षा अभियानों के दौर से गुजर रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसी घटनाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इसी दौरान कई परिवारों ने आरोप लगाए कि उनके परिजनों को पुलिस पूछताछ के लिए ले गई, लेकिन बाद में उनका कोई पता नहीं चला। लगातार सामने आ रही ऐसी शिकायतों ने खालरा को इन मामलों की जांच करने के लिए प्रेरित किया।
वो जांच जिसकी वजह से हुए थे मशहूर
लापता लोगों के मामलों की जांच करते हुए जसवंत सिंह खालरा विभिन्न श्मशान घाटों और सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंचे। पड़ताल के दौरान उन्हें ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें बड़ी संख्या में उन शवों का विवरण दर्ज था जिनका अंतिम संस्कार लावारिस के रूप में किया गया था। खालरा ने दावा किया था कि 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों लोग लापता हुए और उनमें से बड़ी संख्या में लोगों का अंतिम संस्कार बिना परिवारों को सूचना दिए कर दिया गया। उनका आरोप था कि कई मामलों में शवों को लावारिस बताकर जला दिया गया या फिर नदियों में बहा दिया गया। इन दावों ने पंजाब ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया। मानवाधिकार संगठनों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और जसवंत सिंह खालरा की पहचान एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में बनने लगी।
एक प्रेस नोट जिसने मचा दी थी हलचल
साल 1995 में जसवंत सिंह खालरा और उनके सहयोगियों ने एक प्रेस नोट जारी किया था, जिसमें कथित तौर पर उन मामलों का जिक्र किया गया था जहां पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों के शवों का अंतिम संस्कार लावारिस बताकर किया गया था। इस दस्तावेज में अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि एक दशक के दौरान बड़ी संख्या में शवों का इसी तरह अंतिम संस्कार हुआ। यह जानकारी सार्वजनिक होने के बाद मामला व्यापक चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन पर सवाल उठने लगे।
1995 में खुद लापता हो गए थे जसवंत सिंह खालरा
विडंबना यह रही कि जिन लोगों के गायब होने की जांच जसवंत सिंह खालरा कर रहे थे, कुछ समय बाद वह स्वयं भी रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए।
6 सितंबर 1995 को उन्हें आखिरी बार अमृतसर स्थित अपने घर के बाहर देखा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी उन्हें अपने साथ ले गए थे। इसके बाद उनका कोई सार्वजनिक पता नहीं चला। यह मामला तेजी से राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया और मानवाधिकार संगठनों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

CBI जांच में क्या सामने आया?
बाद में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। जांच और अदालत में पेश गवाहियों के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया कि जसवंत सिंह खालरा का अपहरण किया गया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। मामले में कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चला। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कुछ अधिकारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य दोषियों को भी जेल की सजा दी गई। इस फैसले को देश के चर्चित मानवाधिकार मामलों में से एक माना जाता है।
फिल्म का बदला गया नाम
जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित इस फिल्म का निर्माण कई वर्षों तक चर्चा में रहा। शुरुआत में इसका नाम 'पंजाब 95' रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया। फिल्म को थिएटर में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म को रिलीज करने से पहले 120 से ज्यादा कट लगाने का आदेश दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ किरदारों और स्थानों के नाम बदलने समेत कई संशोधन मांगे गए थे। इसी विवाद के चलते फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। हालांकि, फिल्म का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन हुआ और 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसका प्रीमियर भी किया गया, जहां इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

जी5 से क्यों हटाई गई सतलुज?
3 जुलाई को जी5 पर रिलीज होने के बाद फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर बहस शुरू हो गई। जी5 ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह फिल्म और उसके रचनात्मक दृष्टिकोण का समर्थन करता है तथा दर्शकों के प्यार और समर्थन के लिए आभारी है। प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए कानूनी विकल्पों पर काम करेगा।



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