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कश्मीरी पश्मीना के नाम पर कहीं नकली शॉल तो नहीं खरीद ली, इन 5 तरीकों से असलियत जानें
How to Identify Pure Pashmina Shawls : कश्मीर न सिर्फ अपनी खूबसूरती के वजह से मशहूर बल्कि अपने नायाब हैंडलूम पश्मीना शॉल की वजह से भी जग मशहूर है। पश्मीना शॉल ने अपनी खूबसूरती के चलते पिछले कुछ समय में लोगों के बीच एक जगह बना ली है। इसकी लोकप्रियता के चलते लोग इसे स्टेट्स सिंबल के तौर पर पहनने लगे हैं।
पश्मीना के क्रेज को देखते हुए यही वजह है कि बाजार में पश्मीना की डिमांड को देखते हुए इसकी डुप्लीकेट कॉपीज भी धड़ल्ले से बिकती हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप असली और नकली पश्मीना में अंतर मालूम करके ठगी के शिकार होने से बच सकते हैं।

पश्मीना नाम कैसे पड़ा?
पश्मीना शब्द फारसी के पश्म शब्द से बना है, जिसका मतलब होता है ऊन (WooL)। पश्म का मतलब सिस्टमेटिक तरीके से ऊन की बुनाई भी बताया गया है। वैसे तो पश्मीना ऊन, कश्मीर की एक खास प्रजाति की पहाड़ी बकरी से निकाला जाता है, जिसे च्यांगरा या च्यांगरी (Chyangra) कहते हैं। स्थानीय लोग इसे चेगू भी कहते हैं। इन बकरियों की खासियत यह है कि ये हिमालय के पहाड़ों में 12000 फीट की ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री से ज्यादा तापमान में रहती हैं। खासकर, कश्मीर, लद्दाख, नेपाल, तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में पाई जाती हैं। कश्मीर में इन बकरियों को जो खानाबदोश पालते हैं, उन्हें चांगपा कहते हैं। कम से कम 3 भेड़ों की ऊन से एक पश्मीना शॉल बनती हैं।
आइए जानते हैं कैसे करें असली और नकली में अंतर
जीआई टैग से करें पहचान
पश्मीना शॉल की शुद्धता जांचने का तरीका है, जीआई टैग। क्योंकि इसकी नकल नहीं की जा सकती। इस पर दिए गए कोड नंबर के आधार पर आप आनलाइन संबंधित शाल और उसके बुनकर या विक्रेता के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अनियमित बुनाई
एक शुद्ध पश्मीना शॉल हथकरघे पर बुना जाता है। इसलिए इसकी बुनाई में सफाई नहीं होती है। अच्छी रोशनी के सामने रखने पर आप इसकी अनियमित बुनाई देखेंगे। यह सबसे सरल परीक्षणों में से एक है।
माइक्रान से पहचानें
असली पश्मीना शाल में ज्यादा चमक नहीं होती। अच्छे शाल का ग्रेड 14-15 माइक्रान होता है। अगर मोटाई 19 माइक्रान से ज्यादा है तो शाल घटिया और नकली हो सकता है। माइक्रान जितना कम होगा, शाल उतना नर्म, मुलायम व गर्म होगा।
गोंद परीक्षण
शुद्ध पश्मीना किसी भी प्रकार के गोंद को अधिक समय तक धारण नहीं कर सकता है। अगर कोई आपको असली पश्मीना के नाम से लेबल या टैग चिपका हुआ पश्मीना बेच रहा है, तो संभवतः वह नकली है।
धागे से जांचे
शाल के किनारे से एक धागा निकालें और उस धागे को माचिस की तीली से जलाएं। उसकी राख पाउडर जैसी हो और गंध जले बालों की गंध की तरह तो पश्मीना सही है। अगर राख की गांठ बनती है या प्लास्टिक जलने की बू आती है तो शाल में मिलावट है।
झूठ है पश्मीना को लेकर ये दावा
अक्सर लोग पश्मीना शॉल को लेकर दावा करते हैं कि अगर किसी अंगूठी से पश्मीना शॉल को डालकर आरपार निकाल लिया तो वो असली पश्मीना है। इसके अलावा कश्मीरी पश्मीना में अगर छेद हो जाए, तो इसके धागे अपने आप जुड़ जाते हैं और छेद गायब हो जाता है। जबकि इस तरह के दावे सिर्फ भाम्रक हैं। अगर पश्मीना में छेद हो जाता है, तो इसे दोबारा जोड़ना मुश्किल हैं क्योंकि धागे टूट जाते हैं।



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