Latest Updates
-
आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान -
Silao Style Crispy Khaja Recipe: घर पर बनाएं बिहार की मशहूर परतदार मिठाई -
Electricity Price Hike: यूपी की जनता को झटका! 10% बढ़ा फ्यूल सरचार्ज, जानें कम बिल लाने के 5 अचूक उपाय -
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी -
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश
बरसात में दहशत बढा देती हैं चूहों से फैलने वाली ये 6 बीमारियों, एक तो ले चुकी हैं सैकड़ों जान
6 Dangerous Diseases Spread by Rats : बारिश के दिनों में घरों में चूहों की आवक एकदम से बढ़ गई हैं। घरों में बढ़ते चूहें खतरनाक बीमारियों की वजह भी बन सकता है। चूहें कई खतरनाक बीमारियों के वाहक माने जाते है। चूहे एक नहीं बल्कि कई बीमारियों की वजह बन सकते हैं।
इसलिए अगर आपके घर में चूहों ने आतंक फैला रखा है, तो वक्त रहते इन्हें घर बाहर निकाल फेंके नहीं तो बारिश में यह आपको खतरनाक जानलेवा बीमारियां दे सकते हैं। आइए जानते हैं चूहों से फैलने वाली बीमारी के बारे में।

हंतावायरस
हंतावायरस दुनिया भर में लोगों को संक्रमित कर सकता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। हंता वायरस व्यक्ति के चूहे या गिलहरी के संपर्क में इंसान के आने से फैलता है। खासकर जब इंसान उनके मूत्र, मल और लार के संपर्क में आते हैं। यह चूहे के काटने या खरोंचने से भी फैल सकता है। इसके वायरस से व्यक्ति की जान भी जा सकती हैं। सभी चूहे हंता वायरस नहीं फैलाते हैं इनमें से भी चार प्रजातियां ऐसी हैं जो हंता वायरस का वाहक मानी हैं। इनमें सबसे अहम हैं अमेरिका में पाया जाने वाला डियर माउस। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हैं।
लेप्टोस्पायरोसिस
लेप्टोस्पायरोसिस को वेइल डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी चूहों के मूत्र में पाए जाने वाले लेप्टोस्पायर्स बैक्टीरिया के वजह फैलता है। ज्यादा बारिश होने और चूहों की संख्या बढ़ने से जीवाणुओं का फैलना आसान हो जाता है। बारिश के पानी में सह बैक्टीरिया मिल जाते हैं। खतरनाक जीवाणु आंख, नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। स्किन में कहीं कट लगा हो या घाव हो तो उसके जरिए यह भी यह शरीर में चले जाते हैं।
स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस बीमारी चूहे के ऊपर होने वाले पिस्सू से फैलती है। पिस्सू से बुखार के साथ खुजली चलने लगती है और शरीर पर दाग हो जाते हैं। लगातार खुजली और बुखार रहने से यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। बीमारी फैलने पर चूहों को नष्ट कर गड्ढे में गाड़ा जाना चाहिए।
साल्मोनेला
साल्मोनेला संक्रमण (साल्मोनेलोसिस, ) भी एक जीवाणु संक्रमण है जो मनुष्यों व जानवरों में दूषित पानी या भोजन से फैलता है। यह रोग बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में ज्यादा नजर आता है। जहां चूहों की तादाद बढ जाती है। चूहों के संपर्क में आए दूषित भोजन या गंदे पानी के संपर्क में आने से यह बीमारी फैलती है। इस संक्रमण में डायरिया, फीसेस में खून आना, ठंड लगना तथा सिर दर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं।
रैट-बाइट फीवर
बारिश या बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिन बीमारियों का खतरा बढ जाता है। इनमें से एक रैट फीवर भी है जो गंभीर बीमारियों की लिस्ट में आता है। साल 2018 में अकेले केरल में रैट फीवर से करीब 45 लोगों की मौत हुई थी।
रैट-बाइट फीवर (RBF) एक दुर्लभ जीवाणु रोग है जो आमतौर पर संक्रमित चूहों के काटने से फैलता है। RBF तब भी फैल सकता है जब कोई संक्रमित चूहा आपको खरोंचता है या आप चूहे की लार (थूक), मल (पूप) या मूत्र (पेशाब) के संपर्क में आते हैं। आरबीएफ एक गंभीर और यहां तक कि जानलेवा संक्रमण हो सकता है। इसमें बॉडी का लाल होना, स्किन में रैशेज और पीलिया की शिकायत होती है
प्लेग
प्लेग चूहों से फैलने वाली एक संक्रामक रोग है। प्लेग मुख्य रूप से येर्सिनिया पेस्टिस से संक्रमित पिस्सू के काटने से मनुष्यों में फैलता है, जो अक्सर चूहों द्वारा फैलता है। प्लेग संक्रमित व्यक्ति के खांसने पर निकलने वाली लार की बूंदों के ज़रिए भी मनुष्यों के बीच फैलता है और संक्रमित कर सकता है।
वर्ष 1300 और 1904 में आई प्लेग महामारी का कारण चूहे ही थे। हालांकि मौजूदा समय में प्लेग का इलाज है लेकिन इसका कोई टीका नहीं है। इस बीमारी का समय रहते इलाज न हो तो 90 प्रतिशत तक मुत्यु निश्चित है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications