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माता-पिता सावधान! गोलगप्पे खाने से गई 6 साल के बच्चे की जान, जानें गर्मी में फूड पॉइजनिंग के लक्षण
Food Poisoning Symptoms And Home Remedies: झारखंड के गिरिडीह जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां चाट-गोलगप्पे का स्वाद मातम में बदल गया। जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बजटो-कुम्हरगढ़िया गांव में शनिवार शाम गोलगप्पे खाने के बाद एक साथ 18 बच्चे और एक महिला गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। इस घटना में 6 साल के मासूम रंजन कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि 17 अन्य बच्चे अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। भीषण गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग की यह घटना एक बड़ी चेतावनी है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के बीच आखिर क्यों 'स्ट्रीट फूड' जानलेवा बनता जा रहा है, यह जानना हर माता-पिता के लिए बेहद जरूरी है। आइए जान लेते हैं फूड पॉइजनिंग के लक्षण और बचाव के उपायों के साथ-साथ गर्मियों में खासतौर पर बच्चों के लिए क्या खाना सही है और क्या खाने से परहेज करना चाहिए।

जानें क्या है पूरा मामला?
झारखंड के गिरिडीह जिले में एक 6 साल के मासूम बच्चे की गोलगप्पे खाने से मौत हो गई है। इस घटना के बाद से हड़कंप मच गया है। परिजनों के अनुसार, शनिवार शाम गांव में एक गोलगप्पा बेचने वाला आया था। गांव के बच्चों और बड़ों ने बड़े चाव से गोलगप्पे खाए, लेकिन कुछ ही घंटों बाद एक-एक कर बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई।
घबराए परिजनों ने पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया, लेकिन स्थिति बेकाबू होने पर उन्हें सदर अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान 6 साल के रंजन कुमार की मौत हो गई वहीं शिवम (12), दिवाकर (12), मनिता (13), अनुराधा (10), प्रिंस और 19 वर्षीय जागृति देवी का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद अलर्ट होते हुए अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस और जिला प्रशासन ने गांव का दौरा किया है और गोलगप्पे के सैंपल की जांच की जा रही है।
गर्मी में क्यों जहर बन जाता है स्ट्रीट फूड?
गर्मियों में फूड पॉइजनिंग का खतरा 10 गुना बढ़ जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण तापमान और स्वच्छता की कमी है। बता दें कि 35-45 डिग्री तापमान में साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। गोलगप्पे के पानी में इस्तेमाल होने वाली पुदीने की चटनी या आलू का मसाला अगर कुछ घंटों से ज्यादा बाहर रहे, तो वह जहरीला हो सकता है। इसके अलावा स्ट्रीट वेंडर्स अक्सर साफ पानी या फिल्टर्ड बर्फ का इस्तेमाल नहीं करते। दूषित पानी हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों का भी मुख्य कारण बनता है।
फूड पॉइजनिंग के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पेट में तेज ऐंठन और मरोड़ उठना।
लगातार उल्टी होना और जी मिचलाना।
दस्त (Diarrhea) और कभी-कभी मल में खून आना।
तेज बुखार और सिरदर्द।
शरीर में पानी की कमी (Dehydration) के कारण चक्कर आना।
बचाव के उपाय: गर्मी में क्या खाएं और क्या नहीं?
| क्या खाएं (Safe) | किन चीजों से करें तौबा (Avoid) |
| घर का बना ताज़ा और गर्म भोजन। | सड़क किनारे बिकने वाले कटे हुए फल (तरबूज, पपीता)। |
| नारियल पानी, नींबू पानी और ताज़ा छाछ। | खुले में बिकने वाले गोलगप्पे, चाट और दही-भल्ले। |
| पूरी तरह पकी हुई सब्जियां और दालें। | बिना ढका हुआ खाना या बासी सलाद। |
| ओआरएस (ORS) का घोल (डिहाइड्रेशन से बचने के लिए)। | गन्ने का जूस या लोकल बर्फ वाले ठंडे पेय। |
पेरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपके क्षेत्र में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, तो इन बातों का पालन करें:
बाहरी बर्फ से बचें: स्ट्रीट फूड वेंडर्स अक्सर 'इंडस्ट्रियल बर्फ' का इस्तेमाल करते हैं जो पीने योग्य नहीं होती।
हाथों की सफाई: बच्चों को कुछ भी खाने से पहले साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।
तरल पदार्थ: गर्मी में बच्चों को केवल सादा पानी न दें, बल्कि शिकंजी या नारियल पानी देते रहें ताकि उनकी इम्युनिटी बनी रहे।
घर का खाना: गर्मी के मौसम में जितना ज्यादा हो सके बाहर का खाना अवाइड करें। वरना आप फूड पॉइजनिंग का शिकार हो सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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