Hariyali Amavasya 2026: क्यों मनाई जाती है हरियाली अमावस्या? जानें स्नान-दान का मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Hariyali Amavasya 2026: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों को तर्पण देने की परंपरा है। साथ ही, हरियाली अमावस्या पर पेड़-पौधे लगाने का भी विशेष महत्व माना जाता है। 12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगेगा, जो रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका अमावस्या पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आइए, जानते हैं हरियाली अमावस्या की तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में -

Hariyali Amavasya

हरियाली अमावस्या 2026 तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 1 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी। वहीं, इसका समापन रात 11 बजकर 7 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को ही मनाई जाएगी।

हरियाली अमावस्या 2026 पर स्नान और दान का मुहूर्त

अमावस्या के दिन शुभ मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान, पूजा और दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

हरियाली अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, हरियाली अमावस्या पर पितरों को तर्पण देना भी शुभ माना जाता है। इस दिन पेड़-पौधे लगाने से किशेष पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। अमावस्या के दिन पीपल और तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। साथ ही, इस दिन स्नान और दान करना भी शुभ माना जाता है।

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

हरियाली अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। अगर पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
अगर आप व्रत रख रहे हैं तो व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
इस दिन पीपल के पेड़ और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
साथ ही, पितरों के लिए तर्पण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करें।

Story first published: Wednesday, August 12, 2026, 9:00 [IST]
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